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जर्मन चुनाव

कसाब की फांसी पर फैसला 7 फरवरी को

तीन महीने तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुंबई हाई कोर्ट ने अजमल आमिर कसाब की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है. कसाब ने फांसी की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की है.

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कसाब की किस्मत का फैसला

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में दोषी पाए गए अजमल आमिर कसाब को विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. इस फैसले के खिलाफ कसाब हाई कोर्ट में मुकदमा लड़ रहा है. इस मामले पर सुनवाई सोमवार को खत्म हो गई. अब जज 7 फरवरी को अपना फैसला सुनाएंगे.

इसके साथ ही जस्टिस रंजना देसाई और जस्टिस आरवी मोरे की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रखा जिसमें फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद की रिहाई को चुनौती दी गई थी. दोनों पर जांच अधिकारियों ने आतंकवादियों की मदद के आरोप लगाए थे लेकिन निचली अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया था.

कैसे हुई सुनवाई

हाई कोर्ट बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर 49 में इस मुकदमे की सुनवाई पिछले साल 18 अक्तूबर से चल रही है. इस कमरे को किले में तब्दील किया गया है. यहां हर रोज खोजी कुत्ते तलाशी लेते हैं उसके बाद ही कार्रवाई शुरू होती है. सुनवाई में आने वाले पत्रकारों और वकीलों को विशेष पहचान पत्र दिए गए हैं.

इस मुकदमे की सुनवाई के लिए पहली बार अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा मुहैया कराई गई है. कोर्ट रूम में लगे कैमरों के जरिए अदालत ने कसाब की गवाही जेल से ही सुनी. शुरुआती कुछ दिनों में तो कसाब

Indien Terroranschläge Mumbai Bombay Terror Gedenken 26/11 Flash-Galerie

मुंबई हमलों के दो साल

पर्दे पर नजर भी आया. सुनवाई के दूसरे ही दिन उसने जेल के गार्डों के साथ झगड़ा किया और कैमरे पर थूक दिया. उसने कोर्ट से कहा कि उसे अमेरिका भेज दिया जाए. उसके इस व्यवहार पर कोर्ट ने उसे चेतावनी दी थी.

सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कसाब को दी गई मौत की सजा को जायज ठहराने के लिए कहा कि उसने आतंकवादी कार्रवाई का हिस्सा बनकर घिनौना अपराध किया और 166 लोगों की जान ले ली.

क्या कहा कसाब ने

कसाब का कहना है कि पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया है. उसे जानबूझकर पुलिस चौपाटी ले गई और वहां से उसे गिरफ्तार दिखा दिया. उसने कहा कि वह सीएसटी स्टेशन पर भी नहीं था. कसाब के वकील अमीन सोलकर ने कहा कि सीसीटीवी के जरिए ली गईं तस्वीरों में कसाब साफ साफ दिखाई नहीं दे रहा है और उसे पहचानना मुश्किल है. सोलकर ने दावा किया कि पुलिस ने कुछ ही वीडियो फुटेज दिखाए और बाकियों को दबा लिया ताकि कसाब को फंसाया जा सके. आतंकवादी हमलों के दौरान ली गईं कसाब की तस्वीरों के बारे में उसके वकील का कहना है कि वे सच्ची नहीं हैं. सोलकर ने निचली अदालत में हुई पूरी सुनवाई को नाजायज करार दिया और कहा कि मामले की पूरी सुनवाई फिर से होनी चाहिए.

कसाब ने अपनी सफाई में कहा कि वह आतंकवादियों के साथ पाकिस्तान से आया ही नहीं था. उसने दावा किया कि वह समझौता एक्सप्रेस से दिल्ली आया और फिर हिंदी फिल्में देखने के लिए मुंबई आ गया. उसे पुलिस ने जूहू बीच पर गिरफ्तार कर लिया. कसाब का कहना है कि जब मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ तब वह पुलिस हिरासत में था.

इसके जवाब में निकम ने कहा कि कसाब झूठा है और वह पूरी सुनवाई के दौरान नई नई कहानियां गढ़ता रहा है.

अदालत अब दोनों पक्षों की दलीलें सुन चुकी है और 7 फरवरी को अपना फैसला सुनाएगी.

रिपोर्टः पीटीआई/वी कुमार

संपादनः ए

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