कश्मीर में मौजूदगी का चीन ने किया बचाव | दुनिया | DW | 29.07.2014
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दुनिया

कश्मीर में मौजूदगी का चीन ने किया बचाव

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चीन ने अपनी मौजूदगी को जायज ठहराया है. बीजिंग का कहना है कि स्थानीय लोगों की जिंदगी बेहतर करने में वो मदद कर रहा है. कश्मीर विवाद पर चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान भी दिया.

भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने संसद में पाक प्रशासित कश्मीर में चीनी सेना की मौजूदगी पर चिंता जताई थी. इसके जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चीन की जरूरी सहयोगात्मक गतिविधियां स्थानीय लोगों की जिंदगी पर केंद्रित हैं, न कि किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने पर."

बीजिंग ने एक बार फिर कश्मीर को भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय विवाद बताया और कहा कि इसे नई दिल्ली और इस्लामाबाद को मिलकर हल करना चाहिए, "भारत और पाकिस्तान का पड़ोसी और दोस्त होने के नाते चीन यही कहेगा कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान को बातचीत और सलाह मशविरे से हल करना चाहिए."

निर्माण कार्यों के साथ ही चीन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सड़कें और रेलवे लाइन बनाने की तैयारी कर रहा है. इनके जरिए चीन के शिनजिंयाग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ा जाएगा. अरबों डॉलर का खर्च कर पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी.

Map India China disputed borders

नक्शे में भारत और चीन का विवाद

इससे पहले भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा में रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत पीओके में चल रही चीनी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं. एक लिखित सवाल के जबाव में जेटली ने कहा, "पीओके में चीन की गतिविधियों पर सरकार की बारीक नजर है और चीन को चिंताओं से अवगत करा दिया गया है. उनसे यह भी कहा गया है कि ऐसी गतिविधियां रोकी जाएं." नई दिल्ली और बीजिंग के अधिकारियों के बीच समय समय पर हो रही बैठकों में "द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों" पर चर्चा जारी है.

भारत और चीन के बीच बीते छह दशक से सीमा विवाद है. चीन पूर्वोत्तर भारत के इलाकों पर अपना हक जताता है, भारत इस दावे को खारिज करने के साथ अक्साई चीन पर अपना हक जताता है. एशिया की दोनों बड़ी शक्तियों के बीच सीमा विवाद को लेकर 1962 में युद्ध भी हो चुका है.

पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर का विवाद सबसे अहम है. 1948 से चला आ रहा यह विवाद अब तक दोनों देशों के बीच चार युद्ध करा चुका है. दोनों पक्ष मानते हैं कि जब तक कश्मीर विवाद हल नहीं होगा तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध मधुर नहीं हो सकते.

ओएसजे/एमजे (पीटीआई)

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