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दुनिया

कमजोर है यूरोप की सुरक्षा संरचना

ब्रसेल्स में हुए हमलों के बाद यूरोप में सुरक्षा की कमजोरियां सामने आ रही हैं. सुरक्षा विशेषज्ञ गीडो श्टाइनबर्ग का कहना है कि कमजोर सुरक्षा संरचना और जिहादियों के बड़े जमावड़े ने ब्रसेल्स को आतंकवाद का लक्ष्य बना दिया.

डॉयचे वेले: क्या आप समझते हैं कि सालेह अब्देससलाम की गिरफ्तारी और ब्रसेल्स में आतंकी हमलों के बीच कोई संबंध है?

गीडो श्टाइनबर्ग: यह संभव है कि गिरफ्तारी ने हमले को अंजाम देने की योजना को तेज कर दिया. लेकिन इस तरह के हमलों को अंजाम देने के लिए ज्यादा तैयारी की जरूरत होती है. बम बनाने के लिए, हमले के लक्ष्यों पर नजर रखने के लिए और हमलावरों को तैयार करने में समय लगता है. इसलिए मेरा पूरा विश्वास है कि इन हमलों की योजना गिरफ्तारी से बहुत पहले से बनाई गई थी.

क्या ब्रसेल्स में खासकर गिरफ्तारी के बाद हमलों की संभावना के बारे में सोचा जाना चाहिए था?

ब्रसेल्स के अधिकारियों ने खतरे को भांपा था. यह संभावना पहले से ही थी कि सालेह अब्देससलाम और हमलों की योजना बना रहा था. और जैसा कि लग रहा है कम से कम एक प्रशिक्षित बम बनाने वाला भागा हुआ है. ये बात ब्रसेल्स के अधिकारियों को पता थी, इसलिए संभावना थी कि कुछ होगा. समस्या ये है कि ब्रसेल्स जैसे शहर में हमले के इतने ठिकाने हैं कि सुरक्षा के कदम कभी पर्याप्त नहीं हो सकते.

25.04.2013 DW Quadriga Studiogast Guido Steinberg

गीडो श्टाइनबर्ग

पेरिस हमले के बाद से बेल्जियम में भी जांच का काम पूरी गति से हो रहा था. तो क्या हमें मानना चाहिए कि आतंकवादियों का नेटवर्क उससे कहीं अधिक बड़ा है, जितना हम अब तक समझते रहे हैं?

नेटवर्क उससे कहीं बड़ा है जो नवंबर में लग रहा था जब पेरिस में हमला हुआ था. यह पता था कि पेरिस के हमलावरों के आसपास ऐसे लोग हैं जिन्होंने हमलावरों को ट्रांसपोर्ट और तैयारी में मदद दी थी. इसलिए ऐसा लगता है कि हमारा और बहुत ज्यादा लोगों से लेना देना है. खास चिंता की बात ये है कि हमें ये बात नहीं है कि ऐसे लोगों का ग्रुप कितना बड़ा है, जो इस तरह के हमले करने के लिए तैयार हैं. और सबसे बड़ी समस्या ये है कि उनमें कम से कम एक इंसान है जिसे बम बनाने की जानकारी है. ये संभवतः ऐसा इंसान है जिसे सीरिया में प्रशिक्षण मिला है.

तो आप समझते हैं कि निकट भविष्य में ऐसे और हमले हो सकते हैं?

मुझे पूरा यकीन है कि खतरा मौजूद है. आज मेरी पहली सोच ये थी कि ये हमला पेरिस के हमले से बहुत छोटा है, लेकिन मरने वालों की बढ़ती संख्या के बाद इस सोच को बनाए रखना मुश्किल है. ये बहुत ही अच्छी तरह से नियोजित और संगठित हमला है. जब तक बम बनाने और हथियारबंद संघर्ष के अनुभव वाले लोग छुट्टा घूम रहे हैं, खतरा गंभीर है. और वह सिर्फ ब्रसेल्स में ही नहीं बल्कि हर कहीं है जहां आप ब्रसेल्स से भागकर जा सकते हैं.

तो क्या बेल्जियम के सुरक्षा अधिकारी इस बड़े आकार के आतंकवादी नेटवर्क का सामना करने की हालत में हैं?

