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दुनिया

किसको होगा लाभ, किसको होगा नुकसान

1 जुलाई से लागू किये जाने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत टैक्स की दरों को तय कर लिया गया है. ये दरें 5,12,18,28 फीसदी है. भारत में इसे अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है.

जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर 5, 12, 18 और 28 फीसदी की दर से कर लगाया जाएगा. कुछ जरूरी सेवाएं मसलन स्वास्थ्य और शिक्षा को टैक्स फ्री रखा गया है. पांच सितारा होटल, सिनेमा आदि सेवाओं को लग्जरी मानते हुए उन पर 28 फीसदी टैक्स तय किया है हालांकि ट्रांसपोर्ट को जरूरी सेवा के दायरे में रखा गया है और इस 5 फीसदी की टैक्स दर तय की गई है.

बड़े होटलों से इतर छोटे होटलों और रेस्तरां पर कर की सबसे निचली दर तय की गयी है. लेकिन ये दर होटलों के किराये मुताबिक तय होगी. 2,500 से 5,000 तक किराया वसूलने होटल 18 फीसदी के दायरे में आयेंगे. 1,000 से 2,500 किराया वसूलने वाले होटलों को 12 परसेंट टैक्स चुकाना होगा. 5,000 से अधिक किराया वसूलने वाले होटल 28 फीसदी के दायरे में आयेंगे. लेकिन मोबाइल बिल महंगा हो सकता है. अब तक मोबाइल बिल पर 15 फीसदी टैक्स लगता था जिस पर अब 18 फीसदी टैक्स लगेगा.

5 फीसदी कर

मछली और इससे जुड़े पदार्थ, क्रीम, मिल्क पाउडर, डिब्बा बंद मिल्क, ब्रांडेड पनीर, फ्रोजेन सब्जियां, पैक्ड कॉफी-चाय, चीनी, मसाले, रिफाइंड तेल, मिठाई, पिज्जा की ब्रेड, साबूदाना, केरोसिन, कोयला, दवा, स्टेंट, गिट्टी, लाइफ बोट, माचिस, साइकिल टायर, अखबारी कागज, ईंट, प्लेन, शिप, चुनिंदा आइवरी मैटीरियल, सोलर पैनल, विंड टरबाइन.

12 फीसदी कर

फ्रोजेन मीट और इससे जुड़े आइटम, मक्खन, चीज, घी, मेवे, चर्बी, सॉसेज, जूस, नमकीन, आयुर्वेदिक दवा, इलाज के उपकरण, दंतमंजन, अगरबत्ती, मोमबत्ती, ड्रॉईंग बुक, पिक्चर बुक, छाता, सिलाई मशीन, मोबाइल, पेन, पतंग, जियोमेट्री बॉक्स, बर्तन, चाकू, ट्रैक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, कंघी, पेंसिल.

18 फीसदी कर

पास्ता, कॉर्नफ्लेक्स, पेस्ट्रीज, केक, सब्जियों का अर्क, कत्था, जैम, सॉस, सूप, आइसक्रीम, रेडी टू ईट फूड, मिनरल वाटर, टिशू पेपर, रुई, सुई, नोटबुक, स्टील उत्पाद, कैमरा, फिल्म रोल, हेल्मेट, लकड़ी, कार्बन पेपर, टॉयलेट पेपर, स्पीकर, मॉनिटर, गुब्बारे, बटन, ज्यादातर रसायन और धातु, हेयर ऑयल, साबुन और टूथपेस्ट.

28 फीसदी कर

च्युइंग गम, शीरा, व्हाइट चॉकलेट, चॉकलेट वेफर, पान मसाला, सोडा वाटर, कस्टर्ड पाउडर, ग्रेनाइट सीमेंट, पेंट, कार टायर, मैट्रेस, सूटकेस, पर्स, नकली फूल, डियोड्रेंट, शेविंग क्रीम, आफ्टर शेव, शैंपू, डाई, सनस्क्रीम, वॉलपेपर, सिरैमिक टाइल्स, सीमेंट, कांच, वॉटर हीटर, नेम प्लेट, एसी, ट्रक, धूप के चश्में, घड़ी, लैंप, डिशवॉशर, वॉश बेसिन, एटीएम, वेंडिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, शेवर, हेयर क्लीपर, कार, मोटरसाइकिल, प्राइवेट जेट.

कंपनियों पर पड़ सकता है असर

एफएमसीजी

जीएसटी के तहत दैनिक उपभोग में आने वाली वस्तुयें मसलन दूध, फल, अनाज को कर दायरे से बाहर रखा गया है. चीनी, चाय, कॉफी, और खाद्य तेल को 5 फीसदी के दायरे में रखने से हिंदुस्तान लीवर, नेस्ले इंडिया और डाबर इंडिया जैसी कंपनियों को लाभ होगा. लेकिन पर्सनल केयर आइटम पर 28 फीसदी और टूथ पेस्ट जैसे आइटम पर 18 फीसदी कर तय होने का असर कॉलगेट-पामोलिव, गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स आदि पर पड़ेगा.

सीमेंट और धातु

कोयले और धातु पर 5 फीसदी की जो नई कर दर तय की गई है उससे स्टील निर्माताओं की लागत घटेगी और जेएसडब्ल्यू, वेदांता, टाटा स्टील और हिडांल्को इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों को लाभ मिलेगा. इसका अप्रत्यक्ष फायदा निर्माण क्षेत्र को भी मिलेगा.

ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स

ऑटो क्षेत्र में मार्जिनल असर देखने को मिल सकता है क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में भी ऑटो निर्माता कंपनियां अलग-अलग स्तर पर कर भुगतान करती थी लेकिन अब कर का एक स्तर तय हो जाने से लाभ ग्राहकों को मिल सकता है. इससे घरेलू कार कंपनियों को भी लाभ मिलेगा. लेकिन उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में कंपनियां लाभ मार्जिन बनाये रखने के लिए कीमतों में वृद्धि कर सकती हैं.

अक्षय ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए सोलर पैनल, विंड टरबाइन और इनसे जुड़े उपकरणों को 5 फीसदी की श्रेणी में रखा गया है. बुनियादी ढांचा क्षेत्र में काम करने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स को 6 फीसदी केंद्रीय कर और कुछ राज्य स्तरीय कर देना होता है लेकिन अब तक उन्हें कोई इनपुट क्रेडिट नहीं मिलता है लेकिन अब जीएसटी के तहत ऐसे कॉन्ट्रैक्टर्स को सभी इनपुट क्रेडिट की उपलब्धता के साथ 12 फीसदी टैक्स चुकाना होगा.

अब भी सोने समेत कुछ अन्य चीजों के लिए कर दर तय नहीं की गई है. 3 जून को एक बार फिर जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है.

एए/ओएसजे (रॉयटर्स)

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