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मनोरंजन

'किल द रेपिस्ट?'

भारत में हाल में सामने आई बलात्कार की घटनाओं के बाद बॉलीवुड ने भी इस विषय की ओर रुख किया है, नई फिल्म का नाम है किल द रेपिस्ट?

एक के बाद एक कई बलात्कार करने वाला एक आदमी युवा महिला के पीछे पड़ा है. जैसे ही वो घर में अकेली मिलती है, वह घर में घुसता है, चाकू लड़की के गले पर लगाता है और उस पर जोर जबरदस्ती करने की कोशिश करता है. किसी तरह वो लड़की उसके चंगुल से छूटती है और अपराधी पर हावी हो जाती है. अब सवाल खड़ा होता है कि वह अपराधी के साथ क्या करे, उसे मार दे और गार्डन में दफना दे या फिर भ्रष्टाचारी कहे जाने वाली पुलिस को फोन करे?

संजल चेल के निर्देशन वाली यह फिल्म दिसंबर में रिलीज होगी, नई दिल्ली में एक लड़की के साथ बलात्कार की क्रूर घटना के एक साल बाद. निर्देशक चेल कहते हैं, "मैं बहुत समय से एक ऐसी फिल्म बनाना चाहता था जो बलात्कार के मुद्दे, पीड़ित और अपराधी की मनस्थिति पर केंद्रित हो. लेकिन इसे बॉलीवुड के खास अंदाज में नहीं बनाना चाहता था."

महिलाओं की भूमिका

पारंपरिक संगीत और डांस से भरी हिन्दी फिल्मों में महिलाओं की भूमिका कमतर ही दिखाई देती है, हालांकि सिर्फ ऐसा ही यह नहीं कहा जा सकता, तस्वीर में धीमे ही सही लेकिन बदलाव हो रहा है. ऐसी भी कई फिल्में आई हैं जिसमें महिलाओं को मजबूत भूमिका में रखा गया है, लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस के लिए नहीं बनाई जाती और वहां चलती भी नहीं.

महिला अधिकारों के लिए नई दिल्ली में काम करने वाली उर्वशी बूटालिया को फिल्म के नाम से आपत्ति है, भले ही इसमें प्रश्नवाचक चिह्न लगा हुआ हो. वे कहती हैं, "नाम अनजाने में ही एक रास्ता बता देता है और वह ये कि बलात्कारियों को रास्ते से हटा देना चाहिए. भारत में हम अभी भी इस मुददे पर बहस कर रहे हैं कि मौत की सजा लोगों में भय पैदा करने का सही तरीका है या नहीं."

Indien Film Kinoposter Kill the Rapist von Sanjay Chhel

संजय चेल की फिल्म किल द रेपिस्ट

बूटालिया कहती हैं कि बॉलीवुड समस्याओं के हल में एक बड़ी भूमिका रखता है. लेकिन महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव पर उसने प्रतिरोधात्मक भूमिका निभाई है. उनके मुताबिक, अभिनेत्रियों का लुक जरूर बदला है. लेकिन भारतीय समाज में महिलाएं जो काम करती है, वह नहीं बदला है."

किल द रेपिस्ट नाम की फिल्म में मुख्य भूमिका 23 साल की अंजली पाटिल निभा रही हैं. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ी यह कलाकार नाटकों में भूमिका के लिए कई पुरस्कार पा चुकी हैं.

संजय चेल अपनी जिम्मेदारी समझते हैं. वह बताते हैं, "मुझे महिला अदाकारों को समझाना पड़ा कि मैं कोई अश्लील फिल्म नहीं बना रहा, जहां दर्शकों को खुली त्वचा देखने को मिलेगी." सीरियल रेपिस्ट की भूमिका में सनी हिंदूजा हैं.

रोचक विषय

नई दिल्ली में हुए बलात्कार और दोषियों को मिली सजा पर भारतीय मीडिया लगातार खबरें दे रहा है. लोग इस विषय पर बात कर रहे हैं. उर्वशी बूटालिया इससे खुश हैं, मां बाप इस बारे में बात कर रहे हैं कि वह कैसे अपने बच्चों को इस विषय के बारे में बताएं. स्कूलों में यौन शिक्षा दिए जाने के बारे में बात हो रही है. और भले ही कमियों के साथ लेकिन एक नया एंटी रेप लॉ लागू हुआ है." वह कहती हैं कि शायद यह सबसे बड़ी सफलता है कि लोगों का अभियान अभी ठंडा नहीं पड़ा है.

चेल जानते हैं कि भारत का समाज एक रात में नहीं बदल सकता और एक ऐसी फिल्म से तो निश्चित ही नहीं, जिसमें न तो बड़े स्टार हैं और न ही बड़ा बजट. वह कहते हैं, "लेकिन कम से कम विचार की एक लहर तो उठेगी. यही मेरा योगदान है, भले ही यह बहुत छोटा सा क्यों न दिखाई दे."

रिपोर्टः प्रिया एसेलबॉर्न/एएम

संपादनः निखिल रंजन

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