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दुनिया

कहां से आता है आईसिस को पैसा

इराकी शहर मोसुल पर कब्जे के बाद से जिहादी संगठन आईएसआईएस का नाम हर जुबां पर है. उसे दुनिया का सबसे धनी आतंकी संगठन कहा जा रहा है. आखिर ये पैसा आया कहां से?

आईएसआईएस (आईसिस) के नाम में ही उसका मकसद छुपा है. उसका नाम है इराक और सीरिया में इस्लामी राज्य. मोसुल पर कब्जे के साथ उसे वहां के केंद्रीय बैंक में जमा 500 अरब दीनार मिल गए, जो 42 करोड़ डॉलर के बराबर है. इसे मिलाकर अब इस गुट के पास जिहाद के लिए करीब 2 अरब डॉलर हैं. ये धन कहां से आ रहा है, इस पर विवाद है.

इराक की शिया सरकार का आरोप है कि सउदी अरब आईएसआईएस को मदद दे रहा है. प्रधानमंत्री नूरी अल मालिकी ने इसी हफ्ते कहा है, "हम आईएसआईएस को मिली वित्तीय और नैतिक मदद के लिए सउदी अरब को जिम्मेदार ठहराते हैं." सउदी अरब का साथी अमेरिका नूरी अल मालिकी के आरोपों का खंडन करता है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने इस बयान को "गलत और अपमानजनक" बताया है.

खाड़ी देशों का पैसा

ब्रूकिंग्स दोहा सेंटर के चार्ल्स लिस्टर अल मालिकी के आरोपों से इत्तेफाक नहीं रखते. वे कहते हैं, "सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कोई सबूत नहीं है कि किसी देश की सरकार आईएसआईएस के बनने और संगठन के रूप में उसे पैसा देने में शामिल है." इसके विपरीत जर्मनी के माइंस यूनिवर्सिटी में अरब रिसर्च सेंटर के गुंटर मायर को आईएसआईएस को मिल रहे धन के बारे में कोई संदेह नहीं है. "अब तक का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत खाड़ी देशों से आ रहा पैसा था, खासकर सउदी अरब से, लेकिन कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से भी."

मायर का कहना है कि खाड़ी के सुन्नी देशों का मकसद सीरिया में बशर अल असद की सरकार के खिलाफ आईएसआईएस की लड़ाई था. सीरिया की तीन चौथाई आबादी सुन्नी है, लेकिन देश का शासन अल्पसंख्यक शिया संप्रदाय की शाखा अलावी समुदाय के हाथों है. इस बीच सउदी अरब की सरकार को खतरों का पता है. आईएसआईएस के साथ लड़ रहा सबसे बड़ा जत्था सउदी लोगों का है. मायर का कहना है कि सरकार को पता है कि जब वे वापस लौटेंगे तो उनका निशाना सउदी सरकार होगी. लेकिन आईएसआईएस को सउदी अरब के धनी लोगों से पैसा लगातार जा रहा है.

फिरौती का पैसा

गुंटर मायर के अनुसार आईएसआईएस को मिल रहे धन का दूसरा स्रोत उत्तरी सीरिया के तेल भंडारों से आने वाला पैसा है. "आईएसआईएस समझ गया है कि इस स्रोत को अपने नियंत्रण में रखना होगा. उसके बाद तेल ट्रकों में भरकर तुर्की ले जाया जाता है. यह सबसे अहम स्रोत है." चार्ल्स लिस्टर के अनुसार आईएसआईएस बहुत हद तक खुद धन की व्यवस्था करने की हालत में है. "वह समाज के अंदर नेटवर्क बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि आमदनी का नियमित जरिया मिल सके."

इसका एक उदाहरण हाल ही में जीते गए शहर मोसुल में व्यवस्थित ब्लैकमेलिंग है. "इससे छोटे कारोबारी, बड़े उद्यम और कंस्ट्रक्शन कंपनियां और यदि अफवाहें सच हैं तो सरकारी अधिकारी भी प्रभावित हैं." इसके अलावा अनुमान है कि सीरिया के रक्का जैसे जिन इलाकों पर उसका पूरी तरह कब्जा है वहां वे कर भी वसूल रहे हैं. माइंस के गुंटर मायर इस खबर में कोई सच्चाई नहीं देखते कि पूर्व तानाशाह के करीबी सहयोगियों से आईएसआईएस को धन मिल रहा है. दोनों के मकसद पूरी तरह अलग हैं. हालांकि दोनों ही बगदाद में शिया सरकार को गिराना चाहते हैं, लेकिन बाथ पार्टी लोकतंत्र की समर्थक है जबकि आईएसआईएस शरीया आधारित शासन स्थापित करना चाहता है.

जिहाद के लिए धन

धन के मामले में आईएसआईएस की सबसे बड़ी कामयाबी मोसुल के केंद्रीय बैंक पर कब्जा थी, जिसमें उसे 43 करोड़ डॉलर मिले. मायर का कहना है कि मोसुल तथा कब्जा किए गए दूसरे शहरों के बैंकों को भी लूटा गया. ब्रिटेन के सीरियाई मूल के ब्लॉगर इलियट हिगिंस का कहना है कि इस धन के साथ आईएसआईएस ढेर सारा जिहाद खरीद सकता है. "43 करोड़ डॉलर में वह 60,000 लड़ाकों को एक साल तक हर महीने 600 डॉलर दे सकता है."

एक अनुमान के अनुसार इस समय आईएसआईएस के पास 10,000 लड़ाके हैं, लेकिन वह अपना धन कैसे खर्च करता है, इसके बारे में ज्यादा पता नहीं है. चार्ल्स लिस्टर के अनुसार, "माना जाता है कि कम से कम विदेशी लड़ाकों को पैसे दिए जाते हैं, हो सकता है कि सारी टुकड़ी को वेतन मिलता हो." अपने नियंत्रण वाले इलाके में यह संगठन ब्रेड, इंधन, पानी की सबसिडी देता है और सरकारी सेवाओं पर भी खर्च करता है. मायर का कहना है कि वह सैनिक साजो सामान पर भी खर्च कर रहा है. मोसुल पर कब्जे के दौरान उसे बहुत सारा अमेरिकी हथियार भी मिला है.

रिपोर्ट: आंद्रेयास बेकर/एमजे

संपादन: ईशा भाटिया

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