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जर्मन चुनाव

कश्मीर में हालात बिगड़े, आठ की मौत

भारत प्रशासित कश्मीर में लगातार तीसरे दिन हिंसा. रविवार को हुई हिंसक झड़पों में आठ लोगों की मौत. भीड़ ने पुलिस स्टेशन में आग लगाई, इस दौरान एक जोरदार धमाका भी हुआ. शुक्रवार से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है.

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श्रीनगर के बाहरी इलाके खरिवू में रविवार शाम भीड़ ने पुलिस थाने को घेर लिया और पथराव होने लगा. इस दौरान अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी थाना की ओर रवाना हुए. लेकिन इससे पहले ही वहां एक जोरदार धमाका हुआ और आग लग गई. पुलिस के मुताबिक धमाके और आगजनी के दौरान चार लोगों की मौत हो गई. 35 लोग घायल हुए हैं.

खरिवू में ही रविवार को एक और महिला की मौत हुई. प्रदर्शनकारी थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक जब उग्र भीड़ ने थाने की घुसकर हथियार लूटने की कोशिश करने लगी तो फायरिंग करनी पड़ी. फायरिंग में एक महिला की मौत हो गई. जिसके बाद शाम को गुस्साई भीड़ ने थाने को ही फूंक डाला.

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नहीं रुक रहे विरोध प्रदर्शन

हिंसा श्रीनगर के आस पास ज्यादा हो रही है. पामपोर में प्रर्दशनकारियों ने नेशनल हाइवे नंबर एक को बंद करने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई. पुलिस फायरिंग में तीन लोग मारे गए. बारामुला, हंद्वारा, बड़गाम और अवंतिपुर में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. इन इलाकों में तनाव लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा.

इस बीच केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी के हालात पर चर्चा करने के लिए रविवार रात सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक बुलाई. राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगते हुए शांति कायम करने में मदद करने की अपील की है. महीने भर में यह दूसरा मौका है जब कश्मीर घाटी में इतने उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं. हालांकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने साफ कर दिया है कि हिंसा फैला रहे लोगों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा.

भारत प्रशासित कश्मीर में इस साल कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब कश्मीरी युवकों की संदिग्ध परिस्थियों में मौत हो गई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मी निर्दोष युवकों को आतंकवादी बताकर निशाना बना रहे हैं. राज्य सरकार ने इन सभी मामलों की जांच के आदेश दिए हैं. केंद्र और राज्य का कहना है कि अगर कोई सुरक्षाकर्मी दोषी पाया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. लेकिन ऐसे कई मामले सामने आने के बाद घाटी में हिंसक प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो गया है.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: एन रंजन

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