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विज्ञान

कार चलेगी आंख के इशारे से

कार चलाना कोई हंसी-ठठ्ठा नहीं है. जल्द ही हो जायेगा. यहां तक कि कार को घुमाने-फिराने तक के लिए हाथ नहीं लगाना पड़ेगा. बोलना भी नहीं पड़ेगा. कार चलेगी आंख के इशारे से.

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आँख के इशारे पर चलने वाली कार

कार चलाना आसान बनाने के लिए इस समय हर जगह होड़ चल रही है. उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणालियों ने सड़कों के नक्शे साथ रखना तो बेकार बना ही दिया है, अब कोशिश है कंप्यूटर नियंत्रित ऐसी ड्राइविंग प्रणालियां बनाने की कि कार को घुमाने-फिराने के लिए हाथ की भी ज़रूरत न पड़े.

जर्मनी में बर्लिन की फ्री यूनिवर्सिटी की एक टीम ने ऐसी ही भावी कार के कंप्यूटर के लिए एक ऐसा सॉफ्टवेर तैयार किया है, जो आंख की पुतलियों को देखते हुए कार को उसी दिशा में मोड़ता-चलाता है, जहां आप देख रहे होते हैं.

गत 23 अप्रैल को बर्लिन के एक पुराने हवाई अड्डे पर पत्रकारों के सामने आइड्राइविंग (EyeDriving) नाम की इस प्रणाली का प्रदर्शन किया गया. परियोजना प्रमुख प्रोफ़ेसर राउल रोख़ासः "कार में एक वीडियो कैमरा है जो कार चालक की आंखों को देख रहा होता है. चालक दाहिने देख रहा है या बांयें, आंख की पुतलियों की हरकतों को पढ़ रहा कंप्यूटर इसे जान जाता है."

कैमरे और कंप्यूटर चलायेंगे कार

प्रो. डॉ. रोख़ास मूल रूप से मेक्सिको के हैं, पर अब बर्लिन की फ्री यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं: "कंप्यूटर, कार की इलेक्ट्रानिक प्रणाली से जुड़ा होता है और उसी के माध्यम से कार की स्टीयरिंग को आंखों की हरकतों के

Deutschland Forschung Berliner Informatiker testen Roboterauto

इसी मिनी वैन में सॉफ्टवेयर को आजमाया जा रहा है

अनुसार नियंत्रित करता है. यदि आप सड़क पर हैं और सीधे सामने की ओर जाना चाहते हैं, तो सीधे सामने की ओर देखिये, कार चल पड़ेगी. यदि आप दाहिने मुड़ना चाहते हैं, तो दहिनी ओर देखें, कार दाहिनी ओर मुड़ जायेगी. तो, इस तरह सड़क पर अपनी नज़र की दिशा के द्वारा आप कार को पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं."

दो तरीके

यदि आप को डर है कि आपकी आंखें बहुत चंचल हैं, बहुत चकर-मकर करती हैं, तो कोई बात नहीं: "चलाने के दो तरीके हैं-- एक तरीका तो यह है कि कार पूरी तरह चालक के नियंत्रण में है, यानी वह कार को पूरी तरह अपनी आंख के इशारों से चला रहा है. दूसरा है सेमी-आटोमैटिक तरीका. यानी कार में लगे सेंसर और कंप्यूटर जानते हैं कि कार ठीक इस समय कहां है. कार में सैटेलाइट वाला जीपएस नेविगेशन सिस्टम है, लेज़र स्कैनर हैं और कई दूसरे वीडियो कैमरे भी हैं. उनकी मदद से कार जानती है कि वह कहां है, किस जगह है. कार जब सीधी सड़क पर चल रही हो तो आपको कुछ नहीं करना होता. केवल नुक्कड़ या चौराहे पर आप को अपनी आंख से सामने लगे वीडियो कैमरे को इशारा करना होगा कि आप कहां जाना चाहते हैं."

नज़र फिसली, तो कोई बात नहीं

लेकिन, यह भी तो हो सकता है कि किसी बात से आप का ध्यान बंट गया, आप किसी और दिशा में देखने लगें. तब? प्रो. रोख़ास कहते हैं, "कोई दुर्घटना नहीं होगी. कुछ लोगों ने कहा, आपकी नज़रें यदि किसी सुंदरी की तरफ फिसल गयीं, तब? तब भी नहीं. कार यदि सेमी ऑटोमैटिक दशा में है, तो वह यह भी जानती है कि सड़क यातायात के नियम-क़ानून क्या हैं, सड़क की सीमा कहां है. वह आप को सड़क की सीमा पार नहीं करने देगी, नियम भंग नहीं करने देगी, इसलिए कोई दुर्घटना भी नहीं होगी. बर्लिन के प्रदर्शन के समय हमने दिखाया कि यदि कोई आदमी कार के सामने आ जाये, तो उसके सेंसर तुरंत जान जाते हैं कि रास्ते में कोई बाधा आगयी है और वे कार को तुरंत रोक देते हैं."

चौतरफ़ा नज़र

Flughafen Tempelhof Schliessung

बर्लिन का अब बंद हो चुका टेंपलहोफ हवाई अड्डा. यहीं आंख से चलने वाली कार का परीक्षण हो रहा है.

आंखों के इशारों पर कार चलाने वाला यह सॉफ्टवेयर फ़िलहाल अधिकतम 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति के लिए बना है. जर्मनी के शहरों और बस्तियों में यही गतिसीमा है. पर, बाद में उसे एक्सप्रेस हाईवे के लायक भी बनाया जायेगा. साफ़्टवेयर बनाने का काम 2007 में शुरू हुआ था. उसे कई बार आजमाय जा चुका है. प्रो. रोख़ास ने बताया कि अभी तक कोई दुर्घटना नहीं हुई हैः "दुर्घटना रोकने लिए कार में लेजर किरण वाले ऐसे स्कैनर लगे हैं, जो लेज़र किरणें छोड़ते रहते हैं. यदि वे किसी चीज़ से टकराती हैं, तो उन के लौट कर वापस आने में लगे समय के आधार पर हम जान सकते हैं कि वह चीज़ कार से कितनी दूर है. इस तरह कार चालने के दौरान 70 मीटर के दायरे में हर चीज़ का पता रहता है, चाहे वह कोई आदमी हो, कोई पेड़ हो या कोई मकान हो. आदमी तो केवल सामने ही देखता है, लेकिन हमारी प्रणाली हर समय 360 डिग्री यानी चारो तरफ़ देख रही होती है."

कार के वीडियो कैमरे सड़क पर बने निशानों, लेन दिखाने वाली पट्टियों, आगे-पीछे और बगल में चल रहे वाहनों तथा ट्रैफ़िक सिग्नल की बत्तियों पर भी सारा समय नज़र रखे रहते हैं. चालक यदि थका-मांदा और सुस्त हो, दुर्घटना का डर हो, तो ज़रूरत पड़ने पर वे कार रोकने के ब्रेक को भी सक्रिय कर देते हैं.

रिपोर्ट- राम यादव

संपादन- महेश झा

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