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दुनिया

कर्ण सिंह ने ठुकराया चीन का सम्मान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की तरफ से दिए जाने वाले चीन-भारत मैत्री सम्मान को लेने से इनकार कर दिया है. भारत दौरे पर गए वेन ने अलग अलग क्षेत्रों के नौ लोगों को सम्मानित किया है.

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सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा सांसद कर्ण सिंह ने इस सम्मान को स्वीकार करने से मना कर दिया क्योंकि वह मानते हैं कि किसी सांसद को इस तरह का सम्मान नहीं लेना चाहिए, वरना उस पर किसी खास देश का पक्ष लेने का आरोप लग सकता है. कर्ण सिंह सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष हैं. साथ ही कांग्रेस की विदेश नीति से जुड़े मामलों की ईकाई के चेयरमैन भी हैं.

Wen Jiabao in Indien

इस सम्मान से नवाजे गए लोगों में सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी, प्रोफेसर थान छुंग, जी विश्वनाथन, जी बनर्जी, एम मोहंती, एस चक्रवर्ती, भास्करन, शेरदिल और पल्लवी अय्यर शामिल हैं. ये सम्मान नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में चीनी प्रधानमंत्री की तरफ से दिए गए. इन लोगों को भारत-चीन दोस्ती और आपसी समझ को प्रोत्साहन देने में योगदान के लिए सम्मानित किया.

सम्मान देते हुए चीनी प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी लोग चीन और भारत के संबंधों की बढ़ती पहुंच और गहराई के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ अपने रिश्तों को बहुत महत्व देता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए और भी ज्यादा लोग सक्रिय होंगे.

चीन के प्रधानमंत्री ने प्राचीन चीनी विद्वान और ह्वेन त्सांग और फा हाइन को याद करते हुए कहा कि आधुनिक समय में भी दोनों देशों के रिश्ते बिल्कुल ठीक दिशा में जा रहे हैं. उन्होंने अपने भाषण में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की 1924 की चीन यात्रा का भी जिक्र किया. भारत चीन रिश्तों को बढ़ावा देने में उन्होंने महात्मा गांधी के योगदान को भी सराहा.

भारत-चीन मैत्री सम्मान पाने वालों की तरफ से सीताराम येचुरी ने चीन सरकार का धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में चीन के सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों और भारत के पंचशील मंत्र के सहारे ही भारत चीन संबंध आगे बढ़ रहे हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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