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दुनिया

काले जादू में फंसा पाकिस्तान

दिलरुबा का दिल जीतना हो या नौकरी में तरक्की पानी हो, इन बातों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान में कई बार लोग काले जादू और पीर फकीर की शरण में चले जाते हैं. और गोरखधंधा करने वाले लोग हर मर्ज का इलाज करने का दावा करते हैं.

पीर और आमिल इस सदियों पुरानी 'सिद्धि' में लगे हैं. इस्लाम के प्रतिष्ठित इदारे इन्हें गलत बताते हैं, फिर भी लोग अंधविश्वास में इनके चक्कर में पड़ जाते हैं. गाहे बगाहे किसी की मुराद यूं ही पूरी हो गई, तो वे समझते हैं कि यह काले जादू का असर है. फिर और लोग भी इनके शिकंजे में फंसते चले जाते हैं. कई अखबारों में बड़े बड़े इश्तिहार छपते हैं, "घर बैठे कोई भी काम कराने के लिए हम से संपर्क करें." इसमें काम की सूची भी हैः प्यार में नाकामी, बॉस से अच्छे रिश्ते, अच्छी जगह ट्रांसफर, विदेश यात्रा, शादी के न्योते और लॉटरी में जीत.

पचपन साल के पीर अली हुसैन शाह तो कहते हैं कि दुआओं का लगातार जाप भी कई मुश्किलों को दूर कर सकता है, "बीमारी, वित्तीय और पारिवारिक समस्याएं तो रात भर की दुआओं से ही ठीक हो सकती हैं." शाह का कहना है कि वह मानवता के लिए काम कर रहे हैं और लोगों की धर्मार्थ सेवा कर रहे हैं. हालांकि वे मानते हैं कि जिनकी मुराद पूरी हो जाती है, वे तोहफे भी लाते हैं, "जो लोग मेरे काम से खुश होते हैं और जिनकी समस्याएं दूर हो जाती हैं, वे मेरे पास आकर पैसे और दूसरी चीजें देते हैं. इन्हें मैं लंगर पर खर्च कर देता हूं."

Messer wird geschliffen in Pakistan

तरह तरह के हथकंडों का इस्तेमाल

ऐसी ही एक मुरीद ने उनके लिए रविवार के अखबार में कीमती इश्तिहार छपवा दिया. यह लड़की एक ब्रिटिश पाकिस्तानी से शादी करना चाहती थी. शाह का कहना है, "घर वाले नहीं चाहते थे कि उसकी शादी एक ब्रिटिश पाकिस्तानी से हो. उसने मुझसे संपर्क किया और मैंने दुआएं पढ़ीं और कहा कि सात दिन में उसकी शादी हो जाएगी. फिर ऐसा ही हुआ."

कैसे कैसे नुस्खे

शाह और उसके साथी सदियों पुरानी परंपराएं अपनाते हैं. कागजों पर अलग अलग कलमे लिख कर कागजों को अलग अलग तरीके से मोड़ देते हैं. फिर लोगों से कहा जाता है कि इनकी तावीज बना कर पहन लें. इसके अलावा "फूंका हुआ पानी" पीने को दिया जाता है.

लेकिन इन कलमों और दुआओं के साथ काले जादू का भी प्रयोग होता है. यह किसी का नुकसान पहुंचाने के लिए होता है. कई बार ओझा पीर लोगों से कहते हैं कि वे काले रंग की मुर्गी या बकरे की कुर्बानी करें, ताकि 'दुश्मन' का नुकसान हो. पाकिस्तान में पीर फकीरों के मजार पर जाना और वहां गरीबों को खैरात करना अच्छा माना जाता है.

रावलपिंडी में रहने वाली 45 साल की रजिया बीबी सैयद इजहार बुखारी के मजार पर नियमित रूप से जाती हैं. उनका मानना है कि इससे उनके परिवार की सेहत बनी रहेगी, "यह पक्के तौर पर काम करता है. मैं पिछले 25 साल से यहां आ रही हूं. इसकी वजह से मैं अपनी जिंदगी की कई मुश्किलों से बाहर निकल पाई हूं."

सही नहीं तरीका

लेकिन हर कोई इसे सही नहीं बताता. इस्लामाबाद की मशहूर लाल मस्जिद के मुफ्ती तहसीनुल्लाह का कहना है कि भले ही काले जादू का जिक्र किताबों में हो लेकिन इसका प्रयोग ठीक नहीं, "काले जादू का इस्तेमाल करना और इसका कारोबार करना शरीया के खिलाफ है. कई फर्जी लोगों ने काले जादू के नाम पर युवतियों के साथ गलत काम किया है."

Symbolbild Armut in Saudi-Arabien

फर्जी फकीरों के चक्कर में पड़ते लोग

सिर्फ गरीब और कम पढ़े लिखे ही नहीं, बल्कि पढ़े लिखे और संपन्न लोग भी इसके चक्कर में आ जाते हैं. पाकिस्तान की इकलौते ब्रूअरी के प्रमुख ने हाल ही में अखबार में एक बड़ा विज्ञापन दिया, जिसमें कहा गया कि किस तरह उसके बहनोई ने "काले जादू से" उनकी मां को उनके खिलाफ कर दिया.

आड़ में अपराध

इसकी आड़ में कई बार अपराध भी सामने आते हैं. साल 2011 में फर्जी पीर मुहम्मद सलीम को पकड़ा गया था, जो सैकड़ों महिलाओं को बच्चा पैदा होने का धोखा देकर अपने साथ सेक्स को मजबूर करता था. उसे पांच साल की कैद और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया. लेकिन सिर्फ एक महिला अपने आरोप पर कायम रही. वह भी 2013 में फिर गई, जिसके बाद सलीम को रिहा कर दिया गया.

ये लोग शर्तिया काम के वायदे करते हैं. लेकिन जिनका काम नहीं होता, वे क्या करें. इरफान अहमद 26 साल के हैं और टैक्सी चलाते हैं. उन्हें किसी से प्यार हो गया और उसे पाने के लिए उन्होंने जादू टोने का सहारा लिया, पर कामयाब न हो पाए, "मैं कई लोगों के पास गया और इस पर हजारों रुपये गंवा दिए कि मेरी शादी हो जाए. लेकिन उसने किसी और से शादी कर ली और मैं अभी भी कुंवारा हूं. मैं पुलिस के पास नहीं जा सकता क्योंकि इससे मुझे शर्म आती है. वैसे भी पुलिस इन मामलों में ज्यादा मदद नहीं करती."

एजेए/एमजी (एएफपी)

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