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दुनिया

कश्मीर में दिल को हथियार बनाकर लड़ेगी भारतीय फौज

भारत प्रशासित कश्मीर में ज्यादतियों के लिए आलोचना झेल रही फौज ने नया हथियार चुना है. कश्मीर में स्थिरता लाने के लिए अब भारतीय फौज दिल को हथियार बनाएगी. यह काम लेफ्टिनेंट जनरल एसए हसनैन की कमान में होगा.

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घाटी में लाइन ऑफ कंट्रोल की निगरानी करने वाली 15वीं कॉर्प के नए कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन इस पद पर पहुंचने वाले सिर्फ दूसरे मुसलमान अफसर हैं. उनका कहना है कि अपने कार्यकाल के दौरान वह मानवीय रूख से काम करेंगे. उन्होंने कहा, "मेरा रुख पूरी तरह मानवीय है और उससे ज्यादा कुछ नहीं. मेरा मानना है कि मेरी फौज को हर जगह हथियारों के साथ नजर नहीं आना चाहिए."

हसनैन से पहले लेफ्टिनेंट जनरल एमए जाकी ने इस कमांड को संभाला था. वह 1988 से 1990 के बीच 15वीं कॉर्प के कमांडर रहे. बाद में वह पूर्व राज्यपाल जगमोहन के सुरक्षा सलाहकार भी रहे.

हसनैन हालांकि सेना को लोगों के दिलों तक पहुंचाना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "हमारा प्रमुख हथियार दिल होगा. अब राज्य में स्थिरता लाने के लिए हम जो भी कोशिशें करेंगे उनमें इसी हथियार का इस्तेमाल होगा."

हसनैन के इस हथियार को आजमाने का मौका भी उन्हें जल्दी ही मिलने वाला है क्योंकि मुहर्रम के मौके पर श्रीनगर के कई इलाकों में कर्फ्यू का एलान कर दिया गया है. शुक्रवार को शिया मुसलमान मुहर्रम जुलूस निकालेंगे और तब कई संवेदनशील इलाकों में अशांति फैलने का अंदेशा है.

Indien Kaschmir Demonstranten in Srinagar Flash-Galerie

महीनों तक हिंसा की चपेट में रही घाटी

अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन ने सात थाना इलाकों में कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है. कर्फ्यू लगाने का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब उदारवादी हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने खुद पर लगाई गईं पाबंदियों को तोड़ने का एलान किया है. फारूक अपने घर में नजरबंद हैं और उन्हें जामा मस्जिद में जुमे की नमाज अता करने की इजाजत नहीं है. लेकिन फारूक ने एलान किया है कि वह इस बार जामा मस्जिद में जुमे की नमाज अता करेंगे.

इस बीच भारत सरकार के वार्ताकारों का दल शुक्रवार को राज्य की अपने तीसरे दौरे पर पहुंच रहा है. सात दिन के अपने दौरे में दल कई जिला मुख्यालयों पर जाएगा. जम्मू, राजौरी, पुंछ, डोडा और श्रीनगर में तीनों वार्ताकार सभी संगठनों और राजनीतिक दलों के लोगों से बात करेंगे. इस दल में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पडगांवकर के साथ शिक्षाविद राधा कुमार और केंद्रीय सूचना आयुक्त एमएम अंसारी शामिल हैं. भारत सरकार ने 13 अक्तूबर को इस दल को नियुक्त किया ताकि कश्मीर समस्या का स्थायी हल खोजा जा सके.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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