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खेल

कप्तानी का अनोखा रिकॉर्ड बना रहे हैं धोनी

कुल मिलाकर पिछले 40 साल में भारतीय क्रिकेट कप्तान कमोबेश लोकप्रिय रहे हैं, कुछ कम कुछ ज़्यादा. और कप्तानी की सफलता का ग्राफ़ भी धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठता गया है. धोनी की अब तक की सफलता फिर भी अनोखी है.

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जीतना जानते हैं धोनी

अगर टेस्ट मैचों को देखा जाए, तो महेंद्र सिंह धोनी अब तक 16 मैचों में कप्तानी कर चुके हैं, जिनमें से 10 में भारत की जीत हुई है, दो में हार और चार मैच ड्रॉ हुए हैं, यानी लगभग 60 फ़ीसदी जीत, और सिर्फ़ साढ़े बारह फ़ीसदी हार. अगर वह इस सिलसिले को कायम रख सकें, तो किसी भी कप्तान के लिए यह रिकॉर्ड बन सकता है.

एक अस्थाई कप्तान के रूप में धोनी ने यह काम शुरू किया था. दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ श्रृंखला में भारत 0-1 से पीछे था, नियमित कप्तान कुंबले उपलब्ध नहीं थे. धोनी को कप्तानी मिली और एक मैच जीतकर भारत ने श्रृंखला को बराबर कर दिया. और शुरू हुआ धोनी का ज़माना.

एक टीम, जिसमें सचिन, गांगुली, द्रविड़ और लक्ष्मण ही नहीं, बल्कि सहवाग, हरभजन और ज़हीर जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी हों, कप्तानी आसान नहीं थी. लेकिन ड्रेसिंग रुम के माहौल को दोस्ताना बनाए रखने में वह कामयाब रहे हैं. टीम में अनुभवी और युकपवा खिलाड़ियों के बीच अच्छा सामंजस्य है, कप्तान की भूमिका पर सवाल उठाए बिना वरिष्ठ खिलाड़ी अपना अनुभव बांट रहे हैं.

धोनी का ज़माना, यानी बड़े शहरों के बदले छोटे-छोटे शहरों से आने वाले नए क्रिकेटरों का ज़माना. धोनी खुद रांची के हैं और इसी ब्रांड के दूसरे खिलाड़ियों, मसलन सुरेश रैना, प्रवीण कुमार और रवींद्र जडेजा सरीखे खिलाड़ियों को उनके दौर में आगे आने का मौका मिला है. अधिकतर मामलों में वह अपने आपको साबित भी कर सके हैं. मसलन श्रीलंका के साथ इस टेस्ट श्रृंखला में रैना.

अक्सर बैटिंग, फ़ील्डिंग और बोलिंग में से किसी न किसी विभाग में कमज़ोरी झेलते हुए धोनी को कप्तानी करनी पड़ी है. ख़ासकर पिछले समय में तेज़ गेंदबाज़ों के फार्म में कमी आई है. इसके बावजूद गेंदबाज़ी में फ़ेरबदल लाते हुए धोनी काफ़ी हद तक इसे संभाल सके हैं.

गांगुली के दौर से भारतीय कप्तानी में आत्मविश्वास की जो झलक देखने को मिली, धोनी उसे पूरी तरह कायम रखे हुए हैं. कहा जा सकता है कि गांगुली जैसा दबदबा भले ही उनमें अभी तक न हो, लेकिन चार्म में वह कुछ बीस ही पड़ते हैं.

अब तक 6 टेस्ट श्रृंखलाओं में धोनी कप्तान रहे हैं, जिनमें से चार में भारत की जीत हुई है, दो बराबर रही हैं. क्या किस्मत की बात है? कम से कम, एक मामले में किस्मत इन दिनों उनका साथ नहीं दे रही है. वे लगातार टॉस हार रहे हैं.

रिपोर्ट: उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन: वी कुमार

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