कसाब को नजरअंदाज करता पाकिस्तान | दुनिया | DW | 21.11.2012
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

कसाब को नजरअंदाज करता पाकिस्तान

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कसाब को फांसी पर लटकाने के फैसले पर नपी तुली प्रतिक्रिया दी है. वहीं पाकिस्तानी तालिबान फांसी से चौंका तो है लेकिन भारत के कानून को पाकिस्तान से बेहतर बताया.

पाकिस्तानी तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद अफरीदी ने कसाब को याद करते हुए कहा, "उसने जो किया, ठीक किया. हमें उसे खोने का शोक है लेकिन खुशी भी है कि उसे शहादत मिली."

लेकिन इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि तहरीक ए तालिबान ने भारतीय कानून और न्याय व्यवस्था को पाकिस्तान से बेहतर बताया. समाचार एजेंसी डीपीए से बातचीत में अफरीदी ने कहा, "कुछ भी कहिये उस देश में एक और बात भी है, हमने वहां कानून का पालन होते हुए देखा. लेकिन पाकिस्तान में, हमारे लोगों गिरफ्तार किया जाता है, बिना सुनवाई के या तो उन्हें मार दिया जाता है या फिर उनका पता ही नहीं चलता."

कसाब को ट्रेनिंग देने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा ने उसे हीरो बताया. लश्कर ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह कसाब की मौत का बदला लेगा. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लश्कर के कमांडर के हवाले से रिपोर्ट दी है, "वह हीरो था और इस रास्ते के लिए वह अन्य लड़ाकों को भी प्रेरित करेगा."

पाकिस्तान सरकार ने कसाब की फांसी को बहुत ज्यादा अहमियत देने की कोशिश नहीं की. सरकारी टेलीविजन पीटीवी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मुअज्जम अहमद खान ने कहा, "हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग करते रहेंगे."

भारत ने कसाब को फांसी देने के बाद बयान दिया था कि इस मामले में पाकिस्तान सरकार से संपर्क किया गया और उन्हें चिट्ठी भी लिखी गई लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया. पर पाकिस्तान का कहना है कि उन्हें चिट्ठी मिली थी और इसकी पावती है. मुअज्ज्म खां से जब पूछा गया कि भारत में ऐसी रिपोर्टें हैं, तो उन्होंने कहा कि "ये बेबुनियाद और गलत" रिपोर्टें हैं.

भारत के उप उच्चायुक्त ने मंगलवार शाम को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया मामलों के डायरेक्टर जनरल से मुलाकात की. उन्होंने "इस नोट को लिया और इसकी पावती भी दी."

कसाब पाकिस्तानी पंजाब के फरीदकोट इलाके का रहने वाला है. फरीदकोट के एक अधिकारी मुहम्मद अली ने कहा, "कसाब के परिवार वालों ने तो सारे हक तब ही छोड़ दिये थे जब कसाब की पहचान हुई."

मानवाधिकार कार्यकर्ता बीना सरवर ने कहा, "हत्यारे कसाब को फांसी दिए जाने पर बहुत लोग खुश होंगे. आशा है कि पीड़ित परिवारों के दुख का अंत होगा. लेकिन मुंबई कांड के असल साजिशकर्ता व युवाओं में नरसंहार का जहर भरने वाले और उन्हें ट्रेनिंग देने वाले आजाद घूम रहे हैं."

पाकिस्तान में अब दूसरा मामला मुख्यधारा में लौट रहा है. पाकिस्तान सरकार पर अब भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह को फांसी देने का दबाव बढ़ सकता है. पाकिस्तान में सोशल मीडिया में यह बात शुरू हो चुकी है कि अगर आतंक फैलाने के लिए भारत पाकिस्तानी नागरिक कसाब को फांसी दे सकता है तो इस्लामाबाद को भी भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिए.

1991 में पाकिस्तान की सैनिक अदालत ने सरबजीत सिंह को लाहौर और फैसलाबाद के सीरियल धमाके (1990) का दोषी करार दिया. हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा. पाकिस्तान उसकी पहचान मंजीत सिंह के नाम से करता है, जबकि भारत में उसके रिश्तेदार उसे सरबजीत बताते हैं और उनका कहना है कि वह किसान था जो शराब के नशे में पाकिस्तानी सीमा में घुसा और तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

ओएसजे/एजेए (डीपीए, रॉयटर्स)

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री