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विज्ञान

कैंसर सेल पकड़ने वाला कैमरा

कैंसर सर्जरी में बड़ी समस्या होती है कि कैंसर की कुछ कोशिकाएं शरीर में छूट जाती हैं और वह फिर पनप जाता है, लेकिन जर्मन वैज्ञनिकों ने एक ऐसा कैमरा विकसित किया है जो कैंसर की सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कैमरा तैयार किया है जो कैंसर की सूक्षमतम कोशिकाओं को देख सकता है. कैंसर के सेल रंगीन प्रकाश में इस कैमरे के सामने चमकते हुए दिखते हैं.

वैज्ञनिकों के अनुसार यह कैमरा सर्जनों को कैंसर और स्वस्थ कोशिकाओं के बीच अंतर करने में मदद करेगा. सर्जरी के दौरान अक्सर यह समझ पाना मुश्किल होता है कि कौन सा स्वस्थ सेल है और कौन सा कैंसर वाला. कैंसर के मरीजों के इलाज में एक बड़ी दिक्कत यह भी होती है कि कई छोटे छोटे कैंसर सेल रह जाते हैं और वे फिर से शरीर में विकसित हो जाते हैं. लेकिन जब इतने सूक्ष्म सेल कैमरे की मदद से देखे जा सकेंगे तो उन्हें शरीर से बारीकी से पूरी तरह निकाला जाना भी संभव हो सकेगा.

मानहाइम के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के निकोलाउस डेलियोलानिस ने बताया, "कैमरे की मदद से ट्यूमर की उन कोशिकाओं को देखा जा सकता है जिनका आकार मिलीमीटर में होता है और इसीलिए वे अक्सर सर्जन की नजर से छूट जाती हैं." डेलियोलानिस इस कैमरे को तैयार करने वाली रिसर्च टीम के प्रमुख हैं.

कैसे काम करता है कैमरा

ऑपरेशन से पहले डॉक्टर मरीज के शरीर में कैंसर वाले हिस्से में डाई का इंजेक्शन लगाते हैं. इस डाई में फ्लोरेसेंट यानि चमकते हुए एंटीबॉडी के ऐसे अणु होते हैं, जो जाकर ट्यूमर सेलों पर चिपक जाते हैं. डाई के ये अणु नीले, हरे, लाल या किसी और रंग के हो सकते हैं.

Spezialkamera für Tumore

डाई की मदद से देखा जा सकता है कि कौन सी कैंसर वाली कोशिकाएँ हैं जिन्हें निकाला जाना है.

ये रंगीन कण कैंसर कोशिकाओं पर चिपके हैं या नहीं यह देखने के लिए डॉक्टर एक निर्धारित वेवलेंथ वाली रोशनी से कैंसर वाले हिस्से को देखते हैं. कैमरे से देखने पर किसी भी चमकते हुए कण की छवि साधारण रंगों में दिखाई देती है. डेलियोलानिस ने बताया, "इसकी मदद से ऑपरेशन करने वाले को ज्यादा बारीक जानकारी मिलती है और कैंसर के मरीज की अच्छे होने की संभावना बढ़ जाती है."

उन्होंने बताया कि यह कैमरा एक बार में चार तरह की डाई देख सकता है. कैंसर वाले हिस्से में एक की बजाय एक साथ कई रंगों की डाई डालकर यह भी पता किया जा सकता है कि किस डाई के प्रति कैंसर सेलों की क्या प्रतिक्रिया है. इससे ट्यूमर की संरचना समझने में भी मदद मिलती है.

ब्रेन ट्यूमर की जांच

ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के इलाज में भी यह कैमरा बहुत काम का साबित हो सकता है. मस्तिष्क में कैंसर कहां से शुरू हो रहा है और किस जगह तक है, कहां से स्वस्थ कोशिकाएं शुरू हो रही हैं, यह कैमरे की मदद से देखा जा सकता है. ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी करने में इस बात का खास ख्याल रखना होता है कि सर्जन स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम हाथ लगाए.

ब्रेन ट्यूमर के किसी भी हिस्से को नजरंदाज किया जाना ठीक नहीं है. अगर थोड़ा सा भी हिस्सा दिमाग में रह जाता है, तो वह पहले के मुकाबले ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर में पहले से ही लाल डाई का इस्तेमाल किया जा रहा है. कैमरा इस लाल रंग को बड़ी आसानी से पकड़ लेता है.

डॉक्टर ऑपररेशन वाले हिस्से में 5-अमीनो लेवुलिनिक एसिड डालते हैं. यह कंपाउंड मरीज की कोशिकाओं से क्रिया कर लाल रंग बनाता है. क्योंकि कैंसर सेलों में स्वस्थ सेल के मुकाबले चयापचय ज्यादा होता है इसलिए वे ज्यादा डाई पीते हैं और ज्यादा रंगीन दिखते हैं.

दो हफ्ते में कैमरा होगा सामने

फिलहाल इस कैमरे की टेस्टिंग चल रही है. 20 से 23 नवंबर के बीच डुसेल्डॉर्फ के मीडिया ट्रेड फेयर के दौरान इस कैमरे का नमूना दिखाया जाएगा.

उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस कैमरे को सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाले माइक्रोस्कोप और एंडोस्कोप में इस्तेमाल किया जा सकेगा. 2014 में इसकी मदद से पहली सर्जरी की जाने की योजना है. इस दौरान ज्यादा ध्यान ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी पर दिया जाएगा.

रिपोर्ट: ब्रिगेटे ओस्टेराथ/ एसएफ

संपादन: आभा मोंढे

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