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ताना बाना

कितने धार्मिक हैं अमेरिकी

भारत संविधान के तहत धर्मनिरपेक्ष है लेकिन हम सब जानते हैं कि धर्म भारत के सामाजिक-राजनीतिक जीवन में कितना अहम है. अमेरिका का भी कोई राजकीय धर्म नहीं. लेकिन देश की राजनीति पर उसका असर न पड़ता हो, ऐसा नहीं है.

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बल्कि पिछले कुछ वर्षों से, विशेष रूप से, रिपब्लिकन पार्टी में, धार्मिक जोशोखरोश वाले लोगों का एक तबका काफी हावी रहा है. आम जनता में इस समुदाय के प्रभाव का कारण यह है कि आम अमेरिकी अपने आपको खासी धार्मिक प्रवृत्ति का मानता है. कम से कम आम अमेरिकी की छवि बाकायदा ऐसी है. हालांकि इस निष्कर्ष पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाया जा रहा है.

हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार हर 5 में से 2 अमेरिकी अपने धर्मस्थानों पर औपचारिक प्रार्थनाओं में शामिल होते हैं. 90 प्रतिशत से अधिक अमेरिकी ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखते हैं और 70 प्रतिशत से अधिक को इस बारे में रत्ती भर भी संदेह नहीं कि ईश्वर है. इन सब आंकड़ों से तो एक ही सहज निष्कर्ष निकलता है. यही कि अमेरिकी अन्य औद्योगिक देशों के नागरिकों की तुलना में कहीं अधिक धार्मिक है.

Papst Benedikt besucht Vereinigte Staaten

कितने धार्मिकः

लेकिन क्या अमेरिकी सचमुच उतने धार्मिक हैं, जितना वे अपने आपको जताने की कोशिश करते हैं? सर्वेक्षणों से जरा आगे जाएं, तो कुछ और ही तथ्य सामने आते हैं.

समाजविज्ञानियों ने अमेरिकीयों के धार्मिक आचरण की कहीं अधिक कड़ी समीक्षाएं अंजाम दी हैं. बजाए लोगों से यह पूछने कि वे कितने नियमित रूप से चर्च जाते हैं, इन बेहतर अध्ययनों में यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि लोग वास्तव में क्या करते हैं. परिणाम हैरत में डालने वाले हैं. यह कि अमेरिकी अन्य औद्योगिक देशों के नागरिकों की तुलना में अधिक धार्मिक नहीं हैं. यह और बात है कि वे यह ज़रूर चाहते हैं कि दुनिया उन्हें उससे अधिक धार्मिक समझे, जितने वे वास्तव में हैं.

कारण? अमेरिका में धर्म व्यक्ति की पहचान के सवालों से ऐसे रूपों में जुड़ा जान पड़ता है, जैसा अन्य औद्योगिक देशों में नहीं है. आप किसी अमेरिकी से उसके धार्मिक विचारों के बारे में पूछें, तो सवाल उनके लिए ऐसा है, मानो आप पूछ रहे हों कि वे अच्छे इनसान हैं या नहीं. या फिर यह कि वे अपने देश से प्यार करता है या नहीं. अगर कोई अमेरिकी अपने कर चुकाने में बेईमानी भी करता हो, सरकारी कार्यक्रमों से अनुचित लाभ भी उठाता हो या कानूनों की जद से बचकर निकल जाना चाहता हो, तब भी वह यह स्वीकार नहीं करेगा कि वह देशभक्त नहीं है. इसी तरह धर्म के बारे में सवाल पूछे जाने पर लोग आम तौर पर वैसे जवाब देते हैं, जिनसे वे अच्छे दिखाई दें. अपनी ऐसी पहचान बताने वाले जवाब, जैसी कि उनके विचार में वह दरअस्ल होनी चाहिए. ज़ाहिर है उनके असली आचरण से कहीं अलग तरह की पहचान.

