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दुनिया

"कश्मीर में हस्तक्षेप कर सकता है चीन"

दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा पर चीन ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई है. चीनी मीडिया ने कहा है कि वह भारत के खिलाफ अशांत कश्मीर में हस्तक्षेप कर सकता है.

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि 82 वर्षीय तिब्बती नेता दलाई लामा को भारत की ओर से निमत्रंण दिया जाना असभ्य और भद्दा है. इसके विरोध में चीन अशांत कश्मीर में हस्तक्षेप कर सकता है. चीन दक्षिणी तिब्बत के रूप में भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है. बीजिंग धर्मशाला में रहने वाले तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को अलगाववादी मानता है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है "भारत आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक रूप से मजबूत चीन के "भू राजनीतिक" हमले का सामना कर लेगा. चीन की जीडीपी भारत के मुकाबले कहीं अधिक हैं, सैन्य क्षमतायें, हिंद महासागर तक पहुंच सकती हैं और साथ ही भारत के आस-पड़ोस के देशों के साथ चीन के संबंध भी अच्छे हैं. इसके अलावा भारत के अशांत उत्तरी हिस्से कश्मीर की सीमायें भी चीन से मिलती हैं. ऐसे में अगर चीन भारत के साथ भू-राजनीतिक समीकरणों में उलझता है तो क्या बीजिंग नई दिल्ली से हार जायेगा?"

चीन, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और लद्दाख के साथ सीमायें साझा करता है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी पाकिस्तान प्रशासित से होकर गुजरता है जो दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच तनाव का कारण भी है.

चीनी मीडिया के अलावा, आला अधिकारी और विशेषज्ञ भी भारत पर लगातार जुबानी हमला कर रहे हैं. एक शीर्ष अधिकारी ने इस मसले पर टिप्पणी करते हुये कहा कि "भारत अपनी गरिमा खो रहा है". चीनी अधिकारी ज्यू वेक्यून ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब दलाई लामा ने "दक्षिणी तिब्बत" का दौरा किया हो और इस क्षेत्र को भारतीय क्षेत्र कहा हो, ऐसे में साफ है कि वह अलगाव को लेकर प्रतिबद्ध हैं. भारत ऐसे व्यक्ति का साथ देकर विश्व शक्ति होने की अपनी गरिमा को खो रहा है.

चीनी मीडिया ने कहा कि दलाई लामा चीन की कूटनीति में बेहद अहम हैं. किसी भी देश के लिए, दलाई लामा की ओर अपना दृष्टिकोण उसके चीन के साथ पूरे रिश्ते को प्रभावित करता है. सलाह भरे रुख में कहा गया है कि पश्चिम ने दलाई लामा को एक राजनयिक कार्ड के रूप में पूरी तरह से मान्यता दी है और इसे इस्तेमाल करने में बेहद विवेकपूर्ण हैं.

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक "भारत को चीन के साथ अपने रिश्तों का लाभ मिला है और अगर ये संबंध बर्बाद कर दोनों देश प्रतिद्वंदी बन जाये तो क्या नई दिल्ली "इसका परिणाम बर्दाश्त कर सकता है"? चीन, भारत को एक अच्छा पड़ोसी और साथी मानता है. दलाई लामा के मुद्दे पर चीन ने कभी द्विपक्षीय विवादों को दोनों देशों के बीच नहीं उकसाया है और न ही भारत पर कोई दबाव बनाया है ऐसे में बीजिंग की सद्भावना का जवाब नई दिल्ली को सद्भावना के रूप में देना चाहिये."

बीजिंग ने बुधवार को भारत से दलाई लामा के दौरे को तुरंत रोकने के लिए कहा था. विरोध जताने के लिये चीन बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूत वी के गोखले को भी समन किया.

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