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दुनिया

काम नहीं तो तनख्वाह भी नहीं

संसद का पटल प्रस्तावों, बहसों और कानून निर्माण की जगह है. मगर कई बार कानूननिर्माताओं का यही सदन टूटे माइक्रोफोन, टूटी मेजों और टूटी हड्डियों तक का गवाह बनता है. देखिए भारत के सांसदों पर जनता का कितना धन खर्च होता है.

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