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विज्ञान

कम नुकसान की उड़ान चुनना आपके हाथ

जलवायु परिवर्तन पर छिड़ी बहस के बीच हवाई यात्राओं को प्रदूषण का प्रमुख स्रोत माना जाता है. लेकिन आप आपने लिए टिकट खरीदते वक्त देख सकते हैं कि कौन एयरलाइन कितना नुकसान कर रही है, और आप किस पर सवार होना चाहेंगे.

'एटमॉस्फएयर' नाम की गैर सरकारी संस्था ने पर्यावरण पर असर डालने के आधार पर एयरलाइनों की तीसरी बार सूची जारी की है. संस्था के प्रमुख डीटरिष ब्रोकहागेन कहते हैं उनका मकसद लोगों को ऐसी एयरलाइन चुनने में मदद करना है जो पर्यावरण को सबसे कम नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने कहा, "रैंकिग में हम निजी और व्यावसायिक दोनो तरह की उड़ानों को शामिल करते हैं."

एटमॉस्फएयर की वेबसाइट पर एक ऐसा टूल भी है जिससे लोग किसी फ्लाइट से हुए उत्सर्जन का अंदाजा लगा सकते हैं. उसके बाद अपनी मर्जी से अगर इसके खामियाजे के रूप में हर्जाना देना चाहें तो वो भी दे सकते हैं. असल मकसद है पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति लोगों को जिम्मेदारी का एहसास कराना.

इस सूची में सबसे ऊपर है ट्यूनीशएयर एक्सप्रेस. इस एयरलाइन के रूट ट्यूनीशिया, माल्टा, इटली और लीबिया के बीच हैं, और इसके पास उड़ान भरने वाले सिर्फ चार हवाई जहाज हैं. एटमॉस्फएयर की सूची में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ट्यूनीसएयर एक्सप्रेस में उड़ान भरना सबसे अच्छा माना गया है.

कुछ जर्मन एयरलाइनें भी सूची में ऊपर हैं. टुईफ्लाय और कोंडोर दूसरे और छठे स्थान पर हैं जबकि बर्लिन एयरलाइन 12वें स्थान पर है. हालांकि जर्मनी की सबसे बड़ी एयरलाइन लुफ्थांसा को 67वें स्थान पर पाया गया है. लुफ्थांसा की प्रवक्ता सांड्रा क्राफ्ट कहती हैं, "मेरे विचार से इस रिसर्च में सेब और संतरों के बीच तुलना की गई है." वह मानती हैं कि टुईफ्लाय और कोंडोर जैसे चार्टर जहाजों की तुलना लुफ्थांसा जैसी व्यावसायिक एयरलाइन से नहीं की जा सकती.

छोटे जहाजों को इसलिए भी पर्यावरण के लिए कम नुकसानदेह माना गया है क्योंकि वे आमतौर पर भरे होते हैं. यानि प्रति व्यक्ति होने वाला प्रदूषण कम होता है जबकि बड़े जहाज कई बार काफी खाली होते हैं और कम यात्रियों को ले जाने के लिए ज्यादा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होते हैं. इसके अलावा, चार्टर जहाजों में सीटों के बीच जगह कम होती है. बिजनेस क्लास के मुकाबले इनमें आराम तो उतना नहीं होता लेकिन ऐसे में उतने ही बड़े जहाज में ज्यादा यात्री सवार होते हैं. इससे भी एयरलाइन की क्लाइमेट रेटिंग बेहतर होती है. ब्रोकहागेन नहीं मानते कि चार्टर जहाजों की तुलना व्यावसायिक जहाजों से करना गलत है. उन्होंने कहा, "हमारे लिए ज्यादा जरूरी यह है कि उपभोक्ता क्या खाना चाहता है. वह सेब खाना चाहता है या संतरा यह वह तय करेगा." उपभोक्ताओं के सामने दोनो ही विकल्प होने चाहिए, फिर यह उन्हें तय करने देना चाहिए कि वे क्या चुनना चाहेंगे.

इंजन क्षमता पर निर्भरता

उड़ान भरने वाले जहाज के इंजन की क्षमता कैसी है, यह भी बहुत अहम है. कारों की ही तरह हवाई जहाजों में भी ऐसे मॉडल होते हैं जो कम या ज्यादा ईंधन की खपत पर निर्भर करते हैं. लुफ्थांसा की प्रवक्ता क्राफ्ट ने बताया कि पिछले दो सालों में लुफ्थांसा ने अपनी उड़ान को पर्यावरण सुरक्षा के अनुसार ढाला है. उन्होंने कहा कि एटमॉस्फएयर ने जिस डाटा के आधार पर यह रैंकिंग दी है वह 2011 का है. छोटी उड़ानों का पर्यावरण पर ज्यादा असर पड़ता है क्योंकि जिस समय जहाज उड़ान भरता है उस समय इंजन को उठाने के लिए ज्यादा ईंधन जलता है.

डिस्काउंट का प्रभाव

इस सर्वे के दौरान उन एयरलाइनों को अलग श्रेणी में रखा गया जो बहुत सारे डिस्काउंट या टिकट दरों में कमी देती हैं. ब्रोकहागेन कहते हैं कि ज्यादा सस्ती टिकटों के कारण उनकी बाजार में मांग भढ़ती है जिससे वायु यातायात भी होता है. जबकि डिस्काउंट ना देने पर ट्रैफिक उतना नहीं होता. वे लोग जो पर्यावरण सुरक्षा में हाथ बंटाना चाहते हैं उन्हें अपने आराम में थोड़ी कटौती करनी होगी. जब जहाज पूरी तरह भरा होगा तभी उड़ान पर्यावरण के लिए बेहतर कहलाएगी.

रिपोर्ट: मार्कस लुएटिके/ एसएफ

संपादन: एन रंजन

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