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जर्मन चुनाव

कश्मीर में फिर हिंसा, 13 की मौत

भारतीय कश्मीर में हिंसा का दौर जारी है. कर्फ्यू के बावजूद सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग में 13 लोगों की मौत हो गई. बीते तीन महीनों के दौरान यह एक दिन मरने वाले लोगों की सबसे ज्यादा संख्या है.

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कर्फ्यू की परवाह किए बिना दसियों हजार लोग सड़कों पर उतर आए. उन्होंने सरकारी इमारतों को जलाया और थानों पर पथराव किया. ज्यादातर लोग भारत विरोधी नारे लगा रहे थे और आजादी की मांग कर रहे थे, लेकिन कुछ लोग अमेरिका में कुरान के अपमान से भी नाराज थे. नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस की फायरिंग में 13 लोग मारे गए हैं दर्जनों घायल हो गए हैं. मरने वालों में सात प्रदर्शनकारी और एक पुलिसकर्मी शामिल हैं.

उधर नई दिल्ली में कश्मीर घाटी के हालात चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों से भारतीय संविधान के दायर में रह कर बात करने को तैयार हैं. मनमोहन सिंह ने घाटी में बेहतर सुविधाएं देने और लोगों को अपना आर्थिक स्तर ऊंचा उठाने के मौके मुहैया कराने पर जोर दिया है.

भारतीय सेना के उच्चाधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ हफ्तों से जारी अशांति चिंता का विषय है. कश्मीर के युवा भी हमारे ही नागरिक हैं, उनकी परेशानियों पर ध्यान देना होगा. हम हर उस व्यक्ति और गुट से बात करने को तैयार हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़ेगा."

सिंह ने जम्मू कश्मीर से सशस्त्र सैन्य बल विशेषाधिकार कानून को हटाने के बारे में कुछ नहीं कहा. मुख्यमंत्री इस कानून को आंशिक रूप से हटाने के लिए जोर डाल रहे हैं. सोमवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में इस बात पर चर्चा होने की उम्मीद है. रक्षा मंत्री एके एंटनी और सेना इसके खिलाफ है. शुक्रवार को कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक में भी एंटनी इस बारे में अपना विरोध जता चुके हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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