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मंथन

कहां से आई जेलीफिश?

जेलीफिश प्राकृतिक रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला जीव है. लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि ये भूमध्यसागर का सफर तय कर ट्यूनीशिया पहुंच गयी.

वीडियो देखें 00:30

मंथन 140 में खास..

माना जाता है कि 2012 में ये किसी जहाज में सवार हो कर यहां तक पहुंचीं. अब इन जेलीफिश ने ना केवल ट्यूनीशिया को अपना नया बसेरा बना लिया है, बल्कि यहां इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगी है और वैज्ञानिकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है. अब वे इस बात का पता लगा रहे हैं कि कहीं ये जेलीफिश यहां के अन्य जीवों के लिए खतरा तो नहीं बन जाएंगी. मंथन में जानिए कि इस बारे में क्या किया जा रहा है.

जर्मनी का गार्डन शो

वीडियो गेम के शौकीन हर कुछ वक्त बाद अपना कंप्यूटर बदलते रहते हैं ताकि नई तकनीक के साथ साथ बेहतर ग्राफिक्स और बेहतरीन स्पीड का लुत्फ उठा सकें. लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें आज भी पुराने जमाने की पैकमैन और रोड रनर जैसी वीडियो गेम खेलने में ही मजा आता है. इन्हें लुभाने के लिए अब गेम निर्माता नई गेम्स को भी पुराने अंदाज में पेश कर रहे हैं. ले चलेंगे आपको बर्लिन के गेम्स वीक में जहां पुरानी लुक में नई वीडियो गेम्स का मजा लिया जा सकता है.

और इसके बाद चलेंगे बर्लिन से कुछ नब्बे किलोमीटर दूर चल रहे नेशनल गार्डन शो में. जर्मनी में हर दो साल में एक बार नेशनल गार्डन शो आयोजित किया जाता है. हर बार किसी एक शहर को इसके लिए चुना जाता है. इस साल की खासियत यह है कि शो के लिए एक पूरे इलाके के कई पांच छोटे छोटे शहरों को चुना गया है. अक्टूबर तक लोग हाफल इलाके में फैले इस नेशनल गार्डन शो के जरिए दस लाख रंग बिरंगे फूलों का नजारा देख सकते हैं.

लग्ज़री क्या है?

कार्बन डाय ऑक्साइड एक ऐसी गैस है जिसका उत्सर्जन पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है. लेकिन इसी कार्बन डाय ऑक्साइड को अगर ईंधन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो यह फायदे का सौदा हो सकता है. जर्मन शहर ड्रेसडेन में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसा किया जा रहा है. कार निर्माता कंपनी ऑडी ने भी इसमें निवेश किया है.

ऑडी, बीएमडब्ल्यू और पोर्शे की कारों को लग्जरी से जोड़ कर देखा जाता है. सवाल यह उठता है कि आखिर लग्जरी है क्या? किसी अरबपति के लिए एक प्राइवेट जेट रखना आम बात होगी, लेकिन वही प्राइवेट जेट किसी आम इंसान के लिए लग्जरी है. किसी के लिए एक पुराना स्कूटर खटारा हो सकता है, तो जिसकी जेब में पैसे नहीं हैं, उसके लिए वही लग्जरी है. आजादी, खुल कर अपनी बात कहना भी लग्जरी हो सकता है. लग्जरी क्या है, यह जानने के लिए हम पहुंचे इंग्लैंड की साउथहैम्पटन यूनिवर्सिटी में, जहां जॉनेथन फायर्स इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं.

इन सारी दिलचस्प जानकारी के लिए देखना ना भूलें मंथन शनिवार सुबह 11 बजे डीडी नेशनल पर.

आईबी/

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