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विज्ञान

कभी नहीं खो सकता अजगर

बर्मा में पाए जाने वाले अजगरों में एक खास तरह का कम्पास या दिशासूचक काम करता है. कई किलोमीटर दूर से भी एक सीधी राह पर चलकर उनके अपने घर पहुंचने की क्षमता वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रही है.

पांच मीटर या करीब 16 फीट तक लंबे बर्मा के अजगर दुनिया के कुछ सबसे बड़े सांपों में से एक हैं. मूल रूप से दक्षिण और दक्षिणपूर्वी एशिया के निवासी ये अजगर, विश्व के कई देशों में ले जाकर रखे गए हैं. अमेरिका के दक्षिण फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स नेशनल पार्क में भी इन्हें रखा गया है. अपने नए वातावरण में इन जीवों ने खुद को बहुत अच्छे से ढाल लिया है. और तो और अब बर्मा के यह अजगर नेशनल पार्क में इतने रच बस गए है कि पार्क के बाकी जानवरों को शिकार बनाने से भी नहीं चूकते.

इसी नेशनल पार्क में वैज्ञानिकों ने छह अजगरों को पकड़ा और बंद प्लास्टिक के बर्तनों में रख कर पार्क से बाहर ले गए. वे अजगरों को पार्क से करीब 21 से 36 किलोमीटर की दूरी पर ले गए और उन्हें वहां छोड़ दिया. रिसर्चरों ने अजगर के शरीर में रेडियो ट्रैकर लगा दिए और उनकी हरकतों का पीछा करते हुए जीपीएस के आंकड़े इकट्ठे किए. एक छोटे हवाई उपकरण से अजगरों के चलने की दिशा और गति भी नापी गई.

वैज्ञानिकों ने पाया कि सभी अजगरों ने बर्तननुमा डब्बों से निकलते ही खुद ही पार्क की दिशा में बढ़ना शुरु कर दिया जहां वे रहते आए थे. कुल छह में से पांच अजगर बिल्कुल सही दिशा में बढ़ते हुए इतनी लंबी दूरी तय करके पार्क के पांच किलोमीटर पास तक पहुंच गए. अजगरों की इतनी सटीक दिशा की समझ ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया. उनका मानना है कि इन सांपों के शरीर के अंदर ही कोई कम्पास जैसी चीज होती है जिससे उन्हें दिशा का ज्ञान होता है.

वापस पार्क तक पहुंचने के लिए अजगरों ने 94 दिन से लेकर करीब 296 दिनों तक यात्रा की. रॉयल सोसाइटी जरनल बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि इतने दिनों तक लगातार किसी एक जगह की ओर बढ़ना "घर लौटने की दृढ़इच्छा" दिखाता है. स्टडी में कहा गया है कि "इससे सबूत मिलता है कि बर्मा के अजगरों के पास दिशानिर्देशक नक्शे और कम्पास जैसे किसी यंत्र की क्षमता है". दिशाओं की इतनी सटीक समझ सांप की किसी और प्रजाति में नहीं दिखाई देती है.

नेविगेशन की इस क्षमता से यह भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इन अजगरों में अपने घर और जानी पहचानी जगह के प्रति बहुत गहरा लगाव होता है. इससे यह भी पता चलता है कि संख्या में घटती जा रही अजगरों की इस प्रजाति को बचाने के लिए सही ठिकानों की पहचान कितनी जरूरी है. बर्मा का यह विशाल लेकिन शांत प्राणी चिड़िया, हिरन से लेकर मगरमच्छ तक को पूरा निगल जाता है.

आरआर/एएम (एएफपी)