कपड़े पर बहुत कम खर्च करते हैं लोग | दुनिया | DW | 23.04.2014
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दुनिया

कपड़े पर बहुत कम खर्च करते हैं लोग

फुआद अबदुल्ला बांग्लादेश में कई गार्मेंट फैक्ट्रियों के मैनेजिंग डाइरेक्टर हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया कि एक साल पहले एक फैक्ट्री के गिरने का उद्योग पर क्या असर हुआ है. उस दुर्घटना में हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे.

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फुआद अब्दुल्ला

डॉयचे वेले: राना प्लाजा इमारत के गिरने का आपके उद्योग पर क्या असर हुआ है?

फुआद अब्दुल्ला: हमारा कारोबार करने का ढंग, हमारे सोचने का तरीका, सब बदल गया है. अब हमारे लिए तीन पहलू महत्वपूर्ण हैं. इमारत की सुरक्षा, आग से सुरक्षा और इलेक्ट्रिक मशीन चलाने के लिए कामगारों की ट्रेनिंग. ये वे चीजें हैं जिन पर हम अपने कारखानों में इस समय ध्यान दे रहे हैं.पहले हम सिर्फ कीमत, उत्पाद और सप्लाई की क्षमता की बातें करते थे, अब दूसरे पहलू मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं.

अपनी कंपनियों के एक डाइरेक्टर की हैसियत से मैं अब इंजीनियरों के साथ काम कर रहा हूं, हम इलेक्ट्रिक कनेक्शन जैसी चीजों पर बात करते हैं. कामगारों की सुरक्षा की स्थिति राना प्लाजा के गिरने के बाद बदल गई है. इसने हमारे लिए एक नया क्षितिज खोल दिया है.

आपने अपने कारखानों में क्या बदला है?

पहले दो तीन हफ्तों तक हम खबरों पर ध्यान देते रहे. मैने अपने लोगों के साथ हमारे यहां सुरक्षा की स्थिति की जांच की. मेरा सौभाग्य है कि हमारे कारखाने नई इमारतों में हैं, इसलिए उनके गिरने का तो मुझे कोई डर नहीं था. लेकिन सवाल था कि सुरक्षा ट्रेनिंग की क्या स्थिति है, कामगार आग लगने की स्थिति में कितने सचेत हैं, वे कितना जानते हैं, जरूरत पड़ने पर कौन जिम्मेदार है? तब मैंने पाया कि हमारा आग की चेतावनी देने वाला सिस्टम पर्याप्त नहीं था. इससे पहले कि मुझे चेतावनी दी जाती, मैंने आग से सुरक्षा का सिस्टम लगाना शुरू कर दिया.

क्या आपके कामगार जीवनयापन के लिए पर्याप्त कमाते हैं?

मेरे पास कोई आंकड़े नहीं हैं, लेकिन मैं समझता हूं कि हम अपने कामगारों को बहुत अच्छी मजदूरी देते हैं और उनका वेतन कानूनी शर्तों के अनुरूप है. अब ये सामान्य जीवनयापन के लिए काफी है या नहीं, कहना मुश्किल है. यह व्यक्तिपरक है. यह इस पर निर्भर करता है कि कौन कैसे रहना चाहता है. हमारे समाज में कोई अकेला नहीं कमाता, आमदनी पूरे परिवार की होती है. तीन या चार लोगों का परिवार एक साथ रहता है और तब यदि लोग टेक्सटाइल फैक्ट्री में काम करते हैं तो परिवार की साझा आय पर्याप्त होती है.

कामगारों के लिए यूरोपीय या जर्मन ग्राहकों की जिम्मेदारी के बारे में आप क्या सोचते हैं?

अंत में ग्राहक वहां खरीदते हैं जहां सस्ता दाम मिलता है. हम जिस चीज को 6 यूरो में बनाते हैं वह बाजार में 19 यूरो में बिकती है. यह सुनकर लगता है कि जबरदस्त मुनाफा है, लेकिन यह हकीकत नहीं है. एक तो हर पीस बिकता नहीं, इसके अलावा माल को ट्रांसपोर्ट करना पड़ता है, उसे गोदाम में रखना पड़ता है और तब बेचा जाता है. दुकान का भी किराया लगता है. इन पर भारी खर्च होता है. स्वाभाविक रूप से यदि ग्राहक 15 यूरो देगा तो मुझे खुशी होगी. मैं अपने कामगारों को ज्यादा दे पाउंगा, लेकिन आज यूरोप में कोई 50 यूरो का शर्ट नहीं खरीदता. मैंने अपने दौरों पर देखा है कि लोग कपड़े के लिए बहुत कम खर्च करना चाहते हैं. वे मोबाइल फोन खरीदते हैं, छुट्टियां बिताते हैं लेकिन हर कोई 10 यूरो की जींस खोजता है. ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ सस्ता बेचना चाहता हूं.