कितना सचः

अकसर ऐसे सवाल के जवाब में कि वे कितनी बार चर्च जाते हैं, उनका जवाब अपनी उस पहचान को जताने वाला होता है जो उनके विचार में होनी चाहिए. बजाए उसके कि जो वे वास्तव में हैं. बहुत मुमकिन है कि अनेक अमेरिकी बहुत धार्मिक हैं, चाहे वे उतना चर्च न जाते हों, जितना अधिक स्वयं उनके विचार में उन्हें जाना चाहिए. दिलचस्प बात यह है कि ऐसे जवाबों को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है कि धर्मनिरपेक्षता की जिस लहर ने अन्य औद्योगिक देशों को अपनी लपेट में ले लिया है, अमेरिका किसी तरह उससे बाहर बना हुआ है. लेकिन क्या सर्वेक्षणों के आंकड़े सही हैं?

Barack Obama und Erzbischhof Demetrios

एक सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिकी लगभग उतनी बार ही चर्च जाते हैं, जितना कि इटली के और यूरोप के कई अन्य देशों के नागरिक. लेकिन सवालों के जवाब देने में वे यूरोपीयों के मुकाबले अतिशयोक्ति से काम लेते हैं. इस मामले में कनाडा के नागरिक भी अमेरिकीयों जैसे हैं. समीक्षक कहते हैं कि एक कारण हो सकता है उत्तर अमेरिकी उपनिवेशवाद की यूरोपीय जड़ें. उत्तर अमेरिका आए यूरोपीय आबादकार धार्मिक स्वतंत्रता की तलाश में नई दुनिया में आकर बसे. शायद इसलिए कि वे धर्म के बारे में पीछे छूटे यूरोपीयों की तुलना में अधिक गंभीर थे. और उनका वही मनोविज्ञान आज भी काम कर रहा है.

धर्म और राष्ट्रपतिः

लेकिन यह भी सच है कि निजी स्तर पर अपनी सारी धार्मिकता के बावजूद अमेरिकी राजनीति में धर्म का अधिक दखल पसंद नहीं करते. यह बात अलग है कि परंपरावादियों का एक धड़ा हमेशा नैतिकता के नाम पर धर्म की दुहाई देता रहता है. और इस वर्ग के लोग गलत और भ्रामक सूचनाएं या अफवाहें फैलाने में भी पीछे नहीं रहते. जो भी हो, इस बात का श्रेय अमेरिकी जनता को ही दिया जाना होगा कि 2008 में बराक ओबामा के बारे में झूठे तथ्य फैला कर उसे मुद्दा बनाने की सारी कोशिशें बेकार हुईं और ओबामा स्पष्ट और बड़े बहुमत से देश के राष्ट्रपति चुन लिए गए.

बहुमत के लिए रिपब्लिकनों के रूढ़िवादी धड़े पर बड़ी सीमा तक निर्भर रहने वाले जॉर्ज डब्ल्यू बुश भी राजनीति में धार्मिकता के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ हैं. ईश्वर और धर्म में गहरी आस्था रखने वाले बुश ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, "मेरे विचार में राजनीतिक नेताओं के लिए धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझना बहुत महत्वपूर्ण है. मैं उन लोगों के बारे में चिंता करता हूं जो बुनियादी तौर पर यह कह रहे होते हैं कि मैं धार्मिक हूं, इसलिए दूसरों से अधिक बेह्तर हूं."

जहां तक ओबामा की बात है, उनकी निजी धार्मिक आस्था का मामला मौजूदा व्हाइट हाउस के लिए जनसंपर्क की एक जद्दोजहद रहा है. ओबामा ईसाई हैं लेकिन इस सिलसिले में बनी हुई भ्रांतियों से लड़ना उनके प्रशासन के लिए आसान नहीं रहा है. पिछले वर्ष एक मतसर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 18 प्रतिशत अमेरिकीयों का विचार है कि ओबामा मुस्लिम हैं. राष्ट्रपति यह बात सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कह चुके हैं कि वह ईसाई हैं. हालांकि वह अपनी निजी आस्था को मुद्दा बनाने के पक्ष में नहीं हैं. न ही वे सार्वजनिक प्रार्थना सभाओं में भाग लेते हैं. अपने शासन के अब तक के दो वर्षों में ओबामा कुल आठ सार्वजनिक प्रार्थना सभाओं में शामिल हुए हैं.

रिपोर्टः गुलशन मधुर, वॉशिंगटन

संपादनः ए जमाल