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दुनिया

कास्त्रो की पहचान और राउल

अमेरिका की तमाम बाधाओं के बावजूद क्यूबा को लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के संघ सीलैक की अध्यक्षता मिली. लंबे वक्त बाद यह मौका आया है जब क्यूबा के राष्ट्रपति को यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ हाथ मिलाते देखा गया.

हाल ही में क्यूबा को जब लातिन अमेरिकी और कैरिबियाई राष्ट्रों के संघ सीलैक की अध्यक्षता मिली तो 81 साल के राउल कास्त्रो ने आर्थिक मुद्दों को उठाया और कहा कि मौजूदा विश्व अर्थव्यवस्था तर्कसंगत नहीं है और यह लोगों को शामिल करने की जगह उन्हें अलग करने की नीति पर आधारित है.

उनके भाषण में वह जोश नहीं था, जो फिडेल के भाषणों में होता था लेकिन मुद्दा वही था. फिडेल पश्चिम पर आरोप लगाते हुए घंटों भाषण दे सकते थे. संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्होंने कई बार ऐसा किया है.

हालांकि राउल की शख्सियत से पता चलता है कि अगर अमेरिका न हो तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह मिल सकती है. भाई फिडेल से 2006 में सत्ता संभालने के बाद से राउल आम तौर पर निजी जीवन में ही व्यस्त रहे हैं और उनके भाषण भी छोटे छोटे रहे हैं.

Eröffnung CELAC Gipfel Chile

चिली में सीलैक ईयू शिखर भेंट

हाल ही में चिली में वह ऐसे कार्यक्रम में नजर आए, जहां यूरोपीय संघ के अध्यक्ष होसे मानुएल बारोसो के साथ खड़े थे. वहां उन्होंने जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल से हाथ मिलाया और कुछ अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ निजी बैठकें कीं. पहले के क्यूबाई राष्ट्रपति के लिए ये बातें संभव नहीं थीं.

हालांकि 50 साल बाद भी लातिन अमेरिका के कई देश क्यूबा के साथ खड़े हैं, जिसे अमेरिका अलग थलग करना चाहता है. क्यूबा को तय वक्त से सीलैक का अध्यक्ष बनाया गया है. हालांकि इसका विरोध करने वालों का कहना है कि इस संस्था को ही गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं.

मियामी हेराल्ड के स्तंभकार आंद्रेयास ओपेनहाइमर का कहना है, "जब उनका आधार ही ऐसा है कि वे अपनी बुनियादी बातों का पालन नहीं कर पा रहे हैं."

अपने भाई फिडेल से उनकी तुलना लाजिमी है. हालांकि सत्ता संभालने के बाद राउल कास्त्रो ने बिलकुल अलग तरीके अपनाए हैं. फिर भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जहां उन्हें भाई से अलग नहीं किया जा सकता है.

एजेए/ओएसजे (एपी, डीपीए)

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