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दुनिया

कालाधन लाने की लड़ाई

कर चोरों के लिए स्वर्ग और बैंक गोपनीयता जल्द ही भूतकाल बन जाएंगे. पचास से ज्यादा देश इस दिशा में काम कर रहे हैं. जर्मनी की राजधानी बर्लिन में देशों के बीच वित्तीय जानकारी की साझेदारी पर बातचीत हो रही है.

दुनिया के अधिकतर देशों में कर चोरों पर फंदा कसता जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए ऐसी जगहें कम होती जा रही हैं जहां वो अपना कालाधन चुपचाप सुरक्षित रख सकें. 2016 से 50 देश नए खातों, ब्याज दरों, सूद आदि के बारे में डाटा इकट्ठा करेंगे और सितंबर 2017 से वह इस जानकारी का आदान प्रदान भी करेंगे.

इस बारे में आर्थिक सहयोग और विकास संस्था ओईसीडी के वैश्विक मानकों के आधार पर बुधवार को बर्लिन में एक संधि पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. यह जानकारी जर्मनी के वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता मार्टिन येगर ने दी है. ऑटोमैटिक साझेदारी के कारण कर विभाग को विदेशों से जानकारी पाने में आसानी होगी.

आने वाले समय में कर के बारे में जानकारी की साझेदारी में शुरुआती 50 देशों के अलावा भी देश शामिल होंगे. इस तरह की संधि और साझेदारी के लिए 65 देशों ने सहमति दर्ज की है. साथ ही स्विट्जलैंड, लिष्टेनश्टाइन, सिंगापुर और करेबियाई देशों के बैंक भी इसपर सहमत हैं. लैटिन अमेरिका के कुछ देशों के साथ यूरोपीय संघ के 28 सदस्य देश भी इसमें शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक एशियाई और अफ्रीकी देश भी इनमें शामिल हैं. अमेरिका दूसरे देशों से जानकारी तो लेता है लेकिन उसी स्तर की जानकारी वह अपने बारे में साझा नहीं करता. हालांकि वह कर चोरी और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए दूसरे देशों पर डाटा साझा करने का दबाव जरूर डालता है. सोमवार को जर्मनी के वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, "अमेरिका कर चोरों के लिए स्वर्ग नहीं है और होगा भी नहीं. लेकिन इस कांफ्रेस का साफ संदेश होगा कि कर चोरी से कोई फायदा नहीं है. इसके दिन फिर गए हैं. हम दुनिया के जुड़ने की गति से अपनी ताल मिलाए हुए हैं."

इस लेन देन के दौरान डाटा सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा. इससे देशों के खातों को कितना फायदा होगा इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया गया है. अभी पता नहीं है कि कितना पैसा लोगों ने विदेशों में जमा कर रखा है.

यूरोपीय संघ ने हाल ही में कर चोरी के खिलाफ और कदम उठाने की बात कही थी. सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों ने इस बारे में नए नियमों का खाका तैयार किया है जिसके तहत अनिवार्य रूप से अपने आप टैक्स कलेक्शन के बारे में सारी जानकारी साझा की जाएगी. ईयू देशों को 2017 से अपने निवेश पर मिलने वाले राजस्व के बारे में जानकारी देनी होगी. यह जानकारी देना अनिवार्य होगा और इसका मतलब होगा बैंक गोपनीयता का अंत.

ऑटोमैटिक वित्तीय लेन देन पर जानकारी की साझेदारी का खाका बनाने का फैसला 2013 में जी20 देशों ने किया था. ओईसीडी के वैश्विक मानकों के आधार पर ये नियम ऐसे बनाए गए हैं कि देश बैंक और वित्तीय संस्थानों की जानकारी पाएं और इसका लेनदेन भी करें.

कर के बारे में इस तरह की साझेदारी जर्मनी, यूरोपीय संघ के चार बड़े देशों और अमेरिका के बीच पहले से है. इसका आधार अमेरिकी कानून एफएटीसीए था. इससे विदेशों में रहने वाले उन अमेरिकियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है जिन्हें अमेरिका में कर भरना अनिवार्य है. इस अमेरिकी कानून की मदद से मार्च 2010 से अमेरिका कर चोरों पर नजर रख रहा है.

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