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दुनिया

कब सुपरपावर बनेगा भारत?

भारत को दुनिया भर में परमाणु शक्ति और उभरती हुई आर्थिक ताकत के रूप में देखा जाता है. ऐसा भी माना जाता है कि आने वाले वक्त में भारत सुपरपावर कहलाएगा. भविष्य की राह पर चलता भारत कहां तक पहुंचा है.

आजादी के बाद लंबे समय तक आस पास के मुल्क ही भारत की विदेश नीति का केंद्र रहे. शीत युद्ध के दौरान भी भारत ने गुटनिरपेक्ष रहना ही चुना. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू 1961 में शुरू हुए गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में थे. उस समय माना जा रहा था कि दुनिया के दो तिहाई देश इस आंदोलन से जुड़ जाएंगे.

रूस की ओर झुकाव

लेकिन इस नीति के बावजूद भारत सोवियत संघ से हथियार मंगाता रहा. रूस के साथ आज भी भारत के अच्छे संबंध हैं. जर्मनी की ड्यूसबुर्ग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेर्बेर्ट वुल्फ का कहना है कि आज भी भारत अपनी विदेश नीति को ले कर साफ छवि नहीं बना पाया है. डॉयचे वेले से बातचीत में उन्होंने कहा, "भारत अपनी विदेश नीति से एक छाप छोड़ने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन अभी तो यही समझ में नहीं आ रहा कि राजनीति के केंद्र में क्या है."

BRIC BRICS Gipfel Südafrika

2009 से ब्राजील, रूस, भारत और चीन मिल कर ब्रिक देशों के नाम से साथ काम करने लगे.

1990 के दशक में भारत ने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' अपनाई जिसके तहत थाइलैंड, मलेशिया और वियतनाम जैसे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाने पर काम शुरू किया गया. लेकिन हाल के आर्थिक संकट के कारण एक बार फिर भारत का ध्यान बंट गया. अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की तरह भारत से उम्मीद की जाने लगी कि वह दुनिया को आर्थिक संकट से उबार लेगा. इसी के चलते 2009 से ब्राजील, रूस, भारत और चीन मिल कर ब्रिक देशों के नाम से साथ काम करने लगे. बाद में दक्षिण अफ्रीका भी इसमें शामिल हो गया.

अमेरिका से नजदीकी

भले ही भारत का झुकाव हमेशा रूस की ओर रहा हो, लेकिन धीरे धीरे वह अमेरिका के करीब आने लगा. 2008 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद बराक ओबामा ने सबसे पहले जिस विदेशी राष्ट्राध्यक्ष से व्हाइट हाउस में मुलाकात की, वह भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे. अमेरिका के साथ भारत के संबंध उससे पहले से ही सुधरने लगे थे. 2005 में दोनों देशों ने नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके बाद से भारत को दुनिया भर में परमाणु शक्ति के तौर पर देखा जाने लगा.

Indonesien ASEAN Barack Obama und Manmohan Singh auf Bali

बराक ओबामा ने सबसे पहले जिस विदेशी राष्ट्राध्यक्ष से व्हाइट हाउस में मुलाकात की, वह भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे.

चीन से भारत के संबंधों की अगर बात करें तो प्रोफेसर वुल्फ उसे कुछ ऐसे समझाते हैं, "इसे तीन सी से समझा जा सकता है: कंफ्लिक्ट, कंपीटीशन और कोऑपरेशन."

भविष्य की राह

साल दर साल आर्थिक विकास कर भारत ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा. करीब 10 फीसदी के जीडीपी के साथ भारत ने सबको अचंभे में डाल दिया. लेकिन पिछले कुछ वक्त से महंगाई ने भारत की हालत खराब कर रखी है. पर विश्व के एक अस्थिर आर्थिक माहौल में भारत एक स्थिर जगह बनाने की कोशिश में लगा है. 1.2 अरब की आबादी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. एक तरफ वह गरीबी से जूझ रहा है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी जगह बनाने के लिए लड़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ वह अपनी पुरानी नीतियों में भी उलझा है. ईरान इसका एक उदाहरण है. दुनिया भर के देशों ने भले ही ईरान पर कई तरह की रोक लगा दी हो, लेकिन भारत आज भी वहां से तेल मंगा रहा है.

भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक का मानना है कि केवल नीतियां बनाने से ही कुछ नहीं होगा, बल्कि भारत को व्यावहारिकता भी दिखानी होगी, "अगर अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन जैसा शख्स यह कहता है कि भारत दुनिया में एक अहम भूमिका निभाता है तो इसका मतलब हुआ कि भारत अपनी पहचान बनाने लगा है." पर साथ ही वह यह भी कहते हैं कि अभी पूरी पहचान बनाने में भारत को पांच साल लगेंगे या 10, यह कहना तो मुश्किल है.

रिपोर्ट: प्रिया एसेलबॉर्न/ आईबी

संपादन: अनवर जे अशरफ

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