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दुनिया

किसने पता लगाया रूसी बुक के बारे में

उनका नाम ज्यादा विख्यात नहीं है, लेकिन उनके दावे ने दुनिया भर में तहलका मचा दिया. बेलिंगकैट रिसर्च टीम के इग्गी ओस्टानिन का कहना है कि इस बात के सबूत हैं कि बुक रॉकेट सिस्टम रूस से पूर्वी यूक्रेन में पहुंचा.

पूर्वी यूरोप के एक देश की राजधानी में युवा पत्रकारों के लिए रिसर्च करने का एक सेमिनार. पर्दे के बगल में एक व्यक्ति जो देखने में ही कंप्यूटरफ्रीक लगता है. पतला, लंबा चेहरा, बड़ा काला चश्मा, शर्मीली निगाहें. उसका नाम इग्गी ओस्टानिन है. 26 वर्षीय ओस्टानिन ब्रिटेन के यॉर्क शहर में कानून की पढ़ाई करते हैं. जिन तस्वीरों को वे पर्दे पर दिखा रहे हैं वे एक साल पहले दुनिया भर में छा गई थीं. हवाई रक्षा सिस्टम बुक, जिसे 17 जुलाई को मलेशिया एयरलाइंस के विमान को मार गिराए जाने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है. ओस्टानिन पहले व्यक्ति थे जिसने इस बात का सबूत दिया कि बुक रॉकेट रूस से आया था.

उनकी रिपोर्ट को सितंबर 2014 में ब्रिटेन की रिसर्च टीम बेलिंगकैट ने छापा था और दुनिया भर की सुर्खियां बटोरी थीं. रूस ने उस समय इस रिपोर्ट की आलोचना की थी लेकिन इस बीच रूसी मीडिया भी कह रहा है कि यह रॉकेट रूस से आया. शुरू में इस रिपोर्ट के सिलसिले में सिर्फ बेलिंगकैट का नाम सामने आ रहा था, लेकिन इस बीच अक्सर ओस्टानिन का इंटरव्यू किया जा रहा है और उन्हें बोलने के लिए बुलाया जाता है. ओस्टानिन ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें नाज है कि उन्होंने सच की खोज में योगदान दिया है.

इंटरनेट रिसर्च

अपने बारे में ओस्टानिन बताते हैं कि वे रूसी मूल के हैं और जब वे नौ साल के थे, उनका परिवार देश छोड़ ब्रिटेन चला आया था. उनका असली नाम इगनात है, लेकिन आसानी के लिए उन्होंने अपना नाम इग्गी कर लिया है. वे असल में कंप्यूटरफ्रीक नहीं हैं, उन्हें तो बस ऑनलाइन रिसर्च से प्यार है, "आपको थोड़ा नर्ड तो होना ही चाहिए ताकि आप घंटों तक कंप्यूटर पर समय बिताएं और सोशल नेटवर्क में सैकड़ों तस्वीरें देखें." लोग जिस पर चर्चा करते हैं, उन्हें उसकी सत्यता की जांच करने में मजा आता है.

Iggy Ostanin

इग्गी ओस्टानिन

रूस द्वारा क्रीमिया के अधिग्रहण और पूर्वी यूक्रेन में लड़ाई शुरू होने के बाद ओस्टानिन अक्सर यह काम करने लगे. वे कहते हैं, "मेरे पास समय था और यूक्रेन विवाद में मेरी दिलचस्पी थी." वे खुद रूसी हैं इसलिए उनकी रूसी मीडिया तक भी पहुंच थी. उन्होंने पाया कि रूसी और पश्चिमी मीडिया अलग अलग तरह से रिपोर्टिंग कर रहे हैं. सोशल मीडिया में उन्होंने इस बात के सबूत पाए कि रूसी सैनिक पूर्वी यूक्रेन में थे, हालांकि मॉस्को इसका खंडन कर रहा था. शुरू में ओस्टानिन ने इस खबर को अपने तक ही सीमित रखा.

तीसरा आर्टिकल

17 जुलाई को उनकी जिंदगी बदल गई. उन्हें जब दुर्घटना की खबर मिली तो वे खुद हॉलैंड में थे. पूरा देश सदमे में था, क्योंकि हवाई दुर्घटना में मरने वाले ज्यादातर लोग हॉलैंड के थे. वे बताते हैं, "मुझे याद है कि मैं स्तंभित था, मुझे गुस्सा आ रहा था." अगस्त में उन्होंने न्यूयॉर्क के आधुनिक रूस संस्थान के लिए अपना पहला आर्टिकल लिखा. इसके अध्यक्ष पावेल खोदोरकोव्स्की हैं जिनके पिता और क्रेमलिन विरोधी मिखाइल खोदोरकोव्स्की को काफी दिनों तक कैद में रखा गया था. इस लेख में रूसी सैनिक अधिकारी इगोर गिरकिन की चर्चा थी जो उस समय डोनेत्स्क पीपुल्स रिपब्लिक के रक्षा मंत्री थे.

कुछ समय बाद अगस्त में इग्गी ओस्टानिन ने अपना दूसरा लेख लिखा. उन्होंने सोशल मीडिया में मिले संकेतों की मदद से पूर्वी यूक्रेन में रूस की विशेष टुकड़ी की उपस्थिति को साबित किया. माग्नित्स्की के नाम से लिखे गए इस लेख को उन्होंने बेलिंगकैट को दिया. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले इस नाम के वकील की रूसी जेल में मौत हो गई थी. जब सितंबर में ओस्टानिन ने एमएच17 मामले में रूसी भागीदारी की खोज शुरू की, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह कौन सा आयाम लेगा. उन्होंने सोचा था कि अनुभवी पत्रकार पहले ही इसकी जांच कर चुके होंगे, लेकिन फिर उन्होंने अपनी कोशिश शुरू की.

मिला सुराग

चार दिनों के अंदर ओस्टानिन को इस बात के संकेत मिले कि मलेशियाई विमान को कथित तौर पर मार गिराए जाने के लिए जिम्मेदार रॉकेट बुक रूस से और सही तौर पर कुर्स्क शहर में तैनात 53वें हवाई रक्षा ब्रिगेड से आया है. वे बताते हैं, "सबसे पहले मैंने इंस्टाग्राम में बुक और हवाई रक्षा के लिए रूसी शब्द पीडब्ल्यूओ खोजना शुरू किया." उन्हें ओस्कॉल शहर में ली गई एक तस्वीर मिली जिसमें बुक के साथ एक सैनिक काफिले की तस्वीर थी. ओस्टानिन ने खोज जारी रखी और उन्हें यूट्यूब पर उस काफिले की और तस्वीरें मिलीं.

ओस्टानिन ने इन तस्वीरों को फ्रांसीसी पत्रकार द्वारा पूर्वी यूक्रेन में ली गई बुक की एक तस्वीर से मिलाया जो दुर्घटना के बाद प्रकाशित हुआ था. उन्होंने पाया कि दोनों एक ही रॉकेट लॉन्चर थे. इसके बाद ओस्टानिन ने यह पता लगाने की कोशिश की कि बुक रूस में कहां से आया. उन्हें सैनिक काफिले पर 50 का नंबर दिखा. एक रूसी इंटरनेट फोरम में उन्होंने पता किया कि कौनसी टुकड़ी बुक का इस्तेमाल करती है और गाड़ी पर 50 नंबर का. इससे पता चला कि बुक संभवतः कुर्स्क में स्थित 53वें ब्रिगेड का है. इस बार उन्होंने अपने नाम से लेख लिखा और बेलिंगकैट को दिया. उसके बाद सब कुछ इतिहास है.

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