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फीडबैक

कुछ नया होता है

मुझे मधुमक्खियों की उपयोगिता के बारे में जानकर बहुत खुशी हुई. अब मैं कभी मधुमक्खियोँ को नहीं मारूंगा, लिखते हैं दीपक धाकड़. और पाठकों ने क्या लिखा है पढ़िए यहां..

मैं मंथन का हर साप्ताहिक एपिसोड देखता हूं. मैं यह जानना चाहता हूं कि फेसबुक और गूगल किस प्रकार हमारे डाटा को निरापद रूप से इकट्ठा करते हैं और मैं एक सुझाव भी देना चाहूंगा कि आप मंथन के लिए एक ऐप बनाए. राज प्रसाद, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल

पहली बार मुझे इस कार्यक्रम के बारे में पता चला और मैंने इसे देखा. इसमें कोई शक नहीं, यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर एक उत्कृष्ट और बहुत बहुत जानकारी पूर्ण कार्यक्रम है. प्रस्तुति भी रोचक और आकर्षक थी. आपकी टीम एक बहुत अच्छा काम कर रही है. ऑल द बेस्ट. आबिद आजाद, गुवाहाटी

मंथन वास्तव में बहुत शैक्षिक शो है. मधुमक्खियों का विषय बहुत ही महत्वपूर्ण था. ईशा भाटिया और ओंकार जी की चर्चा ने तो इसे समझने के लिए और आसान बना दिया. मधुमक्खियों की रक्षा और उनकी आबादी में वृद्धि के लिए इस तरह की गतिविधियां आवश्यक हैं. इस विषय ने मुझे अल्बर्ट आइंस्टाइन की याद दिला दी जिन्होंने मधुमक्खियों को महत्व देते हुए कहा है "यदि मधुमक्खियां पृथ्वी पर से गायब हो जाए तो मनुष्य के पास केवल चार साल और होंगे जीने के लिए.“ श्रीकांत सेठी

बहुत ही अच्छा प्रोग्राम था. हमें मंथन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है. हर एपिसोड में कुछ नया ही होता है. पिंटू डाभी

आज का मंथन ज्ञान विज्ञान से भरपूर था. मुगले आज़म के लिये शीशा उस वक्त यूरोप से लाया गया था यह जानने को मिला और आज भी दुनिया में ऐसे लोग हैं जो शीशे से लोगों का मन मोह रहे है. मधुमक्खियों और पर्यावरण पर चर्चा भी बेहद रोचक थी हमारे जीवन में मधुमक्खियां कितनी जरुरी है. साथ ही फूल,फल और सब्जियों पर इनका असर पड़ता है यह सब जानने को मिला. इतनी अच्छी जानकारी देने के लिये आप सभी को हार्दिक बधाई. रेशमा खातून, कोआथ, बिहार

हमारी वेबसाइट पर पृथ्वी को ठंडा करने वाली तकनीक फोटो गैलरी को देख कर शेओ नारायण बेरिया अपने विचार हमें लिख भेजे हैं.