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विज्ञान

काम के दबाव से मानसिक बीमारियां

अगर आप काम से जुड़ी कॉल्स और ईमेल के जवाब देने के लिए हर समय तैयार हैं, थोड़ी थोड़ी देर में इनबॉक्स चेक करते रहते हैं, तो आप बड़ी समस्या की तरफ बढ़ रह रहे हैं.

यह समस्या है मानसिक तनाव, यह जब तक बड़ी परेशानी बनकर सामने नहीं आता, तब तक आम तौर पर लोग इसे दरकिनार करते रहते हैं. बहुत समय तक हम अपनी थकावट महसूस होने और इच्छा शक्ति में कमी जैसी मानसिक समस्याओं की चर्चा करने से भागते रहे. यह समस्या हमारे बीच होते हुए भी गुप्त रहा करती थी, लोग मानसिक स्थिति के बारे में बात करना बुरा समझते थे. लेकिन आज समय बदल चुका है.

मानसिक स्वास्थ्य हमारे पेशे में सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. जर्मन शहर ड्रेसडेन में जर्मन सोशल एक्सीडेंट इंश्योरेंस के लिए काम करने वाली मनोचिकित्सक हिल्ट्राउट पारिडोन मानती हैं कि अभी मानसिक तनाव पर बहुत लंबी चौड़ी रिसर्च बाकी है. शिफ्टों में काम करना या रोज के रोज काम निपटा लेना इसका इलाज नहीं.

तनाव के कारण

तनाव बढ़ाने में बहुत बड़ा हाथ मोबाइल फोन का भी है. इसके जरिए काम से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज आप भेज और मंगवा सकते हैं. इनके कारण भी चौबीसो घंटे काम करने या काम के बारे में सोचते रहने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. कुछ दफ्तरों में तो खुद मालिक कर्मचारियों से इसकी उम्मीद भी करते हैं.

आप कब काम पर हैं और कौन सा आपका खाली टाइम है, इन दोनों के बीच की लकीर धुंधली पड़ गई है. अपने आप को आराम देना और शरीर की बैटरी को दोबारा चार्ज करना मुश्किल होता जा रहा है. पारिडोन के मुताबिक काम पूरा करने की समय सीमा और रोजाना दबाव आधे से ज्यादा कर्मचारियों को प्रभावित कर रहा है. वह बताती हैं कि 60 फीसदी कर्मचारी एक साथ कई कार्यों में व्यस्त होते हैं.

कर्मचारियों से धीरे धीरे इस बात की उम्मीद बढ़ती जा रही है कि वे तरह तरह के काम कर सकें और उन्हें एक साथ संभालने में सक्षम हों. काम के घंटों में बार बार बाधा पड़ने से भी आपके स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ सकता है. बार बार काम करने के समय का बदलना भी कई लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने की वजह है. पारिडोन ने कहा, "ज्यादा घंटों तक काम करने, देर शाम और सप्ताहांत पर भी काम करने से व्यापार प्रभावित होता है." जिस तरह तकनीक 24 घंटे जागती रहती है उसी तरह हम भी चौबीसों घंटे मुहैया रहने के आदी होते जा रहे हैं.

स्वास्थ्य पर असर

पारिडोन के मुताबिक काफी हद तक यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप अपने काम को कैसे लेते हैं. वे जो काम को बोझ की तरह लेते हैं उन्हें तनाव और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने की ज्यादा संभावना होती है. वह बताती है, "इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं जैसे दिल से संबंधित या मानसिक बीमारियां. इससे दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं या इच्छा शक्ति भी घट सकती है या शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता भी प्रभावित हो सकती है."

2013 में प्रकाशित मनोचिकित्सकों के केन्द्रीय सदन की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी के करीब 75 हजार कर्मचारियों ने मानसिक समस्याओं के कारण समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक तनाव की वजह से कर्मचारी साल में औसतन 11 दिन की छुट्टी भी करते हैं.

रिपोर्ट: गुडरुन हाइस/ एसएफ

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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