1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ताना बाना

केरल के पूर्व आईजी फर्जी मुठभेड़ के दोषी

फर्जी मुठभेड़ के मामले में केरल के पूर्व पुलिस महानिदेशक दोषी करार. पूर्व आईजी 40 साल पहले केरल के जंगलों में नक्सली नेता ए वर्गीज की क्रूरता से हत्या करने के दोषी पाए गए. एक छात्र की हत्या के भी आरोप.

default

मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अदालत से कहा कि वर्गीज को मुठभेड़ में मारने की कहानी बनावटी हैं. सच्चाई यह है कि 18 फरवरी 1970 को नक्सली नेता ए वर्गीज को पुलिस ने पकड़ा और फिर तिरुवेल्ली के जंगल में ले जाकर उनकी हत्या कर दी.

सबूतों को देखने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई कोर्ट के विशेष जज एस विजय कुमार ने कहा, ''अब किसी और सबूत की जरूरत नहीं है. यह साफ हो चुका है कि वर्गीज को जिंदा पकड़ा गया और फिर पहले आरोपी (रामचंद्रन नायर) ने क्रूरता से उनकी हत्या की. नायर लक्ष्मण की कठपुतली था और उन्हीं के आदेश को उसने माना.''

पूर्व पुलिस महानिदेशक के लक्ष्मण अब 83 साल के हो चुके हैं. वह व्हीलचेयर पर हैं. लेकिन अदालत के फैसले के बाद उन्हें बाकी की जिंदगी जेल में काटनी पड़ेगी. सजा गुरुवार को सुनाई जाएगी.

मामले में यू टर्न 1998 में आया जब रिजर्व पुलिस के कांस्टेबल रामचंद्रन नायर ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. इसके बाद वर्गीज के भाई ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जांच सीबीआई को सौंपी गई. इसके बाद भी नायर ने बताया कि उसने अपने सीनियर विजयन और लक्ष्मण के कहने पर वर्गीज को गोली मारी. 2006 में नायर की मौत हो गई लेकिन आरोपियों के बचने का रास्ता बंद हो गया. हालांकि बुधवार को अदालत ने तत्कालीन एसपी विजयन को सबूतों को अभाव में राहत दे दी.

लक्ष्मण को दोषी ठहराए जाने से कई और परिवारों से सकून भरी सांस ली है. पूर्व आईजी 1976 में एक इंजीनियरिंग के छात्र की हत्या के भी आरोपी है. कालीकट इलाके से एक मार्च 1976 को राजन नामके छात्र को हिरासत में लिया. बाद में उसका शव मिला. राजन के पिता ने केरल हाईकोर्ट के जरिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और पता चला कि उनके बेटे की मौत पुलिस हिरासत में हुई.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: आभा एम

DW.COM

WWW-Links