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दुनिया

कश्मीर में तीसरे दिन भी उबाल जारी

भारत प्रशासित कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद शुरू हुई हिंसा में अब तक 23 लोगों के मारे जाने की खबर है.

जगह जगह से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें आ रही हैं. शुक्रवार भारतीय सेना और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बुरहान वानी की मौत हुई. घटना के तीसरे दिन भी कश्मीर घाटी में आम जनजीवन ठप पड़ा है. हिजबुल कमांडर के मारे जाने के विरोध में अलगाववादियों ने हड़ताल की है और कर्फ्यू की स्थिति बनी हुई है.

पुलिस ने बताया, "रविवार को कुलगाम जिले में हुई हिंसा में दो व्यक्ति फिरोज अहमद मीर (22 साल) और खुर्शीद अहमद मीर (38) की जान चली गई." दक्षिण कश्मीर जिले में संचार की पर्याप्त सुविधा ना होने के कारण इनके बारे में पहले सूचना नहीं आ सकी थी. इसी के साथ सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में मरने वाले प्रदर्शकारियों की संख्या 23 हो गई है. हिंसा में एक पुलिसकर्मी की भी मौत हुई. 250 से भी अधिक लोगों के घायल होने की खबर है. मृतकों में ज्यादातर 26 साल से कम उम्र के युवा हैं.

घाटी के कई हिस्सों में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगे हैं. संवेदनशील इलाकों में प्रशासन ने सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी है. सोमवार को प्रतिबंध और सख्त किए गए जिससे जान या माल की और क्षति को रोका जा सके. शुक्रवार से ही दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में मोबाइल सेवा स्थगित कर दी गई है. दुकानें, निजी दफ्तर, व्यापारिक केंद्र, पेट्रोल पंप बंद हैं, जबकि सरकारी दफ्तरों और बैंकों में थोड़े बहुत लोग पहुंचे. सरकारी ट्रांसपोर्ट पूरी तरह ठप है, तो वहीं कुछ जगहों पर प्राइवेट कारें और ऑटो रिक्शा दिख रहे हैं.

अलगाववादी नेता जैसे सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक को या तो हिरासत में या फिर नजरबंदी में रखा गया है. मुस्लिम-बहुत आबादी वाले इस इलाके का सबसे बड़ा विद्रोही गुट हिजबुल मुजाहिद्दीन 1990 के दशक से ही भारत-प्रशासित कश्मीर में भारतीय शासन के खिलाफ लड़ रहा है. बुरहानी इसी गुट का युवा कमांडर था.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में आम नागरिकों के मारे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जो लोग बुरहान वानी के मारे जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, उन आम लोगों पर अत्यधिक और गैरकानूनी बल प्रयोग करना दुखद है." शरीफ ने अलगाववादी कश्मीरी नेताओं को कैद में रखने पर भी "गंभीर चिंता" जताते हुए भारत से मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने की अपील की.

कश्मीर दोनों पड़ोसी देशों भारत और पाकिस्तान के बीच बंटा हुआ है और दोनों ही देश इस पूरे इलाके को अपने अधिकार में करने के लिए 1947 से दो बार युद्ध कर चुके हैं. 1948 में यूएन सुरक्षा परिषद ने भारत और पाकिस्तान को शांतिपूर्ण तरीके से यह मसला सुलझाने को कहा था, जिसमें कश्मीर के लोग जनमत-संग्रह के जरिए यह तय करें कि वे किस देश के साथ रहना चाहते हैं.

कश्मीर में 1980 के दशक से जारी हिंसक गतिविधियों में करीब 44,000 लोगों की जान जाने का अनुमान है. भारत आरोप लगाता आया है कि पाकिस्तान विद्रोहियों को शरण देता है और उन्हें सीमा पार कर भारत की धरती पर हिंसा करने के लिए भेजता है. वहीं इस्लामाबाद का कहना है कि वह केवल अपने शासन वाले कश्मीर के लोगों को कूटनीतिक और राजनीतिक सहयोग देता है.

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