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खेल

'काबिल ए तारीफ है विद्रोह'

सोमदेव देववर्मन ने भारतीय टेनिस खिलाड़ियों के डेविस कप न खेलने के फैसले का बांहे फैलाकर स्वागत किया है. सोमदेव के मुताबिक खिलाड़ियों ने स्वार्थ से ऊपर उठकर अखिल भारतीय टेनिस संघ के खिलाफ आवाज उठाई है.

उभरते टेनिस स्टार सोमदेव देवबर्मन ने खिलाड़ियों के विद्रोह को भारतीय खेलों के लिहाज से एक अद्भुत वाकया बताया है. अखिल भारतीय टेनिस संघ के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत करने वाले सोमदेव देवबर्मन ने कहा, अगर आप युवा खिलाड़ियों को भी देखें तो वे भी स्वार्थ से हटकर, कई सुविधाओं को जोखिम में डालकर इस पहल से जुड़े हैं.

टेनिस संघ ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ डेविस कप के लिए 11 खिलाड़ियों को चुना था. इनमें रोहन बोपन्ना, महेश भूपति और सोमदेव शामिल थे. इन सभी खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट खेलने से इनकार कर दिया. इनकी मांग है कि पहले टेनिस संघ खेल और खिलाड़ियों के लिए बढ़िया माहौल बनाए.

सोमदेव से जब यह पूछा गया कि क्या खिलाड़ियों के इस फैसले से भारतीय टेनिस की छवि खराब हुई है, तो उन्होंने कहा, "मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं. अगर आप पुराने समय को भी देखें तो महेश ने भारत का प्रतिनिधित्व 15 साल तक किया है और मैं भी बीते कुछ सालों से ऐसा कर रहा हूं. यह पहला मौका है जब भारतीय टेनिस के खिलाड़ी एक साथ आए, ऐसे कारणों के लिए, जिनमें उनका विश्वास है."

सोमदेव फिलहाल ऑस्ट्रेलियन ओपन खेलने के लिए मेलबर्न पहुंचे हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई से बतचीत करते हुए उन्होंने कहा, "टेनिस एक व्यक्तिगत खेल है और इसमें सभी खिलाड़ियों को साथ लाना इतना आसान नहीं है. लेकिन सबके सामने एक साफ समस्या है, इसीलिए सारे खिलाड़ी साथ आए हैं. अगर आप इस तरह से इसे देखें तो भारतीय टेनिस में यह एक बड़ा कदम है."

सोमदेव ने टेनिस संघ पर दादागिरी का आरोप भी लगाया. उनके मुताबिक अगर खिलाड़ी संघ के शीर्ष अधिकारियों का विरोध करते थे तो उन्हें वाइल्ड कार्ड, पैसे और अन्य सुविधाओं से दूर कर दिया जाता था. लेकिन अब खिलाड़ी चाहते हैं कि चीजें बदलें.

27 साल के सोमदेव को उम्मीद है कि विद्रोह रंग जरूर लाएगा, "उनके बलिदान से भविष्य की पीढ़ियों को फायदा होगा. खेल और भारत का टेनिस आगे जाएंगे."

ओएसजे/आईबी (पीटीआई)

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