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विज्ञान

काम के तनाव से नशे की लत

नियमित तनाव, लगातार दबाव और नौकरी की चिंता, काम की दुनिया इतनी मुश्किल होती जा रही है कि उसका सामना करने के लिए जर्मनी में बहुत से लोग बोतलों या दूसरे ड्रगों का सहारा लेने लगे हैं.

मेडिकल बीमा कंपनियों का कहना है कि कर्मचारियों में अलकोहल की लत बढ़ रही है. बहुत से लोग बढ़ते तनाव का सामना करने के लिए ड्रगों का इस्तेमाल भी करने लगे हैं. जर्मनी की एक मेडिकल बीमा कंपनी एओके ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि नौकरी की जगहों पर ताकत बढ़ाने वाले एम्फेटेमिन जैसे तत्वों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

बीमा कंपनी ने बीमारी की वजह से ली जाने वाली छुट्टियों पर अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि अलकोहल, सिगरेट या दवाइओं के नशे के कारण काम से छुट्टी लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. एओके का कहना है कि ड्रग के सेवन से काम करने में अक्षम दिनों की संख्या पिछले 10 साल में 17 प्रतिशत बढ़ गई है. 2002 में ड्रग सेवन की वजह से नौकरीशुदा लोगों ने 20 लाख 70 हजार दिन छुट्टी ली थी, 2012 में यह बढ़कर 24 लाख 20 हजार दिन हो गया है. बीमा कंपनी टेक्निकर क्रांकेनकासे के अनुसार पिछले साल उसके बीमाधारकों ने अलकोहल के कारण 2,36,000 दिन छुट्टियां लीं.

बीमा कंपनी के शोध संस्थान के अनुसार इसकी मुख्य वजह अलकोहल और सिगरेट का सेवन है. नशे की वजह से छुट्टी के 44 फीसदी मामले अलकोहल की वजह से होते हैं. डॉक्टरों ने टेक्निकर क्रांकेनकासे के 5000 बीमाधारकों को अलकोहल के जरिए मानसिक और बर्ताव संबंधी बीमारी का प्रेस्क्रिप्शन लिखा. बारमर स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अलकोहल की समस्या वाले कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों से चारगुना ज्यादा काम पर नहीं जाते हैं. यहां मनोवैज्ञानिक बीमारियों के अलावा चोट और पेट की समस्या भी होती है.

एओके के निदेशक ऊवे डेह कहते हैं, "नशा संबंधित लोगों के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, उसका अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर होता है." डेह के अनुसार अलकोहल और सिगरेट की लत के कारण जर्मन अर्थव्यवस्था को हर साल करीब 60 अरब यूरो का नुकसान होता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का भी सेवन करने लगे हैं. काम की जगह डोपिंग वाले एक सर्वे के अनुसार 5 फीसदी नौकरीशुदा लोगों ने तनाव और काम के दबाव का सामना करने के लिए पिछले 12 महीने में एम्फेटेमिन जैसी दवाएं लेने की बात मानी है. ऊवे डेह के अनुसार असली संख्या और ज्यादा होने की आशंका है. विभिन्न अध्ययनों ने दिखाया है कि लोग काम के दबाव से निबटने के लिए शक्तिवर्धक दवाएं लेने के लिए तैयार हैं.

बहुत से दफ्तरों में नशेबाजी को रोकने के लिए कार्यक्रम और प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं. इस साल नवंबर में नशा और काम विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. जर्मनी के प्रसिद्ध रोबर्ट कॉख इंस्टीट्यूट ने 2009 और 2010 के बीच 22,000 वयस्क लोगों के बीच सर्वे कराया जिसके अनुसार जर्मनी में हर पांचवें मर्द और हर दसवीं महिला ने महीने में एक बार खूब पीने की बात मानी है. युवा मर्दों में हर दूसरा और महिलाओं में एक तिहाई खतरनाक रूप से ज्यादा पीते हैं.

एमजे/एजेए (डीपीए, एएफपी)

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