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दुनिया

कराची कांड में फंसे सारकोजी भड़के

कराची बम हमले में 11 फ्रेंच इंजीनियरों की मौत पर उठते सवालों के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति पत्रकारों पर भड़क उठे. उन्होंने कहा कि बिना सबूत अगर रिपोर्टर उन पर इलजाम लगाएंगे तो वे भी पत्रकारों पर ऊल जुलूल आरोप लगा सकते हैं.

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मुश्किल में फंसे सारकोजी

पुर्तगाल की राजधानी लिसबन में जब सारकोजी से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने लगभग भिन्नाते हुए कहा, "यह पागलपन है. आप में से कोई भी मेरी बात का यकीन नहीं करता." आरोप लग रहे हैं कि फ्रांस ने 2002 में किसी मुद्दे पर रिश्वत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद कराची में बम हमला हुआ और जिसमें 11 फ्रांसीसी इंजीनियरों की मौत हो गई.

सारकोजी पर इस मामले में लगातार अंगुलियां उठ रही हैं. ऐसे ही एक सवाल पर खीजते हुए सारकोजी ने एक पत्रकार की ओर इशारा करते हुए कहा, "आपके बारे में मेरे पास कोई सबूत नहीं है. लेकिन आप शायद बच्चों का यौन शोषण करते हैं. मुझे किसने कहा. किसी ने नहीं, पर मुझे पूरा विश्वास है. अब आप अपनी सफाई दें."

पाकिस्तान का 1995 में फ्रांस के साथ एक बड़ा सैनिक करार हुआ था, जिसमें पनडुब्बियों सहित कई तरह के हथियारों का सौदा होना था. लेकिन फ्रांस ने बाद में इस करार को तोड़ दिया और इसमें घोटाले और कमीशन की बू भी आने लगी. फ्रांस के पूर्व रक्षा मंत्री चार्ल्स मिलोन ने कुछ दिनों पहले इस बात का खुलासा किया कि डील रद्द होने के बाद ही 2002 में कराची में बम हमला किया गया, जिसमें 11 फ्रांसीसी नागरिकों की मौत हो गई.

शुरू में कट्टरपंथियों पर हमले का इलजाम लगा लेकिन बाद में जांच करने पर 2008 में कुछ जानकारियां सामने आईं, जिसके आधार पर कहा जा रहा है कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ज्यां शिराक ने जो डील रद्द की थी, उसी के बाद हमला हुआ. जिस वक्त डील हुआ, सारकोजी फ्रांस के बजट मंत्री थे और कमीशन देने के लिए एक जटिल प्रक्रिया तैयार की गई थी, जिसके मुताबिक लक्जमबर्ग के जरिए पैसा पहुंचाया जाना था.

मिलोन ने बताया है कि शिराक ने कुछ पैसों की अदायगी रोकने के लिए कहा था. बताया जाता है कि रिश्वत और कमीशन की रकम करीब साढ़े आठ करोड़ यूरो थी, जिसे मार्केटिंग के मद में दिखाया गया. हथियारों का कुल सौदा करीब 85 करोड़ यूरो का था.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः उज्ज्वल भट्टाचार्य

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