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विज्ञान

कबूतरों की मदद से प्रदूषण की जांच

लंदन में प्रदूषण के स्तर का सही अंदाजा लगाने की जिम्मेदारी 10 कबूतरों के कंधों पर है. एक खास कार्यक्रम के तहत उन्हें विशेष डिटेक्टरों से लैस कर हवा में छोड़ा गया.

इन कबूतरों की पीठ पर लगे डिटेक्टर में जीपीएस डिवाइस फिट है. साथ ही इसमें प्रदूषण के प्रति संवेदनशील सेंसर लगे हैं जो बताएंगे कि हवा में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड और ओजोन का क्या स्तर है. इन कबूतरों को लंदन के प्रिमरोस हिल इलाके से हवा में छोड़ा गया.

फ्रांसीसी स्टार्टअप कंपनी प्लूम लैब्स के संस्थापक रोमेन लैकोम्ब ने बताया कि कबूतरों पर लगे सेंसर में जमा डाटा रिसर्चरों को मिलेगा, जिसे pigeonairpatrol.com वेबसाइट पर भी देखा जा सकता है.

असल में यह प्लूम लैब्स के एक विस्तृत रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसमें लंदन के 100 बाशिंदों पर प्रदूषण डिटेक्टर लगाकर प्रदूषण का स्तर ना सिर्फ पता लगाया जाएगा, बल्कि जानकारी आम नागरिकों तक वेबसाइट के जरिए पहुंचाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट से जुड़ने के इच्छुक लोग क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म पर 79 पाउंड से 99 पाउंड तक देकर ऐसा कर सकते हैं. एक ही दिन में 60 स्थानों के लिए लोगों ने जगह पक्की कर ली.

ब्रिटेन में वायु प्रदूषण सरकार के लिए भी बड़ा सवाल बनकर सामने खड़ा है. विपक्ष के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने संसद में प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से इस संदर्भ में कड़े सवाल किए. कॉर्बिन ने अपना पक्ष रखते हुए आंकड़े सामने रखे जिनके मुताबिक हर साल ब्रिटेन में 40 हजार लोग जान गंवाते हैं.

लेबर पार्टी के नेता ने कहा कि यह एक कड़वा सच है कि यूरोपीय कमिशन के साथ तय हुई 15 साल की समयावधि में ब्रिटेन पर्दूषण की समस्या को काबू में कर सके, इससे पहले ही करीब पांच लाख लोग प्रदूषण के कारण जान गंवा चुके होंगे. साल 2014 में लंदन में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा किसी भी यूरोपीय राजधानी से ज्यादा पाई गई.

एसएफ/आईबी (एएफपी)

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