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जर्मन चुनाव

कश्मीर में भारी हिंसा, 15 की मौत

कश्मीर घाटी में तीन महीने से जारी हिंसा में 15 लोगों की जानें गईं. लोग कर्फ्यू के बावजूद भारत और कुरान को जलाए जाने के विरोध में सड़कों पर उतर आए. उधर दिल्ली में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडीय समिति की अहम बैठक हुई.

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जैसे जैसे कश्मीर के हालात बिगड़ रहे हैं, केंद्र और राज्य सरकार के लिए विकल्प भी सिमटते जा रहे हैं. राज्य से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाने और वहां राजनीतिक पहल शुरू करना बेहद जरूरी हो गया है. लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज भी यही कहा कि वह भारतीय संविधान के दायरे में बातचीत को तैयार हैं लेकिन हिंसा तो खत्म करो.

पिछले तीन महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों में आज का दिन कश्मीर घाटी में सबसे हिंसक रहा. बड़गाव जिले में एक पुलिकर्मी और पांच आम लोगों प्रदर्शनों के दौरान मारे गए. वहीं तंगमर्ग में पांच लोग उस वक्त सुरक्षा बलों की गोलियां का निशाना बने, जब प्रदर्शनकारियों ने एक ईसाई स्कूल को आग लगाने की कोशिश की. वे अमेरिका में कुरान के अपमान से नाराज थे. उत्तरी बांदीपुरा जिले में भी एक व्यक्ति की मौत हुई है. कर्फ्यू के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतरे.

Manmohan Singh

हिंसा तो खत्म हो

राज्य के मुख्य सचिव एसएस कपूर ने लोगों से अपील करते हुए कहा, ''कानून को अपने हाथ में मत लीजिए. आप लोगों से हमारी हमदर्दी है. हम आपकी भावनाओं की कद्र करते हैं. भावनाओं को ठेस पहुंची है, मैं यह समझता हूं. धार्मिक भावनाएं बहुत संवेदनशील होती हैं. मैं आप सबसे अपील करता हूं कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करें.''

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दिल्ली में हैं और चाहते हैं कि कुछ इलाकों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाया जाए. विपक्षी बीजेपी तो इसका विरोध कर रही है, साथ ही भारत सेना और रक्षा मंत्री एके एंटनी भी इसके हक में नहीं हैं. इसीलिए सरकार फूंक फूंक कर कदम बढ़ा रही है. आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी इस पर विचार करेगी. कश्मीर मामलों पर नजर रखने वाले बशीर मंजर कहते हैं, ''स्थिति तभी नियंत्रण में आ सकती है जब मौतों का सिलसिला रुके. लेकिन हर रोज मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और लोगों में गुस्सा भी बढ़ रहा है. जितने ज्यादा लोग मरेंगे, आंदोलन उतना ही उग्र होगा.''

तीन महीने से घाटी में भारत विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक कम से कम 70 लोग मारे जा चुके हैं. लगातार जारी अशांति से यह आशंका भी जोर पकड़ रही है कि कहीं स्थिति हाथ से न निकल जाए.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ए कुमार

संपादन: ओ सिंह

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