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ब्लॉग

करिश्मे की उम्मीद में केरी

सत्तर के हो चले केरी 50 से ज्यादा के नहीं दिखते. जॉन केरी आठ साल पहले अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे और चार साल बाद फिर से उम्मीदवारी कर सकते हैं.

विदेशी मामलों के जानकार केरी के पास तीन साल का मौका है कि वह खुद को एक कामयाब और झगड़े पैदा करने वाले नहीं, बल्कि सुलझाने वाले विदेश मंत्री के रूप में साबित करें और वह मौका पा लें, जो उन्होंने 2004 में खो दिया था.

केरी ने हिलेरी क्लिंटन की जगह ली है, जो राष्ट्रपति पद की दूसरी उम्मीदवार हो सकती हैं और केरी से पहले विदेश मंत्री के तौर पर अमेरिका की नजर से “शानदार” काम कर चुकी हैं. क्लिंटन के वक्त में अरब क्रांति हुई, जिसमें जाहिर तौर पर अमेरिका का कोई हाथ नहीं था लेकिन लेकिन लीबिया के पूर्व लीडर मुअम्मर गद्दाफी की मौत के वक्त पाकिस्तान दौरे पर गईं क्लिंटन का “वॉव” सबको जरूर याद होगा. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस वॉव को गलत नजरिए से देखता है.

महिला विदेश मंत्री के तौर पर क्लिंटन ने शायद मैडलिन अल्ब्राइट और कोंडोलीजा राइस से बेहतर काम किया हो लेकिन झगड़े वाले मुद्दे वह बीच में ही छोड़ गई हैं. यूरोप के दौरे पर उन्होंने कभी रूसी विदेश मंत्री के साथ “रिसेट बटन” दबा कर रिश्ते बेहतर करने की बात कही थी, जो और खराब हुए हैं. रूस ने अमेरिकियों के लिए अपने बच्चों के गोद लेने पर पाबंदी लगा कर इन्हें और मुश्किल कर दिया है.

केरी की मुलाकात फिर उसी रूसी विदेश मंत्री से हो रही है और उन्हें पता है कि इस बार रिसेट नहीं, बल्कि रिस्टार्ट बटन दबाने की जरूरत है. केरी के पास मौके हैं. बर्लिन दौरे में वह सीरिया सहित कई मुद्दों को समझने और हल करने की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे.

उनके लिए मौका इसलिए भी बेहतर है कि उनकी विदेश नीति की पारी ऐसे वक्त में शुरू हुई है, जब दुनिया भर में हथियारों की बिक्री कम हुई है, जब अमेरिका अफगानिस्तान से हट रहा है और जब फलीस्तीन को लेकर संयुक्त राष्ट्र और दुनिया ज्यादा संजीदा दिख रही है. बस, अगर केरी सीरिया के मुद्दे पर कोई रास्ता निकाल दें और वह रास्ता लीबिया या माली होकर न गुजरे, तो फौरन एक लोकप्रिय विदेश मंत्री के तौर पर अपनी छाप छोड़ सकते हैं.

केरी ने अपने हिस्से की राजनीतिक गलती भी पूरी कर ली है और उससे सीख भी ले ली है. 2006 में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने शिक्षा का महत्व बताते हुए यहां तक कह दिया कि अगर अमेरिकी युवा पढ़ाई नहीं करेगा, तो उसे इराक में अपना करियर बढ़ाना होगा (युद्ध में शामिल होकर). अगले दिन रिपब्लिकन और डेमोक्रैट दोनों पार्टियां उन पर पिल पड़ीं कि वह अमेरिकी फौज को ओछी नजर से देख रहे हैं. केरी ने कितनी भी सफाई दी लेकिन नहीं चली. चुनाव के वक्त बात ताजा थी, लिहाजा केरी को नुकसान हुआ. अब बात पुरानी पड़ चुकी है, लोग इसे भुला सकते हैं. पर यह केरी के लिए सबक जरूर है कि वह अगला जुमला सोच समझ कर बोलें. यह सबक विदेश मंत्री रहते हुए उन्हें “वॉव” जैसी किसी घटना से बचा सकता है.

तीन साल के समय में केरी खुद को ऐसे स्टेट्समैन के रूप में स्थापित कर सकते हैं, जिनमें आम अमेरिकी का भरोसा पैदा हो सके. फिर वह जो बाइडन या हिलेरी क्लिंटन पर हावी हो सकते हैं.

ब्लॉगः अनवर जे अशरफ

(यह लेखक के निजी विचार हैं. डॉयचे वेले इनकी जिम्मेदारी नहीं लेता.)

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