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जर्मन चुनाव

"कमजोर नहीं हैं मनमोहन सिंह"

प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज पचौरी ने कहा है मीडिया मनमोहन सिंह की गलत छवि बना रहा है. प्रधानमंत्री के बारे में हाल में सामने आई दो किताबों से हुए विवादों के चलते पचौरी उनके बचाव में आए हैं.

पचौरी ने पिछले दस साल के विकास को दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री कमजोर होते तो आर्थिक आंकड़े इतने मजबूत ना होते. मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने हाल ही में एक किताब लिखी है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को कमजोर और लाचार बताया है. प्रेस कॉन्फरेंस के दौरान पंकज पचौरी ने इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. लेकिन उन्होंने कहा कि उनके सामने भी किताब लिखने की पेशकश आई थी, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह पेशकश किसने की.

प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी होने वाले किसी भी प्रेस बयान में प्रधानंमत्री की पूर्व मंजूरी होनी जरूरी है. इस बात पर जोर देते हुए पचौरी ने कहा कि बारू की किताब पर पीएमओ दो बार अपनी प्रतिक्रिया दे चुका है, "उनके परिवार और कांग्रेस पार्टी ने भी व्यापक प्रतिक्रिया जाहिर कर दी है."

मीडिया ने बनाई छवि

पचौरी ने किताब में किए गए दावों पर कोई सीधी प्रतिक्रिया तो नहीं की लेकिन उन दावों को आंकड़ों के हवाले से गलत साबित करने में भी कोई कसर नहीं रखी. मीडिया सलाहकार के तौर पर उन्होंने इस बात पर अफसोस भी जाहिर किया कि आज के मीडिया की प्राथमिकताएं विकास न होकर मनोरंजन, राजनीति और खेल ज्यादा हो गई हैं.

अपनी बात के तर्क में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपने हर भाषण में 90 प्रतिशत बातें विकास के बारे में करते रहे हैं, जबकि मीडिया का विकास से सरोकार महज दो प्रतिशत ही रहा. उन्होंने माना कि गठबंधन का दूसरा कार्यकाल पहले के मुकाबले कम सफल साबित हुआ लेकिन उन्होंने इसका कारण विश्व आर्थिक मंदी को बताया. उन्होंने इन धारणाओं को भी गलत बताया कि प्रधानमंत्री ने 2जी और कोयला घोटाले जैसे भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2जी मामले में तैंतीस प्रेस विज्ञप्तियां जारी की और कोयला घोटाले को लेकर भी पिछले साल अक्टूबर में ही विस्तार से बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले दस सालों में कई भाषण दिए हैं लेकिन मीडिया की कभी उनमें रुचि ही नहीं रही.

आईबी/एएम (वार्ता)

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