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मनोरंजन

कपड़ों से आंकना सही नहीं

अगर कोई अभिनेत्री किसी किरदार के लिए कम कपड़े पहनती है या बिकिनी शूट करती है तो क्या यह उसका निजी व्यक्तित्व दिखाता है? इस बारे में हमेशा से बहस होती रही है, लेकिन अभिनेत्री सोहा अली खान इस रवैये से नाराज लगती हैं.

सोहा की मां और खुद अभिनेत्री रह चुकी शर्मिला टैगोर ने भी अपने दौर में बिकिनी पहनने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई. सोहा कहती हैं कि कपड़ों के आधार पर किसी को आंकना सही नहीं है. उन्होंने कहा, "इंडस्ट्री में लोग टाइप कास्ट हो गए हैं. जो सोच बन गई, वह उसी तरह से हमारे बारे में सोचते हैं. उससे बाहर वे हमें देखना ही नहीं चाहते."

पहनावे से लोगों को आंकने वालों से उन्हें एतराज है. उन्होंने कहा, "अगर मुझे एक मैग्जीन के कवर पेज के लिए बिकिनी पहनने की जरूरत पड़ेगी तो मैं पहनूंगी क्योंकि यह उस मैग्जीन की जरूरत है." सोहा के मुताबिक लोगों को लगता है कि अगर इन्होंने बिकिनी पहनी है तो इसका मतलब कि अब आगे ये बोल्ड रोल कर सकती हैं.

वह कहती हैं, "मैं कुछ साबित नहीं करना चाहती और न ही मैं स्टीरियोटाइप इमेज तोड़ना चाहती हूं. मैं अपने आप को कभी भी सीरियसली नहीं लेती. अगर मैं मूड में होती हूं और किसी मैग्जीन से मुझे शूट करने का ऑफर आता है तो हो सकता है कि मैं रिफ्यूज कर दूं क्योंकि उस समय मैं मूड में नहीं होती."

सोहा ने कहा, "एक पोस्टर के लिए मुझे बिकिनी पहनने के लिए कहा गया तो मैंने पहन ली. क्योंकि मैं इसके साथ सहज थी. मैं स्विमिंग सूट के साथ भी सहज रहती हूं, अगर स्वीमिंग पूल बीच पर शूट होना है तो. इसलिए लोगों का यह सोच कि इन्होंने बिकिनी पहन ली तो बोल्ड हो गई है, पूरी तरह गलत है."

एसएफ/एएम (वार्ता)

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