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दुनिया

कश्मीर बाढ़ में अब भी फंसे हैं लाखों

जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ में अब भी चार लाख से अधिक लोग फंसे हुए हैं. सेना और बचाव दल के लोग पीड़ितों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

जम्मू कश्मीर में आई सदी की सबसे भीषण बाढ़ में अब तक करीब 215 लोगों की मौत हो चुकी है. सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ के जवान दिन रात एक कर के राहत कार्यों में जुटे हुए हैं. राज्य के अलग अलग इलाकों से राहतकर्मियों ने बचाव को और तेज करते हुए अब तक 96 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक वायुसेना ने राहत और बचाव कार्य के लिए 84 विमान और हेलीकॉप्टर लगाए हैं. सेना ने 30 हजार जवानों को तैनात कर दिया है जिनमें 21 हजार जवान श्रीनगर में और बाकी 9 हजार जम्मू इलाके में लगाए गए हैं. गुरुवार को सेना के बचाव दल ने 90 और नौकाओं को लगाकर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक लाने का काम तेज किया. सेना की 224 और एनडीआरएफ की 148 नौकाएं पहले से ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात हैं.

एक हफ्ते से ज्यादा से बाढ़ में फंसे लोगों के पास पीने का पानी और खाने की समस्या है. सेना के जवान ऐसे लोगों तक पानी और खाद्य सामग्री पहुंचा रहे हैं. सेना अब तक दो लाख 24 हजार लीटर से अधिक पानी और ढाई टन से अधिक बिस्कुट, सात टन बेबी फुड और 31.5 हजार खाद्य पैकेट प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा चुकी है.

20 फीसदी पानी सप्लाई बहाल

कश्मीर में 20 फीसदी पानी सप्लाई बहाल हो चुकी है, संचार संपर्क स्थापित करने की युद्ध स्तर पर कोशिश हो रही है. स्थिति से उबरने के प्रयासों को तेज करने के मकसद से जम्मू कश्मीर सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों को ड्यूटी पर गुरुवार शाम तक पहुंचने का आदेश दिया है. आधे कश्मीर में पानी की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है. मंडलायुक्त कश्मीर रोहित कंसल ने बताया, "20 फीसदी पानी की सप्लाई बहाल हो चुकी है और संचार सेवा आंशिक रूप से बहाल कर दी गई है. सड़क साफ करने की कोशिशें जारी हैं." उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू कश्मीर के सभी बैंकों में खाता धारकों की जमा पूंजी सुरक्षित है. कंसल ने बाढ़ से मची तबाही का विवरण देते हुए बताया कि कश्मीर के 12 जिलों में से 8 जिले या तो पूरी तरह से या आंशिक रूप से प्रभावित हैं. उन्होंने बताया कि बाढ़ की वजह 50 पुल और 170 किलोमीटर सड़कें बर्बाद हो गईं.

एक दिन का वेतन दान किया

प्रधानमंत्री कार्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने जम्मू कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाते हुए अपना एक दिन का वेतन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में देने का फैसला किया है. पीएमओ ने एक बयान में यह जानकारी देते हुए बताया गया कि पीएमओ के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी इच्छा से जम्मू-कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए यह पहल की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जम्मू कश्मीर में भयावह बाढ़ के बाद बचाव और राहत अभियान तेज करने में राज्य सरकार को पूरा सहयोग दें. उन्होंने प्रभावित लोगों तक जरूरी चीजें तेजी से पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

एए/एएम (पीटीआई,डीपीए,)

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