नहीं, निश्चित तौर पर नहीं. इसके बावजूद बेल्जियम पर आरोप लगाना मुश्किल है क्योंकि सीरिया जाने वाले, वहां प्रशिक्षण पाने वाले, और वहां से लौटकर आने वाले जिहादियों की संख्या बहुत बड़ी है, कुल तादाद में और देश की आबादी के अनुपात में. ये ऐसी समस्या है जो सिर्फ बेल्जियम की नहीं है बल्कि कमजोर सुरक्षा संरचना वाले दूसरे यूरोपीय देशों की भी. आने वाले सालों में जरूरी होगा कि कुछ देश अपनी सुरक्षा संरचना को बेहतर बनाएं. यह बात बेल्जियम, डेनमार्क और ऑस्ट्रिया के लिए भी लागू होती है. लेकिन यदि आप देखें कि अनुभवी सुरक्षा संरचना के बावजूद फ्रांस की समस्या कितनी बड़ी है, तो बेल्जियम के सुरक्षा अधिकारियों की समस्या अलग नजर आती है.

Frankreich Flughafen Charles de Gaulle in Paris verstärkte Sicherheitsmaßnahmen

हवाई अड्डों पर सुरक्षा

अब कौन से कदम उठाए जा सकते हैं ताकि यूरोपीय सुरक्षा अधिकारियों के बीच निकट सहयोग और सूचनाओं के नजदीकी आदान प्रदान की गारंटी हो सके?

13 नवंबर को पेरिस में हुए हमले के बाद से हमें पता है कि सुरक्षा अधिकारियों के बीच सूचना का आदान प्रदान अबाध गति से नहीं हो रहा है. हालांकि 2001 में सुरक्षा बलों के बीच सहयोग और डाटा के आदान प्रदान को अत्यंत गहन बनाया गया था. यहां कुछ और प्रयास किया जाना चाहिए. इससे भी बड़ी समस्या है सुरक्षा दफ्तरों की प्रभावशीलता. इस मामले में बेल्जियम फ्रांस से कमजोर है. ये ऐसी चेतावनी है जिसे जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देशों को समय रहते ध्यान देना चाहिए.

इसका मतलब है कि दूसरे यूरोपीय शहर भी आतंकवाद के खतरे की जद में हैं?

निश्चित तौर पर उस पैमाने पर नहीं जिस पैमाने पर ब्रसेल्स में हुआ. सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है, राजनीति दिशाविहीन है और जिहादी ग्रुप बड़ा है. ये मिश्रण और कहीं नहीं है. लेकिन दूसरी जगहों पर भी जिहादी ग्रुप बढ़ रहे हैं. यह आने वाले सालों में बहुत से देशों के लिए समस्या बनेगा, सिर्फ बेल्जियम के लिए ही नहीं.

सुरक्षा अधिकारी आपस में कितना ही सहयोग करें, कमजोर लक्ष्यों की रक्षा करना, उन्हें सुरक्षा देना कठिन होगा?

स्वाभाविक रूप से आधुनिक पश्चिमी महानगरों में सभी कमजोर लक्ष्यों की सुरक्षा करना संभव नहीं होगा. हालांकि हवाई अड्डे पर आप लगेज को गेट पर भी कंट्रोल कर सकते हैं. हर कोई जो मध्यपूर्व के देशों में गया है उसे पता है कि यह संभव है. लेकिन यह सुरक्षा की गारंटी भी नहीं है. अब सबसे महत्वपूर्ण बात ये होगी कि अपराधी को समय रहते पहचाना जाए और सारी कानूनी बाधाओं के बावजूद उसकी प्रभावी निगरानी हो. इस मामले में यूरोपीय अधिकारी पिछले सालों में पूरी तरह नाकाम रहे हैं. हजारों यूरोपीय सीरिया गए, वहां प्रशिक्षण पाया और कुछ हद तक गुपचुप वापस यूरोप लौट रहे हैं. समय रहते जानकारी देने में सक्षम प्रभावी खुफिया एजेंसी के बिना हम इस समस्या पर काबू नहीं पा सकते.

गीडो श्टाइनबर्ग अंतरराष्ट्रीय राजनीति संस्थान एसडब्ल्यूपी बर्लिन में आतंकवाद विशेषज्ञ हैं. वे 2002 से 2005 तक चांसलर कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विभाग के प्रभारी थे.

इंटरव्यू: डायाना होदाली

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