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दुनिया

कश्मीर का बहुमत नहीं चाहता आज़ादी

भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आधे से कम लोग ही विवाद के समाधान के लिए आज़ादी चाहते हैं. यह बात कश्मीर पर कराए गए एक ब्रिटिश सर्वेक्षण में सामने आई है.

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आधे से भी कम लोग आजादी के हिमायती

ब्रिटेन के रॉबर्ट ब्रैडनौक द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत प्रशासित कश्मीर में केवल 43 प्रतिशत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 44 प्रतिशत लोगों ने ही आज़ादी का पक्ष लिया है. "पाथ्स टू पीस" (शांति की राह) नाम के इस सर्वेक्षण में करीब 3,800 लोगों से पूछा गया कि वे कश्मीर मुद्दे पर क्या सोचते हैं.

1947 में भारत के विभाजन के बाद संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में कश्मीर में जनमत संग्रह के आधार पर ही यह तय करने की बात कही गई थी कि कश्मीर भारत को मिलेगा या पाकिस्तान को. दोनों ही देश कश्मीर पर अपना अपना दावा जताते हैं. अब तक यह धारणा रही है कि शायद जनमत से भी इसका समाधान नहीं निकलेगा. लंदन के थिंक टैंक चैथम हाउस द्वारा जारी सर्वेक्षण में कहा गया है, "सर्वेक्षण के नतीजे इस आम धारणा की पुष्टि करते हैं कि जनमत संग्रह का विकल्प वाकई में विवाद का कोई समाधान नहीं देगा."

सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय जम्मू और कश्मीर के मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में 74 से 95 फ़ीसदी लोगों ने आज़ाद कश्मीर की वकालत की, लेकिन हिन्दू बहुल जम्मू में एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने इसे सही बताया. सर्वे के अनुसार लोगों का विशाल बहुमत विवाद का समाधान चाहता है, हालांकि लोग यह भी जानते हैं कि इस बारे में कोई समाधान ढूंढना आसान नहीं है. रॉबर्ट ब्रैडनौक ने कहा, "कोई भी समाधान स्थायी हल के लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगा."

कश्मीर में पिछले बीस बरसों से चल रहे विद्रोह में 47,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. विभाजन के बाद दोनों देश कश्मीर के कारण दो युद्ध लड़ चुके हैं.

रिपोर्ट: एजंसियां/ईशा भाटिया

संपादन: ए कुमार

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