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मनोरंजन

केवल फिल्मों में ही नहीं होते मानसिक रोगी

मनोरोगियों पर बनी फिल्में हॉलीवुड में ब्लॉक बस्टर साबित हुई हैं. फिर चाहे 'साइको' हो, 'साइलेंस ऑफ द लैंब्स' या 'बेसिक इस्टिंक्ट'. पर क्या असली जीवन में भी मानसिक रोगी वैसे ही होते हैं जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है?

बेल्जियम के फॉरेंसिक चिकित्सक और उनकी टीम ने फिल्मी साइकोपैथ और सच में मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का विश्लेषण किया और पाया कि वे फिल्मी भूमिका से मेल खाते हैं. बेल्जियम के तुर्नेई में मारोनियर्स अस्पताल में फॉरेंसिक मनोरोग विशेषज्ञ सैम्युअल लाइस्टेड कहते हैं कि साइकोपैथी का पता लगाने के लिए फिल्म एक अच्छा माध्यम है. लाइस्टेड और उनकी टीम ने 400 ऐसी फिल्मों का डाटाबेस बनाया है. हालांकि इसमें से एक तिहाई फिल्में ही कैरेक्टर के सच्चे होने के आधार पर देखी गई.

उनका यह शोध जरनल ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस में प्रकाशित किया गया है. इस टीम ने पता लगाया कि समय के साथ फिल्मों में दिखाए गए मनोरोगी और सटीक हो गए हैं. लाइस्टेड कहते हैं, "मैं बहुत अच्छे से रचे गए इन कैरेक्टरों को पहचान सकती हूं. वो इतने सच्चे हैं कि आपको प्रैक्टिस के दौरान मिल ही जाते हैं. एक कैरेक्टर किलर एंटोन चिघुर से मेल खाता है. इसे खाविएर बार्डेम ने फिल्म 'नो कंट्री फॉर ओल्ड मेन' में बहुत अच्छे से निभाया है. लाइस्टेड ने बताया, "मैं एक ऐसे ही आदमी से मिला. वह बेल्जियम का था और एक आपराधिक संगठन के लिए हत्यारे का काम करता था. वह बहुत ही ठंडा और डरावना था."

अहिंसक मनोरोगी

वैसे ऐसा नहीं होता कि सभी मनोरोगी सिरियल किलर या बलात्कारी या फिर माफिया के हत्यारे हों. कुछ अहिंसक भी होते हैं. जैसे ओलिवर स्टोन की फिल्म 'वॉल स्ट्रीट' का गोल्डन गेको. वह बिना मार पीट किए भी लोगों का जीवन बर्बाद कर सकता है और फिर भी आराम से सो सकता है. लाइस्टेड कहते हैं, "गोल्डन गेको शायद सफल, मेनिपुलेटिव मनोरोगी का उदाहरण है जो आपको मारते नहीं हैं. वो बहुत लुभावने होते हैं. उन्हें झूठ बोलना और ताकतवर होना पसंद होता है."

शोध के मुताबिक रोचक बात यह है कि फिल्मों में दिखाई गई मनोरोगी महिलाएं चालाक किस्म की होती हैं. शैरोन स्टोन ने 'बेसिक इस्टिंक्ट' में ऐसी ही एक रोगी की भूमिका निभाई है जो लोगों को सेक्स के जाल में फंसा कर बर्फ से उनकी हत्या कर देती है. लेकिन सामान्य तौर पर शारीरिक आक्रामकता महिलाओं में कम होती है, "महिला मनोरोगी पुरुषों रोगियों की तुलना में ज्यादा चालाक होती हैं. हत्या का कारण भी अलग होता है. जैसे एक ब्लैक विडो अमीर बूढ़े आदमी से शादी कर उसके ड्रिंक में जहर मिला देती है." और पुरुष एकदम विपरीत होता है जिसके पास दिमाग से ज्यादा ताकत होती है.

दयाहीनता मुख्य लक्षण

बॉन में फिल्म आलोचक डीटमार कंटक कहते हैं कि मनोरोगियों की पर्सनालिटी का एक ही लक्षण होता है, फिल्म हो चाहे असली जीवन, वह है दया की अनुपस्थिति. साथ ही उनमें पश्चाताप या अपराधबोध नहीं होता. लाइस्टेड कहते हैं, "वे भावनाओं की नकल कर सकते हैं. बौद्धिक रूप से वे आपको बता देंगे कि दुख क्या होता है लेकिन वे दुख या बेचैनी महसूस नहीं करते."

भावनाएं महसूस नहीं कर पाने के कारण अलग अलग हो सकते हैं. जब मनोरोगियों को दर्द, आतंक या पीड़ा की तस्वीरें दिखाई जाती हैं तो एमआरआई पर उनके दिमाग में किसी तरह की गतिविधि नहीं दिखाई देती. दिमाग का दिल कहे जाने वाले दो हिस्से बिलकुल निष्क्रिय रहते हैं. एमआरआई स्कैन से पता चलता है कि मनोरोगियों का मस्तिष्क सामान्य व्यक्ति के दिमाग से कैसे अलग होता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है इसका कारण नहीं पता चलता. यह भी पता नहीं है कि ऐसा बचपन से होता है या आनुवांशिक क्योंकि सामाजिक अलगाव बचपन की पीड़ा है.

रिपोर्टः डायना फोंग/एएम

संपादनः ईशा भाटिया

Infografik Selection of Clinical Psychopaths in the movies

फिल्मों में मनोरोगी