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विज्ञान

कार खुद ढूंढ लेगी पार्किंग

कुछ समय पहले तक यह किसी कॉमिक बुक या किसी फिल्म की काल्पनिक कहानी जैसी बात लगती थी. लेकिन आधुनिक समय में तैयार हो रही रोबोट कार खुद अपने लिए उम्दा सी पार्किंग की जगह तलाश लिया करेगी.

तब जबकि कार में कोई नहीं बैठा हो, यह खास तरह की कार अपने आप ही बहुत धीमी गति में संभल कर आगे बढ़ते हुए अपने लिए पार्किंग की जगह तलाश लेगी. यही नहीं, आसपास से गुजर रहे लोगों को भी इससे दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि रोबोट कार इस बात का भी ख्याल रख सकती है कि कब और कितने फासले पर कोई गुजर रहा है और उसे रास्ता देना चाहिए.

इस तकनीक को स्वीडन की कार निर्माता कंपनी वालेओ ने तैयार किया है. फिलहाल कार पर टेस्ट जारी हैं लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले छह साल में यह कार बाजार में होगी. बाजार में कुछ ऑटोमेटिक कारें पहले से ही मौजूद हैं जो खास तरह की परिस्थितियों में खुद ही चल सकती हैं.

जैसे मर्सिडीज की सीएलएस कूप दुर्घटना की स्थिति में ड्राइवर के नियंत्रण खो देने पर खुद ही ब्रेक लगा लेती है. बीएमडब्ल्यू के कुछ मॉडल भी ड्राइवर को पहले से चेतावनी दे देते हैं कि ट्रैफिक जाम की स्थिति में वे ऑटोमैटिक पायलट मोड में जा सकते हैं.

कारों के स्पेयर पार्ट्स की कंपनी वालेओ के आरएंडडी विभाग के निदेशक गियोम देवोशेले भी मानते हैं कि इस तरह की काफी सारी तकनीक तो पहले से ही बाजार में मौजूद है. लेकिन साथ ही वह कहते हैं, "हम इस समय टर्निंग प्वाइंट पर हैं."

ढेरों फायदे

रडार और डिटेक्शन कैमरा तकनीक में तेजी से हो रही प्रगति से अब कारों को यह पता चल जाता है कि उनके आसपास क्या हो रहा है. उनमें फिट कंप्यूटर परिस्थिति को समझने और प्रतिक्रिया करने में उनकी मदद करता है. पार्ट्स बनाने वाली कंपनी बॉश के मार्केटिंग डायरेक्टर फ्रांक काजेनावे मानते हैं कि कारों में तकनीक के इस विकास से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, "क्योंकि 90 फीसदी दुर्घटनाएं इंसानी गलती के कारण होती हैं."

इस तकनीक के और भी फायदे हैं. जरा सोचिए अगर कारें खुद ही एक दूसरे की भाषा समझने लगें और कंपंयूटर सड़कों को समझने लगें तो ट्रैफिक की समस्या में कमी आएगी. साथ ही ईंधन की भी बचत होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक ऐसा हो जाएगा कि चौबीसों घंटे सड़कों पर आपकी सेवा में ऐसी कारें हाजिर होंगी. सुरक्षा के अलावा कार चलाने वालों के लिए भी यह राहत की घड़ी होगी. बैंठेंगे कार में लेकिन हाथ खाली और दिमाग भी.. तो किताब पढ़ने से, लैपटॉप चलाने तक कुछ भी किया जा सकता है...

एसएफ/एएम (एएफपी)

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