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मनोरंजन

करोड़ों की नौकरी के बावजूद हताशा

इंजीनियरिंग शिक्षा में अग्रणी भारतीय तकनीकी संस्थानों (आईआईटी) में छात्रों को सालाना एक करोड़ से ज्यादा की नौकरी के ऑफर मिल रहे हैं. लेकिन छात्र कुछ कंपनियों की गैर मौजूदगी की वजह से निराश हैं.

देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित आईआईटी में इसी सप्ताह प्लेसमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई है. कोई तीन साल के अंतराल के बाद इस साल छात्रों को एक करोड़ रुपए से ज्यादा के पैकेज मिले हैं. सामान्य तौर पर हर जगह पैकेज में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इस बार खासियत यह है कि फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले रही हैं.फेसबुक ने कुछ वैसे छात्रों को नौकरी के प्रस्ताव दिए हैं जिन्होंने इस साल गर्मियों में उसके मुख्यालय में इंटनर्शिप की थी. ऐसे आठ छात्रों में से सिर्फ तीन आईआईटी के हैं और बाकी पांच दूसरे इंजीनियरिंग संस्थानों के.

जानकारों का कहना है कि अमेरिकी एच1 बी वीजा में कटौती की वजह से इन कंपनियों ने प्लेसमेंट प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है. वीजा का मामला भी पेचीदा है. पिछले साल इस वर्ग के 65 हजार वीजा के पहले ही खत्म हो जाने के बावजूद अमेरिकी कंपनियों में नौकरी के लिए चुने गए कुछ छात्रों को साल भर तक मजबूरन उन कंपनियों की भारतीय या यूपरोपीय शाखाओं में काम करना पड़ा था. इसके साथ ही कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस साल उन कंपनियों में खाली पदों की तादाद कम थी.

करोड़ों का ऑफर ठुकराया

Flash-Galerie Indian Institute of Technology, Madras

आईआईटी कानपुर में पढ़ने वाले दो छात्रों ने इस बार सालाना 2.10 लाख डॉलर यानी 1.31 करोड़ के वेतन का ऑफर ठुकरा दिया है. दोनों को बहुराष्ट्रीय अमेरिकी सूचना तकनीक कंपनी ओरेकल ने यह पैकेज ऑफर किया था. लेकिन दोनों छात्रों ने इससे लगभग आधे वेतन पर गूगल का दामन थाम लिया. वहां उनको 68.34 लाख रूपए सालाना वेतन मिलेगा. आखिर ऐसा क्यों ? उन छात्रों का कहना है कि उनके लिए पैसा ही सब कुछ नहीं है. नौकरी में कुछ करने के मौके की ज्यादा अहमियत है. गूगल जैसी कंपनी में उनके लिए काम करने के ज्यादा बेहतर मौके मिलेंगे. इससे भविष्य में उनको फायदा होगा. कंपनी ने आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस के दो छात्रों को भी इसी नौकरी का प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है.

आईआईटी कानपुर में कई छात्रों को दूसरी कंपनियों की तरफ से सालाना आठ लाख से लेकर 24 लाख तक का पैकेज मिला है. आईआईटी कानपुर की प्लेसमेंट सैल के चेयरमेन विमल कुमार के मुताबिक लगभग 200 कंपनियों के इस प्रक्रिया में शामिल होने की उम्मीद है. आईआईटी खड़गपुर में अभी सबसे ज्यादा डेढ़ लाख डॉलर सालाना तक की नौकरी के आफर मिले हैं. इस साल भारत में भी ज्यादा वेतन वाली नौकरियों के ऑफर मिल रहे हैं लेकिन आईआईटी कानपुर के प्लेसमेंट विभाग के प्रमुख विमल कुमार कहते हैं, "पिछले साल के मुकाबले वेतन में तीन से पांच प्रतिशत का मामूली इजाफा हुआ है और इसकी वजह रुपए की कीमत मे गिरावट है."

कई कंपनियां नदारद

आईआईटी के छात्रों के प्लेसमेंट पर वित्तीय मंदी का तो खास असर नहीं नजर आ रहा है लेकिन कई प्रमुख कंपनियां इस बार नदारद हैं. आईआईटी दिल्ली की प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर सुरक्षि गर्ग कहती हैं, "नियमित तौर पर आने वाली कम से कम दस प्रमुख नियोक्ता कंपनियां इस साल नहीं आ रही हैं. ऐसे में प्लेसमेंट में कुछ दिक्कतें हो सकती हैं." आईआईटी खड़गपुर के एक प्रोफेसर कहते हैं, "तमाम भारतीय तकनीकी संस्थानों में दस हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. इनमें से 10-20 लोगों को अगर करोड़ के आसपास या उससे ज्यादा का पैकेज मिलता है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है. तमाम छात्रों के प्लेसमेंट और पैकेज का औसत निकालने पर तस्वीर ज्यादा साफ हो जाएगी." वह कहते हैं कि कुछ छात्र जन्मजात मेधावी होते हैं और कुछ की किस्मत उनका साथ देती है. लेकिन हर छात्र के साथ ऐसा नहीं होता.

जापानी कंपनियों की भागीदारी

आईआईटी की प्लसमेंट प्रक्रिया में अब तक अमेरिकी कंपनियों की सबसे बड़ी भागीदारी होती थी लेकिन अब जापानी कंपनियां उनको पीछे छोड़ रही हैं. यही वजह है कि आईआईटी कानपुर ने अगले साल से जापानी भाषा में भी प्लेसमेंट ब्रोशर छपवाने का फैसला किया है. कई जापानी कंपनियों ने इस साल छात्रों को आकर्षक पैकेज पर नौकरियां दी हैं. कोरियाई कंपनी सैमसंग ने भी कई छात्रों को बेहतर पैकेज ऑफर किया है. लेकिन एच1 बी वीजा में कटौती और उसके बाद फेसबुक और ट्विटर की गैरमौजूदगी ने सात समंदर पार जाने के कई छात्रों के सपने तोड़ दिए हैं.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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