Bekleidungsfabriken in Bangladesch (Fuad Abdullah)

बांग्लादेश की एक फैक्ट्री

इस कारोबार में क्या अभी भी निष्पक्षता है?

यदि आप मुझसे पूछें तो नहीं. निष्पक्षता नहीं है, लेकिन जिंदगी ऐसी ही है. जब खरीदार बांग्लादेश आते हैं तो उन्हें पता होता है कि हमारा औसत वेतन 80 डॉलर है और वे हिसाब लगाते हैं. यदि वे मुझे जींस के लिए पांच डॉलर देते हैं तो यही पैंट उन्हें थाइलैंड में 9 डॉलर में और चटीन में सात डॉलर में मिलेगा. हर बाजार की अपनी कीमत होती है. ये प्रतिस्पर्धा है. उन्हें लेकिन सारा माल जर्मनी में एक ही डिपार्टमेंटल स्टोर में बेचना है. वे बांग्लादेश में ज्यादा नहीं दे सकते क्योंकि उन्होंने चीन में महंगा खरीदा है. वे वही दाम देंगे जो बांग्लादेश में दूसरे खरीदार भी देते हैं.

ये हकीकत है...

ही हकीकत है, हर कारोबार में, लगभग हर प्रोडक्ट में. हर बार एक ही कहानी.

दुर्घटना के बाद आग और इमारत सुरक्षा पर हुए समझौते के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या कोई बेहतरी आएगी?

हां हर हाल में.

क्यों

जानते हैं, बहुत सारे लोग शिकायत करते हैं कि हम पर बाहरी लोग क्यों दबाव डालते हैं कि हम यूरोप जैसी शर्तों पर काम करें. एकॉर्ड समझौते में 100 मांगे हैं. यदि हम सिर्फ 20 फीसदी भी हासिल करते हैं तो यह कामयाबी होगी. यह उद्योग 80 के दशक में शुरू हुआ है और 20-25 साल पहले फैलना शुरू हुआ. उस समय एकॉर्ड नहीं था, लेकिन वही खरीदार थे जो आज भी खरीदते हैं.उन दिनों ये नियम नहीं थे, आज हैं.

मैं समझता हूं कि एकॉर्ड की वजह से कुछ खराब, बहुत खराब कंपनियां बंद हो जाएंगी. मुझे खराब शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. मेरा मतलब उन कंपनियों से है जो सुरक्षित नहीं हैं, जिन्हें अपने स्तर के लिए कुछ करना होगा. मैं समझता हूं कि एकॉर्ड से सुरक्षा की स्थित बेहतर होगी और उन कारखानों का स्तर बेहतर होगा जहां लोग काम करते हैं.

लेकिन 5000 से ज्यादा फैक्ट्रियों के लिए सिर्फ 19 इंस्पेक्टर हैं. यह संख्या हास्यास्पद है.

मैं समझता हूं कि हम बेहतर हो रहे हैं. और जब एकॉर्ड के तहत किसी फैक्ट्री की जांच होती है तो अलायंस को ऐसा करने की जरूरत नहीं. उनके अपने इंस्पेक्टर हैं. इंस्पेक्टरों का काम भी समय बीतने के साथ बेहतर होता जाएगा. उनमें से एक जर्मनी का है, एक कनाडा का है, एक ब्रिटेन का है. उनमें से कुछ पहले कभी बांग्लादेश नहीं आए और उन्हें कुछ भी पता नहीं है. उन्हें यहां रहते हुए अपना काम सुधारना होगा. एकॉर्ड इस समय बांग्लादेश की स्थिति से निबटने के बारे में सीख रहा है. हम दक्षिण एशिया में हैं, बांग्लादेश में हैं, सिंगापुर में नहीं हैं, थाइलैंड में नहीं हैं. उन्हें यहां की स्थिति का आकलन करना होगा और तब कार्रवाई करनी होगी.

फुआद अब्दुल्ला बांग्लादेश की चार कपड़ा फैक्ट्रियों के मैनेजिंग डाइरेक्टर हैं. इनमें 8000 लोग काम करते हैं. राजधानी ढाका में रजिस्टर्ड ये कंपनियां पूरी दुनिया में माल बेचती है. मुख्य ग्राहक सीएंडए, एचएंडएम, टॉम टेलर और बेनेटन जैसी यूरोपीय कंपनियां हैं.

इंटरव्यूः कार्मेन मायर/एमजे
संपादनः आभा मोंढे