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दुनिया

कब मिलेगा फ्रैंको के पीड़ितों को इंसाफ

स्पेन में फ्रांसिस्को फ्रैंको के शासन के समय अत्याचार के शिकार लोग अब भी इंसाफ के इंतजार में है. कुछ लोग चाहते हैं कि फ्रैंको के शासन के दौरान किए अपराधों का हिसाब किताब हो.

जून 1970, प्रतिबंधित कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के सदस्य स्पेन के 22 साल के राऊल हेरेरो मैड्रिड के हॉस्टल में सोए हुए थे, तभी रात के करीब 1.30 बजे दरवाजे की घंटी बजती है. हेरेरो बताते हैं, "करीब दर्जन भर पुलिसवाले हमारे कमरों में दाखिल हो गए." मानव अधिकार उल्लंघन के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे दर्जन भर स्पेनवासियों में हेरेरो भी हैं. 1939-75 के बीच तानाशाह रहे फ्रांसिस्को फ्रैंको पर मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोप है.

Francisco Franco

तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रैंको

हेरेरो बताते हैं, "उन लोगों ने हम पर बंदूकें तान दी." पुलिस ने हॉस्टल से कम्युनिस्ट प्रचार सामग्री बरामद की. जिसके बाद हेरेरो को सुरक्षा महानिदेशक के बैरक में ले जाया गया. हेरेरो आगे कहते हैं, "उन लोगों ने मुझसे पर्चे के बारे में पूछा, मैंने उन्हें बताया कि मुझे एक दोस्त ने दिए थे. उन लोगों ने मेरा विश्वास नहीं किया. उनमें से एक शख्स ने कहा कि वो मेरे साथ चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं."

हेरेरो को एक कुर्सी पर बिठाकर आगे की तरफ झुका दिया गया, उनके दोनों हाथों को घुटनों के पीछे बांध दिए गए. हेरेरो वह खौफनाक मंजर याद करते हैं, "मुझे वो लोग डंडे से मारने लगे. मैं लगभग बेहोश हो गया. लेकिन मैंने उन लोगों को कोई भी जानकारी नहीं दी जो वो चाहते थे."

कुछ दिन बाद हेरेरो की दर्द से हालत ये थी कि वो मुश्किल से ही चल पाते थे. हेरेरो बताते हैं कि उन्हें एक घटिया से जेल के अस्पकाल में इलाज के लिए ले जाया गया. हेरेरो को गठिया की तरह के एक रोग ने जकड़ लिया था. अस्पताल में आठ महीने और जेल में 6 महीने से ज्यादा बिताने के बाद भी हेरेरो की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें अस्थायी रूप से जेल से छोड़ दिया गया.

इंसाफ का लंबा इंतजार

हालांकि उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया बाद उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई, पर वह छिप गए और सजा से बच गए. फ्रैंको का राज 1975 में उनकी मृत्यु के साथ खत्म हो गया. 65 साल के हो चुके हेरेरो कहते हैं कि उन्हें गुस्सा है और वो इंसाफ चाहते हैं. 1936-39 के बीच स्पेन में हुए गृहयुद्ध के बाद फ्रैंको सत्ता में आए थे. फ्रैंको की मृत्यु के बाद लोकतांत्रिक स्पेन ने अतीत को भूल जाना बेहतर समझा. 1977 में फ्रैंको के सहयोगियों को माफी दे दी गई. 2008 के पहले शायद ही कोई फ्रैंको के शासन द्वारा किए अपराधों की चर्चा करता. जब न्यायाधीश बल्तसार गरजोन ने इन मामलों की जांच शुरू की तब उन्होंने अनुमान लगाया कि जेलों और लेबर कैंप्स में मार दिए गए, लापता और जिनकी स्वाभिक मौत हो गई उनकी संख्या एक लाख से ज्यादा है.

न्यायाधीश पर पुराने जख्म कुरेदने के आरोप लगे. रूढ़िवादी कानून विशेषज्ञों के दबाव के बाद उन्होंने जांच बंद कर दी. बाद में एक केस में पेशे से संबंधी दुराचार के आरोप में उन्हें पदमुक्त कर दिया गया. मैड्रिड में रहने वाले अर्जेंटीना के वकील कार्लोस स्लेपॉय कहते हैं कि गरजोन को निकाला जाना स्पेन प्रशासन की रणनीति का हिस्सा था. प्रशासन फ्रैंको के अपराधों की जांच नहीं कराना चाहता.

अर्जेंटीना भी इंसाफ के पक्ष में

स्लेपॉय और अन्य वकील हेरेरो जैसे पीड़ितों के लिए काम कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि अर्जेंटीना में हो रही जांच से न्याय मिलेगा. न्यायाधीश मारिया सरविनी दे कुबरिया की जांच अर्जेटीना के दो लोगों की शिकायत के बाद शुरु हुई थी. अर्जेंटीना के दो लोग स्पेन में हुए गृहयुद्ध के दौरान मारे गए थे. स्पेन के अभियोजकों ने इस जांच की आलोचना की है. उनकी दलील है कि फ्रैंको के अपराधों को 1977 में माफी दे दी गई थी. स्पेन ने उन दो संदिग्ध अत्याचारियों को हिरासत में नहीं लिया है जिसके खिलाफ सरवनी ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं साथ ही प्रत्यर्पण की गुजारिश भी की है.

स्पेन की सरकार उन दस्तावेजों की जांच करेगी जो ब्यूनस आयर्स से मांगे गए हैं. उसके बाद ही दो संदिग्धों के प्रत्यर्पण बारे में फैसला होगा. स्पेन की विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी सामूहिक कब्र खोदने के पक्ष में है. सोशलिस्ट पार्टी चाहती है 1977 में दी गई माफी को रद्द कर दिया जाए.

एए/एनआर (डीपीए)

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