1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मंथन

कमाल का गाइया

पहली बार एक ऐसा अंतरिक्ष यान आसमान में भेजा गया है, जिससे अब आकाशगंगा नापी जा सकेगी और इसका त्रिआयामी नक्शा बनाया जा सकेगा.

हमारे सौरमंडल का घर है आकाशगंगा. ये आकाशगंगा यानी मिल्कीवे अंतरिक्ष के कई तारासमूहों का एक हिस्सा है. 13 अरब साल पुरानी हमारी आकाशगंगा के कई रहस्य ऐसे हैं जो अभी भी हमें पता नहीं हैं. वैज्ञानिक और शोधकर्ता लगातार इनका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. इन रहस्यों का पता लगाने के लिए गाइया नाम का अंतरिक्ष यान आकाशगंगा का 3डी चित्र बनाने में मदद करेगा. इसके लिए सैटेलाइट को एक अरब तारों का निरीक्षण करना होगा.

गाइया अंतरिक्ष यान से हमारी आकाशगंगा के निर्माण और विकास के बारे में जानकारी हासिल की जाएगी. पोट्सडाम के रिसर्चर इसके रहस्य खोलने की कोशिश करेंगे. शोधकर्ता डॉक्टर रोएलेफ डे योंग बताते हैं, "आकाशगंगा अपने गुरुत्वाकर्षण से बंधी है. जिन तारों को हम देखते हैं उनके गुरुत्वाकर्षण को मापा जा सकते है. तब हमें पता चलता है कि सिर्फ द्रव्यमान आकाशगंगा को बांध कर रखने के लिए काफी नहीं. वहां जरूर कुछ और होगा, जिसे हम डार्कमैटर कहते हैं. लेकिन इसके गुण क्या हैं, वह हमारी आकाशगंगा में कैसे फैला है, हमें ठीक से नहीं पता."

दिसंबर 2013 में यह टेलिस्कोप अंतरिक्ष में भेजा गया. यूरोपीय स्पेस एजेंसी ईएसए ने इसकी जानकारी दी. ईएसए की वेबसाइट के मुताबिक गाइया जनवरी में धरती के ऊपर उस कक्षा में पहुंच गया है, जहां से वह अपना काम शुरू करेगा. अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण जहां स्थिर होता है, ऐसे एक वर्चुअल प्वाइंट एल2 पर गाइया पहुंच गया है. यह धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर है. गाइया के प्रोजेक्ट मैनेजर गिउसेपे सार्री ने ईएसए की वेबसाइट पर लिखा है, दिसंबर में "कोरु से बढ़िया प्रक्षेपण के बाद, हम अपने लक्ष्य पर पहुंच कर बहुत खुश हैं. अब आने वाले दिनों में हम वैज्ञानिक प्रयोगों के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं."

खगोलविज्ञानियों को उम्मीद है कि गाइया में लगे हजार मैगा पिक्सल के कैमेरा से हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रह भी खोजे जा सकेंगे. उन्हें पांच साल के दौरान 50 हजार बाहरी प्लानेट मिलने की उम्मीद है.

कैसे बना गाइया

गाइया तैयार करने में 20 साल से ज्यादा का वक्त लगा है. इस सैटेलाइट में अलग अलग दिशा में दो टेलिस्कोप हैं. इसके लिए एक मीटर चौड़ा कैमरा चिप लगाया गया है. एक सौरछतरी इन उपकरणों को गर्मी और विकिरण से बचाएगी. इसकी सुरक्षा जरूरी है. इतनी कि सैटेलाइट एक हजार किलोमीटर दूर से महीन बाल तक को पहचान ले. तारों की स्थिति, उनकी गति और दो तारों की दूरी जानने के लिए यह बारीकी जरूरी है. इससे प्रकाशवर्ण यानी स्पेक्ट्रम भी बन सकेंगे. डॉक्टर योंग के मुताबिक, "फिलहाल तो हमने जो सीखा है, वह अद्भुत है. हम कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. मेरा मतलब हमारी तकनीक इतनी तेजी से बढ़ रही है कि हमें बहुत से आंकड़े मिल रहे हैं. गाइया शानदार मिसाल है. इससे हमें बहुत डेटा मिल रहा है. समझ नहीं आ रहा कि शुरू कहां से करें. यह शानदार है."

राज का पर्दाफाश

गाइया आकाशगंगा के सरहदी तारों को भी देखेगा. खगोल विज्ञानियों की इनमें खास रुचि है. अब तक ऐसा माना जाता रहा है कि गैलेक्सी की बाहरी सीमा के तारे छोटी आकाशगंगाओं में पैदा हुए थे लेकिन हमारी आकाशगंगा ने उन्हें खींच लिया. गाइया यह भी बता सकेगा कि आकाशगंगा ने कितने तारे निगले हैं और ये तारे कहां से आए. इतना ही नहीं, यह डार्क मैटर के बारे में भी बताएगा, "अगर हमारे पास गाइया हो तो हम दूर के तारों की गतिविधि माप सकते हैं, हम पता कर सकते हैं कि ये तारे कितनी तेजी से आगे जा रहे हैं और इन्हें बांधे रखने के लिए कितना द्रव्यमान चाहिए. ये अभी भी आकाशगंगा में हैं इसलिए काफी द्रव्यमान होगा. और इसी से पता चलेगा कि वहां कितना डार्क मैटर होगा." पहले आठ साल में आकाशगंगा का 3डी नक्शा बनेगा. उसके बाद डार्क मैटर की गुत्थी सुलझाने की कोशिश होगी.

कैसे करेगा काम

इएसए की वेबसाइट के मुताबिक गाइया बार बार आकाशगंगा को स्कैन करेगा. ऐसा करने से वह पांच साल में आकाशगंगा में मौजूद एक अरब तारों को एक एक करके करीब 70 बार स्कैन करेगा. इसके अलावा उसकी गति स्थिति, फिजिकल प्रॉपर्टी, चमक, तापमान और रासायनिक संरचना का भी वह पता लगाएगा.

ये करने के लिए गाइया धीरे धीरे घूमेगा, जिससे दो टेलिस्कोप पूरे आसमान को देख सकेंगे और अलग अलग एरिया से अपने इकलौते डिजिटल कैमेरा पर फोकस करेंगे. लेकिन इससे पहले कैमेरा को सही तरीके से फोकस करना जरूरी है. इसके लिए कुछ महीने लगेंगे. गाइया का फाइनल कैटेलॉग पांच साल पूरा होने के तीन साल बाद यानी आठ साल में प्रकाशित किया जाएगा. बीच बीच में थोड़ा डेटा दिया जाएगा. हालांकि सुपरनोवा जैसे तेजी से बदलते ऑब्जेक्ट अगर देखे गए तो डेटा प्रोसेसिंग के कुछ ही घंटे में चेतावनी जारी की जाएगी.

आखिर में गाइया का डेटा आर्काइव 10 लाख गीगाबाइट हो जाएगा, यानी दो लाख डीवीडी के डेटा के बराबर. इस डेटा का विश्लेषण यूरोप के 400 अलग अलग संस्थानों के विशेषज्ञ करेंगे.

रिपोर्टः आभा मोंढे

संपादनः ईशा भाटिया

DW.COM