करने होंगे बड़े त्यागः नेतान्याहू | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 02.09.2010
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जर्मन चुनाव

करने होंगे बड़े त्यागः नेतान्याहू

फलीस्तीन के साथ सीधी बातचीत बहाल करने से पहले इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतान्याहू ने कहा है कि दोनों पक्षों को बड़े त्याग करने होंगे. अमेरिकी विदेश विभाग में 20 महीने में पहली बार दोनों पक्ष आमने सामने.

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इस्राएल और फलीस्तीन के नेताओं के बीच होने वाली इस सीधी बातचीत को एशिया से लेकर यूरोप तक के राजनयिक अहम मान रहे हैं. लेकिन हमेशा की तरह खुद फलीस्तीन एकमत नहीं हैं. चरमपंथी गुट हमास का कहना है कि वह पश्चिम के समर्थन वाले फलीस्तीन प्राधिकरण के नेता महमूद अब्बास और इस्राएल प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतान्याहू की मुलाकात को खारिज करता है, क्योंकि उसे इसमें शामिल नहीं किया गया. इसीलिए उसने पश्चिमी तट पर रॉकेट हमला किया है जिसमें चार इस्राइलियों समेत छह लोग मारे गए हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की मेजबानी में जब अब्बास और नेतान्याहू आमने सामने होंगे, तो चर्चा इस हमले की भी होगी. यह बैठक अमेरिकी विदेश विभाग में होगी. बातचीत से पहले क्लिंटन ने कहा, " कामयाबी के लिए संयम, बातचीत जारी रखना और नेतृत्व की जरूरत होगी. इस बातचीत की असल परीक्षा न तो पहला दिन होगी और न ही आखिरी दिन. ये उस समाधान की दिशा में लगने वाले बहुत से दिनों में शामिल हैं, जो छिपा है."

जर्मन विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले ने दोनों पक्षों से अपील की है कि ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें बातचीत का कोई ठोस नतीजा निकले. वहीं ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हॉग भी मध्यपूर्व में शांति के लिए हर संभव योगदान देने को तैयार है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी कैथरीन एश्टन ने बातचीत बहाल करने के लिए अब्बास और नेतान्याहू की सराहना की है. चौतरफा उम्मीदों के दबाव के बीच नेतान्याहू ने कहा है कि बातचीत को सफल बनाने के लिए बड़े फैसले करने होंगे. वह कहते हैं, "स्थायी शांति तभी कायम हो सकेगी, जब दोनों पक्ष बड़े तैयार करने को तैयार होंगे. इस्राएल को भी, फलीस्तीन को भी."

मध्यपूर्व शांति वार्ता को अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा अपनी अहम प्राथमिकताओं में एक मानते हैं. इस्राएल और फलीस्तीन, दोनों को ही उन्होंने इस बात का अहसास भी दिलाया है. उन्होंने कहा,

"मैंने उन्हें बताया कि यह मौका फिर नहीं आएगा. उन्हें इस मौके को किसी भी कीमत पर नहीं गंवाना चाहिए. अब साहसी नेताओं की बारी है कि वे शांति के लिए बड़ा कदम उठाएं, जिसकी हकदार उनकी जनता है."

दशकों से खिंचती चली आ रही मध्यपूर्व समस्या के समाधान की उम्मीद, एक बैठक से लगाना तो ज्यादती है, लेकिन अगर उस दिशा में एक कदम भी मौजूदा बैठक के दौरान उठा लिया गया तो बहुत ही बड़ी बात होगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ए जमाल

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