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ताना बाना

कपिल देव ने पूरी की भारतीय की अंतिम इच्छा

भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान कपिल देव ने एक भारतीय की 63 साल से अधूरी पड़ी अंतिम इच्छा को पूरा किया है. उसने 63 साल पहले ऑस्ट्रेलिया में आखिरी सांस ली और तब से उसकी अस्थियां गंगा की धारा का इंतजार करती रहीं.

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पूरी हुई कहानी

यह भावुक कहानी है पूरन सिंह नाम के एक भारतीय की. पूरन सिंह ने अपनी जिंदगी के आखिरी चार दशक ऑस्ट्रेलिया में एक घोड़ा गाडी़ पर सामान बेचते हुए बिताए. उनकी मौत 77 साल की उम्र में 1947 में हो गई. इसके बाद से उनकी अस्थियां विक्टोरिया प्रांत के वारनांबूल के एक फ्यूनरल होम में रखी रहीं. फ्यूनरल होम इस इंतजार में था कि उनके परिवार का कोई शख्स आए और इन अस्थियों को भारत ले जाए. कपिल देव इस फ्यूनरल होम में पहुंचे और इन अस्थियों को ले आए.

कपिल ने वारनांबूल के एक अख़बार को बताया कि यह एक अद्भुत कहानी है. उन्होंने कहा कि जो मैंने अब किया है वह अब तक किए सब कामों से एकदम अलग है.

उन्होंने कहा, “यह ऐसी कहानी है जिसने अनकों अनेक दिलों को छू लिया है. यही तो लोगों के बीच वह पुल है, जो बताता है कि हम एक दूसरे से प्यार कर सकते हैं. यह एक बेहतरीन भावुक कहानी है जिसका सुखद अंत हुआ.”

ऑस्ट्रेलिया में एक ब्रॉ़डकास्टर के तौर पर काम कर रहीं मनप्रीत ने बताया कि कपिल देव को जब पता चला कि पूरन सिंह की अस्थियां आज भी भारत ले जाए जाने का इंतजार कर रही हैं, तो उन्होंने खुद यह काम करने का फैसला किया. पूरन सिंह ने मरते वक्त यह इच्छा जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति से हो और उसके बाद उनकी अस्थियों को भारत ले जाकर गंगा में बहा दिया जाए.

उस वक्त मेलबर्न में ही एक ऐसी जगह थी जहां शवों को जलाए जाने की सुविधा थी. इसलिए पूरन सिंह के शव को वारनांबूल से मेलबर्न भेजा गया और फिर अस्थियों को एक प्लास्टिक सिलेंडर में डालकर वापस वारनांबूल भेज दिया गया.

तब अधिकारियों ने पूरन सिंह के गांव में सूचना भेजने की काफी कोशिशें कीं. पूरन सिंह पंजाब के बिलगा गांव के रहने वाले थे. लेकिन उनके परिवार तक संदेश नहीं भिजवाया जा सका. इसके बाद अधिकारियों ने अस्थियों को संभाल कर रख दिया कि किसी दिन उनके परिवार का कोई व्यक्ति आएगा और पूरन सिंह की अंतिम इच्छा को पूरा करेगा.

पूरन सिंह की कहानी वहीं दब गई. लेकिन हाल ही में जब ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं बढ़ीं, तब मनप्रीत ने अचानक यह कहानी कपिल देव को सुनाई. तब भारतीय मीडिया ने भी पूरन सिंह की कहानी को छापा और पंजाब में उनके परिवार को खोज निकाला गया.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए जमाल