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दुनिया

कूपर केस की फाइल बंद

1971 में अमेरिका में एक विमान का अपहरण हुआ. बीच में विमान उतरवाकर अपहर्ता ने एफबीआई से 2,00,000 डॉलर की फिरौती वसूली. और फिर उड़ान भरी. 45 साल की नाकामी के बाद एफबीआई अब यह केस बंद कर रही है.

24 नवंबर 1971 का दिन. पोर्टलैंड से सिएटल जा रही फ्लाइट में एक यात्री सवार हुआ. टिकट में उसका नाम डैन कूपर था. उम्र 40 के पार थी. टेक ऑफ के बाद जब विमान आराम से हवा में आगे बढ़ रहा था, तभी उसने एक केबिन क्रू को बुलाया और उसे एक पर्चा थमाया. पर्चे में लिखा था, "मेरे सूटकेस में बम है."

क्रू सदस्य ने पर्चा पायलटों को दिया. पायलटों ने विमान से ही एफबीआई से संपर्क किया. एफबीआई ने पायलटों को कुछ चीजें बताईं और कहा कि संदिग्ध से ये सवाल पूछें. पायलटों ने क्रू के जरिये डैन कूपर से संपर्क किया. कूपर ने इस बार अपना सूटकेस खोलकर दिखाया, उसके भीतर कई तार थे और उनमें लिपटी लाल छड़ियां थीं.

देखिये: कैसे कैसे शातिर

पायलटों ने यह जानकारी एफबीआई को दी. अब जांचकर्ताओं के हाथ पैर फूल गए. विमान सिएटल में लैंड हुआ. अपहर्ता ने साफ चेतावनी दी कि अगर एफबीआई ने कोई चालाकी की तो वह विमान को उड़ा देगा. कूपर ने विमान में सवार बाकी 36 लोगों को उतरने दिया. इस दौरान उसने फिरौती की 2,00,000 डॉलर की रकम भी मंगाई. एफबीआई ने नोटों की गड्डियों से भरे बैग उस तक पहुंचवाए. जांच एजेंसी ने नोटों को मार्क किया था, ताकि देर सबेर नोटों के सीरियल नंबर से अपहर्ता को पकड़ा जा सके.

अपहर्ता कूपर ने कई क्रू सदस्यों को विमान में ही रोक लिया. इसके बाद एफबीआई के सामने विमान सिएयटल से निकला. तब तक बाहर अंधेरा हो चुका था, कूपर ने पायलटों को मेक्सिको सिटी जाने का निर्देश दिया. विमान के पीछे अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमान भी लगे थे. पूरा सिस्टम कूपर को दबोचने के लिए मुस्तैदी से तैयार था.

उड़ान के दौरान कूपर ने क्रू मेम्बरों से केबिन की तरफ जाने को कहा. उनके केबिन में जाने के कुछ ही देर बार कूपर ने 10,000 फुट की ऊंचाई से विमान से छलांग मार दी. कूपर के पास पैराशूट था. वहीं रात होने की वजह से वायुसेना के विमान उसे देख नहीं सके. इसके बाद एफबीआई और पुलिस ने सिएटल से रेनो और नेवाडा के बीच पड़ने वाले जंगल और नदी नालों को छान मारा लेकिन तिनका भी हाथ नहीं लगा.

वारदात के नौ साल बाद 1980 में कोलंबिया नदी के पास एक बच्चे के पास 20 डॉलर का नोट मिला. उस पर वही सीरियल नंबर था जो कूपर को दी गई रकम में था. एफबीआई ने सैकड़ों लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन कूपर केस में और कोई सुराग नहीं मिला.

अब एफबीआई ने इस केस को बंद करने का आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया. एजेंसी ने एक बयान जारी कर कहा कि, "जांच के दौरान मिले कुछ सबूतों को ऐतिहासिक कारणों से वॉशिंगटन डीसी में एफबीआई के मुख्यालय में रखा जाएगा."

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