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दुनिया

कलाम के निधन पर शोक में भारत

भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का सोमवार शाम दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 83 साल के कलाम आईआईएम शिलांग में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते हुए गिर गए और बाद में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

पूर्व राष्ट्रपति कलाम के सम्मान में देश भर में 27 जुलाई से 2 अगस्त तक सात दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जाएगा. इस अवधि के दौरान देश भर में सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. इस दौरान सरकारी स्तर पर किसी भी तरह के मनोरंजन कार्यक्रम या समारोह का आयोजन नहीं किया जाएगा. डॉ. कलाम के पार्थिव शरीर मंगलवार को राजधानी दिल्ली लाया जा रहा है जहां लोग उनका अंतिम दर्शन कर सकेंगे. पूर्व राष्ट्रपति का अंतिम संस्कार रामेश्वरम में होगा, जहां केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहेंगे.

एपीजे अब्दुल कलाम देश के अत्यंत लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक थे और अपनी सादगी के लिए मशहूर थे. उनका जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में 15 अक्टूबर 1931 को एक गरीब मछुआरा परिवार में हुआ था. अवुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम का बचपन बहुत मुश्किलों में बीता. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर पढ़ाई की और वैज्ञानिक का करियर चुना. वह ऐसे विशिष्ट वैज्ञानिक थे, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया था. वह 1999 से 2001 तक सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार थे और 1998 के परमाणु परीक्षणों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.

मिसाइलमैन कलाम

एपीजे अब्दुल कलाम को भारत के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु सत्ता बनने का श्रेय दिया जाता है. मिसाइलमैन के नाम से मशहूर कलाम 25 जुलाई 2002 को देश के 11वें राष्ट्रपति बने. उन्हें 1981 में पद्मभूषण, 1990 में पद्मविभूषण और 1997 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया गया. देश के चोटी के वैज्ञानिक होने और राष्ट्रपति बनने के बावजूद एपीजे अब्दुल कलाम में कभी गरूर नहीं आया. उन्होंने हमेशा एक आम आदमी की जिंदगी जीने की कोशिश की और इसके लिए कई बार राष्ट्रपति के प्रोटोकोल तक की परवाह नहीं की.

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कलाम के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि वे उनके पुराने मित्रों में से एक हैं और लोकप्रिय राष्ट्रपति के रूप में हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ. कलाम देश के सच्चे सपूतों में से एक थे. देश की प्रगति के लिए उनके अथक प्रयास और नि:स्वार्थ कार्यों के लिए और एक लोकप्रिय राष्ट्रपति के रूप में हमेशा याद किया जाएगा और भावी पीढ़ी के लिए उनके कार्य प्रेरित करेंगे. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कलाम के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

एमजे/आईबी (वार्ता)

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