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दुनिया

कश्मीर पर वार्ता के लिए एकजुट हुआ जम्मू-कश्मीर का विपक्ष

जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और कश्मीर पर वार्ता करने का आह्वान किया है.

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुआई में जम्मू-कश्मीर की विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. कश्मीर घाटी में जारी तनावपूर्ण स्थिति का ब्यौरा देते हुए इन नेताओं ने मोदी से कश्मीर में हालात सुधारने के लिए राजनैतिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की.

कश्मीर घाटी में पिछले 45 दिनों से कर्फ्यू लगा हुआ है. आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए राज्य की सभी विपक्षी पार्टियां एक साथ आई हैं और केंद्र सरकार से सभी पक्षों को साथ लेकर राजनौतिक वार्ताएं शुरु करने का आह्वान कर रही हैं.

इस संयुक्त दल में नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी के 8 नेताओं के अलावा राज्य कांग्रेस के सात नेता और सीपीएम नेता एमवाई तारिगामी शामिल हैं. वे राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं से भी मिल रहे हैं. प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा और घाटी की स्थिति पर अपने असंतोष और दुख का इजहार किया. उन्होंने "हालात के राजनैतिक निवारण के दृष्टिकोण को लेकर दिख रही अनिच्छा पर हताशा" व्यक्त की.

जम्मू और कश्मीर के विपक्षी दलों का मानना है कि कश्मीर की स्थिति से निपटने के लिए पहले से आजमाए हुए तरीके कारगर नहीं साबित हो रहे हैं. नेताओं ने इसका राजनीतिक हल तलाशने की कोशिश पर बल देते हुए राज्य के युवाओं में बढ़ रहे "अभूतपूर्व असंतोष और मोहभंग" के बारे में बताया.

घाटी में सत्रस्त्र बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल से लोगों में काफी गुस्सा है. रविवार रात आंसू गैस के एक गोले के इरफान नामक युवा के सीने पर फट जाने से उसकी मौत हो गई. राजनौतिक दलों ने प्रधानमंत्री से "कई युवा लड़कों और लड़कियों को गंभीर चोटें देकर अंधा बना चुके पैलेट गन्स के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने की" घोषणा करने का अनुरोध किया.

इसके अलावा प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में "सामूहिक उत्पीड़न की नीति और छापों के बारे में संबंद्ध संस्थाओं को" जागरूक करने की मांग की गई है. शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर उन्हें मेमोरेंडम सौंपने के साथ जम्मू कश्मीर के इस संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने अपने अभियान की शुरुआत की. रविवार को वे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मिले और राज्य की जमीनी स्थिति के बारे में उन्हें भी अवगत कराया.

कश्मीर घाटी के कई इलाकों में भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के हजारों सैनिक तैनात हैं. अपने दंगारोधी उपकरणों से लैस सुरक्षाबल तनावपूर्व इलाकों में निगरानी करते हैं. 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की एक मुठभेड़ में मौत के बाद से भारतीय कश्मीर में एक बार फिर भारत के खिलाफ हिंसक आंदोलन का खतरनाक दौर शुरु हुआ है. अब तक दोनों पक्षों के संघर्ष में कम से कम 65 नागरिकों के मारे जाने और हजारों के घायल होने की खबर है. दो पुलिसकर्मियों की भी जान गई है और सैकड़ों जवान घायल हैं.

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